गोबर और कृषि कचरे को अब मिलेगा नया मूल्य
देश में किसानों की आय बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में गोबरधन योजना को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर कुल 23,731 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य गांवों में उपलब्ध गोबर, कृषि अवशेष और जैविक कचरे का बेहतर उपयोग करके स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार करना है। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी का नया अवसर मिलेगा और देश में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। लंबे समय से खेतों में बचा फसल अवशेष और पशुओं का गोबर पूरी तरह उपयोग में नहीं आ पाता था, लेकिन अब यही संसाधन किसानों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बन सकते हैं।
2026 से 2036 तक लागू रहेगी योजना
सरकार ने जानकारी दी है कि गोबरधन योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू किया जाएगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बताया कि यह योजना आने वाले दस वर्षों तक चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल बायोगैस बनाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना, किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करना और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना भी है। सरकार चाहती है कि गांव ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनें और जैविक संसाधनों का अधिकतम लाभ किसानों को मिले।
किन संसाधनों का होगा उपयोग
इस योजना के तहत केवल पशुओं का गोबर ही नहीं, बल्कि खेती के बाद बचा फसल अवशेष, गन्ने की खोई, नगर निकायों से निकलने वाला जैविक कचरा, फल-सब्जियों का खराब हिस्सा और अन्य प्रकार के बायोमास का भी उपयोग किया जाएगा। इन सभी जैविक संसाधनों से कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) और उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाएगी। इससे बेकार समझे जाने वाले संसाधनों का सही उपयोग होगा और किसानों को इनसे आर्थिक लाभ मिलेगा। गांवों में कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन भी आसान होगा और स्वच्छता अभियान को नई ताकत मिलेगी।
किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी बड़ी मदद
सरकार का मानना है कि गोबरधन योजना किसानों के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत साधन बन सकती है। अभी तक अधिकांश किसान गोबर और कृषि कचरे का सीमित उपयोग ही कर पाते थे। कई जगह पराली जलाने जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती थीं, जिससे प्रदूषण बढ़ता था। योजना लागू होने के बाद किसान अपने गांव या आसपास स्थापित बायोगैस संयंत्रों को गोबर और कृषि अवशेष बेच सकेंगे। इससे उन्हें नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। साथ ही बायोगैस संयंत्रों से तैयार जैविक खाद खेतों में उपयोग होने से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और खेती की लागत भी घट सकती है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ने से फसल उत्पादन में भी सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।
सरकार देगी कई तरह की सहायता
सरकार ने स्पष्ट किया है कि गोबरधन योजना को सफल बनाने के लिए केवल संयंत्र लगाने तक सीमित प्रयास नहीं किए जाएंगे। इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। योजना के अंतर्गत बायोगैस की सुनिश्चित मांग तैयार की जाएगी, आकर्षक और स्थिर मूल्य निर्धारण की व्यवस्था होगी, परियोजनाओं को पूंजीगत सहायता दी जाएगी, गैस पाइपलाइन जैसी आवश्यक अवसंरचना विकसित की जाएगी और आसान ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा नई तकनीकों के विकास और आधुनिक उपकरणों को बढ़ावा देकर बायोगैस उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन कदमों से निजी कंपनियों का निवेश भी बढ़ेगा और देश में बड़ी संख्या में नए बायोगैस संयंत्र स्थापित होंगे।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बड़ा लाभ
गोबरधन योजना केवल आर्थिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहद लाभदायक मानी जा रही है। आज भी कई राज्यों में किसान फसल कटाई के बाद खेतों में पराली जला देते हैं, जिससे वायु प्रदूषण गंभीर रूप ले लेता है। यदि यही कृषि अवशेष बायोगैस उत्पादन में इस्तेमाल होगा तो प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही गोबर और जैविक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन होने से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी कम होगा। स्वच्छ ईंधन का उत्पादन बढ़ने से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटेगी और देश स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगा। जैविक खाद के अधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
इस योजना का एक बड़ा फायदा ग्रामीण रोजगार के रूप में भी देखने को मिलेगा। बायोगैस संयंत्रों की स्थापना, गोबर और कृषि अवशेषों का संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और जैविक खाद के उत्पादन जैसे कार्यों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल सकता है। इससे गांवों में छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग विकसित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। विशेष रूप से पशुपालन करने वाले परिवारों को इसका अधिक लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि उनके पास पहले से उपलब्ध गोबर अब अतिरिक्त आय का साधन बन जाएगा। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए भी नए स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे।
ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम
भारत लगातार स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में गोबरधन योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बायोगैस का उपयोग घरेलू ईंधन, औद्योगिक कार्यों और परिवहन क्षेत्र में भी किया जा सकता है। यदि बड़े पैमाने पर कम्प्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन होता है तो प्राकृतिक गैस और अन्य पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी। इससे ऊर्जा आयात पर होने वाला खर्च भी घट सकता है और देश को आर्थिक लाभ मिलेगा।
असम को भी मिली बड़ी सौगात
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस बैठक में असम के लिए भी एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को मंजूरी दी है। सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर लगभग 135.871 किलोमीटर लंबे गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर के विकास के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इस परियोजना पर करीब 8,970.20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। चार लेन वाला यह राजमार्ग निर्माण-संचालन-हस्तांतरण (BOT) टोल मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना और यातायात को अधिक सुरक्षित तथा तेज बनाना है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी नई सड़क
इस परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य किए जाएंगे। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक कम करने के लिए बाइहाटा चारियाली, सिपाझार, खरुपेटिया, देकियाजुली और तेजपुर में पांच बड़े बाइपास बनाए जाएंगे। इसके अलावा 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर और 46 अंडरपास का निर्माण भी किया जाएगा। तेजपुर बाइपास में हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष अंडरपास बनाया जाएगा। परियोजना की सबसे खास बात लगभग 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा है, जिसका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर भारतीय वायुसेना भी कर सकेगी। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी इस परियोजना का महत्व बढ़ जाता है।
यात्रा होगी तेज और सुरक्षित
सरकार का दावा है कि नई सड़क बनने के बाद यात्रा की औसत रफ्तार लगभग दोगुनी हो जाएगी और लोगों का समय काफी बचेगा। बेहतर सड़क नेटवर्क से वाहन संचालन लागत कम होगी, ईंधन की बचत होगी और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है। व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, जिससे पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर गोबरधन योजना केंद्र सरकार की उन महत्वपूर्ण पहलों में शामिल है, जिनका सीधा लाभ किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को मिलेगा। गोबर, कृषि अवशेष और जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन बनाकर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो गांवों में स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा, जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा, प्रदूषण कम होगा और लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। दूसरी ओर असम की नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई दिशा देगी। आने वाले वर्षों में ये दोनों फैसले देश के समग्र विकास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और किसानों की आर्थिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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