पिछले कुछ दिनों में शेयर बाजार में सिगरेट शेयरों में तेजी निवेशकों के बीच चर्चा का बड़ा कारण बन गई है। जैसे ही सिगरेट की कीमतों में इजाफा हुआ, वैसे ही तंबाकू से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला। लंबे समय से दबाव में चल रहे ITC, गॉडफ्रे फिलिप्स और VST इंडस्ट्रीज जैसे बड़े शेयरों में अचानक आई मजबूती ने बाजार की दिशा को बदल दिया। निवेशकों को यह संकेत मिला कि कंपनियां बढ़ती लागत के बावजूद अपने कारोबार को संभालने की स्थिति में हैं।
हाल के महीनों में सिगरेट उद्योग कई चुनौतियों से जूझ रहा था। टैक्स बढ़ोतरी, नियमों में सख्ती और लागत में बढ़ोतरी के चलते कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ रहा था। ऐसे माहौल में शेयरों में गिरावट स्वाभाविक थी। लेकिन जब कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया, तो बाजार ने इसे एक सकारात्मक कदम के तौर पर लिया। इससे निवेशकों को भरोसा हुआ कि कंपनियां नुकसान से बचने और अपने मार्जिन को बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठा रही हैं। इसी सोच ने सिगरेट शेयरों में तेजी को हवा दी।
किन कंपनियों के शेयरों में आई मजबूती
कारोबार के दौरान गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। यह शेयर दिन भर खरीदारी के दबाव में रहा और ऊंचे स्तर पर बंद हुआ। ITC के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई और निवेशकों ने इसमें दोबारा रुचि दिखाई। VST इंडस्ट्रीज के शेयरों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। काफी समय से इन कंपनियों के शेयर आकर्षक मूल्यांकन पर मिल रहे थे, इसलिए कई निवेशकों ने इन्हें लंबे समय के निवेश के लिहाज से उपयुक्त माना।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी सेक्टर के शेयर लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन करते हैं और अचानक उसमें सुधार के संकेत मिलते हैं, तो निवेशकों का भरोसा लौटने लगता है। यही स्थिति इस समय सिगरेट कंपनियों के शेयरों के साथ देखने को मिल रही है। हालांकि यह तेजी स्थायी होगी या नहीं, यह आगे के कारोबारी नतीजों और बाजार की धारणा पर निर्भर करेगा।
सिगरेट के दाम बढ़ने से बदला बाजार का नजरिया
हाल ही में कई सिगरेट ब्रांड्स की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। कुछ पैक्स पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं। कंपनियों का कहना है कि टैक्स और कच्चे माल की लागत बढ़ने के कारण कीमतें बढ़ाना मजबूरी बन गया था। दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं पर असर जरूर पड़ेगा, लेकिन कंपनियों को उम्मीद है कि उनकी बिक्री पर इसका बहुत बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
बाजार में यह भी चर्चा है कि कीमतें बढ़ने से कुछ ग्राहक सस्ते विकल्पों की ओर जा सकते हैं। इसके अलावा अवैध सिगरेट का बाजार भी मजबूत हो सकता है, जिससे कानूनी कंपनियों को नुकसान होने की आशंका रहती है। इसके बावजूद, निवेशकों को लगता है कि बड़ी और जानी-मानी कंपनियां इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं। यही वजह है कि सिगरेट शेयरों में तेजी के साथ इन कंपनियों के शेयरों में नई जान दिख रही है।
टैक्स नीति में बदलाव का असर
सरकार द्वारा सिगरेट पर लगाए जाने वाले करों में समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं। हाल के टैक्स संशोधनों से सिगरेट कंपनियों की लागत और बढ़ गई है। ऐसे में कंपनियों के पास सीमित विकल्प होते हैं—या तो वे मुनाफे में कटौती करें या फिर कीमतें बढ़ाकर लागत की भरपाई करें। अधिकांश कंपनियों ने दूसरा विकल्प चुना है।
बाजार जानकारों का मानना है कि टैक्स नीति का असर केवल कुछ महीनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव लंबे समय तक कारोबार पर पड़ता है। ITC जैसी कंपनियों के लिए यह थोड़ा आसान होता है क्योंकि उनका कारोबार केवल सिगरेट तक सीमित नहीं है। एफएमसीजी, होटल और कृषि जैसे अन्य क्षेत्रों से होने वाली आय कंपनी को संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इसी कारण ITC को निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प मानते हैं।
NCCD को लेकर भविष्य की अनिश्चितता
नेशनल कैलामिटी कंटिन्जेंट ड्यूटी को लेकर भी निवेशकों में हल्की चिंता बनी हुई है। भविष्य में इस टैक्स में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, हालांकि फिलहाल कंपनियों पर इसका अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। इससे बाजार को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन यह संकेत भी साफ है कि आने वाले समय में नियम और सख्त हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे केवल मौजूदा तेजी को देखकर फैसला न लें। भविष्य में टैक्स नीति में किसी भी तरह का बदलाव इन कंपनियों की आय और मुनाफे को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सिगरेट शेयरों में निवेश करते समय लंबी अवधि के जोखिमों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
ITC के कारोबारी नतीजों से मिली मजबूती
ITC के हालिया वित्तीय नतीजों ने भी बाजार की धारणा को सहारा दिया है। कंपनी की कुल आय में सुधार देखने को मिला है और सिगरेट कारोबार से होने वाली कमाई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि मुनाफे के मार्जिन पर दबाव बना हुआ है, जो बढ़ती लागत और टैक्स का संकेत देता है।
इसके बावजूद, निवेशकों को भरोसा है कि ITC का विविध व्यवसाय मॉडल इसे लंबे समय में मजबूत बनाए रखेगा। सिगरेट कारोबार के अलावा एफएमसीजी और होटल जैसे सेक्टरों में कंपनी की मौजूदगी इसे अन्य तंबाकू कंपनियों की तुलना में बेहतर स्थिति में रखती है। यही कारण है कि सिगरेट शेयरों में तेजी के दौरान ITC के शेयरों में भी लगातार खरीदारी देखने को मिली।
निवेशकों के लिए क्या हो सकती है सही रणनीति
जो निवेशक इस सेक्टर में निवेश करने की सोच रहे हैं, उन्हें जल्दबाजी से बचना चाहिए। सिगरेट शेयरों में तेजी आकर्षक जरूर लगती है, लेकिन इसमें जोखिम भी छिपा हुआ है। कीमतों में बढ़ोतरी से मांग पर असर पड़ सकता है और टैक्स नीति में भविष्य के बदलाव इस सेक्टर के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह बेहतर होगा कि वे केवल एक सेक्टर पर निर्भर न रहें। अपने पोर्टफोलियो में अलग-अलग क्षेत्रों के शेयर शामिल करके जोखिम को संतुलित किया जा सकता है। इसके अलावा, मजबूत बुनियादी ढांचे और विविध कारोबार वाली कंपनियों को प्राथमिकता देना समझदारी भरा कदम हो सकता है।
निष्कर्ष
सारांश रूप में देखा जाए तो सिगरेट शेयरों में तेजी ने बाजार में एक नई हलचल पैदा कर दी है। सिगरेट की कीमतों में बढ़ोतरी, टैक्स नीति में बदलाव और लंबे समय से गिरे हुए शेयरों में आई नई खरीदारी ने ITC, गॉडफ्रे फिलिप्स और VST इंडस्ट्रीज के शेयरों को सहारा दिया है। आगे चलकर चुनौतियां बनी रह सकती हैं, लेकिन फिलहाल निवेशकों की धारणा सकारात्मक है। सही जानकारी, धैर्य और संतुलित रणनीति के साथ इस सेक्टर में अवसर तलाशे जा सकते हैं।
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