शेयर बाजार में Black Opal Consultants IPO को लेकर इस समय काफी चर्चा देखने को मिल रही है। कंपनी का आईपीओ 29 सितंबर को निवेशकों के लिए खुला था और इसमें आवेदन करने की अंतिम तारीख 1 अक्टूबर थी। इश्यू बंद होने तक इसे निवेशकों की ओर से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार आईपीओ को कुल 73 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। अब जिन लोगों ने इसमें आवेदन किया है, उनकी नजर शेयर अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीख पर है।
इस आईपीओ की चर्चा का एक बड़ा कारण इसका Grey Market Premium यानी GMP भी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ग्रे मार्केट में Black Opal Consultants IPO करीब 80 रुपये के प्रीमियम पर कारोबार करता बताया जा रहा है। कंपनी का इश्यू प्राइस 197 रुपये प्रति शेयर है। इस आधार पर गणना करने पर लगभग 40 प्रतिशत के आसपास संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत मिलता है। लेकिन निवेशकों को यहां एक महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखनी चाहिए कि GMP केवल ग्रे मार्केट का अनौपचारिक संकेत है। यह शेयर बाजार में होने वाली वास्तविक लिस्टिंग कीमत की गारंटी नहीं देता।
73 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन से बढ़ी चर्चा
Black Opal Consultants IPO को जिस तरह से निवेशकों की प्रतिक्रिया मिली है, वह इस इश्यू की सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है। उपलब्ध सब्सक्रिप्शन आंकड़ों के अनुसार आईपीओ को कुल मिलाकर 73 गुना से ज्यादा आवेदन मिले। इसका मतलब है कि उपलब्ध शेयरों की तुलना में निवेशकों की मांग कई गुना अधिक रही।
आईपीओ में अलग-अलग श्रेणियों के निवेशकों ने हिस्सा लिया और प्रत्येक कैटेगरी में अच्छी मांग दिखाई दी। रिटेल निवेशकों की तरफ से भी काफी आवेदन आए, जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में मांग और ज्यादा मजबूत रही। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स यानी QIB की तरफ से भी इश्यू को पर्याप्त प्रतिक्रिया मिली।
हालांकि किसी आईपीओ का कई गुना सब्सक्राइब होना निवेशकों की रुचि को जरूर दिखाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं लगाया जा सकता कि लिस्टिंग के बाद शेयर की कीमत निश्चित रूप से बढ़ेगी। शेयर बाजार में कीमत मांग और आपूर्ति के साथ-साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति और बाजार के माहौल से भी प्रभावित होती है।
किस कैटेगरी में कितनी मांग रही?
Black Opal Consultants IPO के सब्सक्रिप्शन आंकड़ों को अलग-अलग श्रेणियों में देखें तो रिटेल कैटेगरी में लगभग 60.15 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया। यानी रिटेल निवेशकों की तरफ से उपलब्ध हिस्से की तुलना में कई गुना अधिक आवेदन आए।
QIB कैटेगरी में करीब 59.77 गुना सब्सक्रिप्शन बताया गया है। इस श्रेणी में योग्य संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं। वहीं NII यानी Non-Institutional Investors कैटेगरी में सबसे अधिक मांग देखने को मिली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार NII हिस्सा करीब 124.29 गुना सब्सक्राइब हुआ।
इन आंकड़ों को देखने के बाद यह कहा जा सकता है कि आईपीओ के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी काफी अधिक रही। फिर भी केवल सब्सक्रिप्शन के आंकड़े के आधार पर किसी शेयर के भविष्य के रिटर्न का अनुमान लगाना सही तरीका नहीं है।
5 अक्टूबर को हो सकता है शेयर अलॉटमेंट
आईपीओ में आवेदन करने वाले निवेशकों के लिए अब अगला महत्वपूर्ण चरण शेयर अलॉटमेंट है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक Black Opal Consultants IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 5 अक्टूबर को किया जाना प्रस्तावित है।
जिन निवेशकों को शेयर मिलेंगे, उन्हें आगे निर्धारित प्रक्रिया के तहत शेयर उनके डीमैट अकाउंट में मिल सकते हैं। जिन निवेशकों को शेयर अलॉट नहीं होंगे, उनके आवेदन से जुड़ी राशि की प्रक्रिया भी निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ेगी।
अलॉटमेंट के बाद निवेशकों की नजर सीधे लिस्टिंग पर रहेगी। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 7 अक्टूबर को प्रस्तावित बताई गई है। इसलिए IPO बंद होने के बाद निवेशकों को अलॉटमेंट और लिस्टिंग के बीच ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
197 रुपये था आईपीओ का प्राइस
Black Opal Consultants IPO के लिए कंपनी ने प्रति शेयर 197 रुपये का इश्यू प्राइस तय किया था। इसी कीमत के आधार पर निवेशकों ने शेयरों के लिए आवेदन किया।
रिटेल निवेशकों के लिए एक लॉट में 600 शेयर रखे गए थे। 197 रुपये प्रति शेयर की कीमत के हिसाब से एक लॉट का मूल्य 1,18,200 रुपये बनता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नियमों के तहत कम से कम दो लॉट के लिए आवेदन करना जरूरी था। इस वजह से न्यूनतम आवेदन राशि करीब 2,36,400 रुपये हो गई।
यह राशि कई छोटे निवेशकों के लिए सामान्य आईपीओ की तुलना में अधिक हो सकती है। इसलिए ऐसे निवेश में आवेदन करने से पहले निवेशक को अपनी उपलब्ध पूंजी और जोखिम उठाने की क्षमता पर जरूर विचार करना चाहिए।
Black Opal Consultants IPO GMP पर क्यों है नजर?
आईपीओ बंद होने के बाद निवेशकों के बीच Black Opal Consultants IPO GMP Today सबसे ज्यादा चर्चा वाले विषयों में शामिल है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक ग्रे मार्केट में इस आईपीओ का प्रीमियम लगभग 80 रुपये बताया जा रहा है।
इसे अगर केवल गणित के नजरिए से देखें तो 197 रुपये के इश्यू प्राइस में 80 रुपये जोड़ने पर 277 रुपये की अनुमानित कीमत निकलती है। 197 रुपये की तुलना में 80 रुपये का अंतर लगभग 40 प्रतिशत बैठता है। इसी कारण बाजार में यह चर्चा हो रही है कि आईपीओ की संभावित लिस्टिंग इश्यू प्राइस से करीब 40 प्रतिशत ऊपर हो सकती है।
लेकिन यहां निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। GMP किसी स्टॉक एक्सचेंज पर तय होने वाली आधिकारिक कीमत नहीं है। ग्रे मार्केट में स्थिति लिस्टिंग से पहले किसी भी समय बदल सकती है। इसलिए मौजूदा GMP को लिस्टिंग का पक्का भाव समझना सही नहीं होगा।
पहले 78 रुपये था GMP
उपलब्ध जानकारी के अनुसार Black Opal Consultants IPO का GMP इससे पहले लगभग 78 रुपये बताया गया था। बाद में यह करीब 80 रुपये तक पहुंचने की जानकारी सामने आई।
GMP में होने वाला बदलाव इस बात का संकेत दे सकता है कि ग्रे मार्केट में निवेशकों की धारणा बदल रही है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि एक्सचेंज पर शेयर की कीमत भी उसी अनुपात में बदलेगी।
IPO में निवेश करने वाले लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि ग्रे मार्केट और आधिकारिक शेयर बाजार अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। इसलिए GMP को केवल एक अतिरिक्त संकेत के रूप में देखना चाहिए, न कि निवेश का अंतिम आधार बनाना चाहिए।
40 प्रतिशत लिस्टिंग गेन की चर्चा कितनी सही?
Black Opal Consultants IPO को लेकर करीब 40 प्रतिशत लिस्टिंग गेन की चर्चा GMP के आधार पर हो रही है। इसका आधार 197 रुपये का इश्यू प्राइस और करीब 80 रुपये का मौजूदा बताया गया GMP है।
अगर 80 रुपये के प्रीमियम को 197 रुपये में जोड़ा जाए तो आंकड़ा 277 रुपये आता है। लेकिन यह केवल संभावित गणना है। वास्तविक शेयर बाजार में कंपनी का शेयर इससे अलग कीमत पर लिस्ट हो सकता है।
लिस्टिंग के दिन बाजार में खरीदारी का दबाव अधिक हुआ तो कीमत ऊपर जा सकती है और अगर बिक्री ज्यादा हुई तो कीमत अनुमान से नीचे भी रह सकती है। इसके अलावा उस दिन पूरे शेयर बाजार का रुख भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसलिए 40 प्रतिशत को निश्चित लाभ समझना उचित नहीं है। यह केवल मौजूदा ग्रे मार्केट प्रीमियम से निकाला गया एक संभावित संकेत है।
एंकर निवेशकों से मिले 15.69 करोड़ रुपये
Black Opal Consultants IPO में एंकर निवेशकों की भागीदारी भी रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए करीब 15.69 करोड़ रुपये जुटाए थे।
एंकर निवेशक आमतौर पर बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं। आईपीओ शुरू होने से पहले उनके लिए शेयर आवंटित करने की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इससे इश्यू में संस्थागत निवेशकों की भागीदारी का पता चलता है।
बताई गई जानकारी के अनुसार एंकर निवेशकों को आवंटित शेयरों में से 50 प्रतिशत शेयरों के लिए 30 दिन का लॉक-इन पीरियड है। बाकी 50 प्रतिशत शेयरों पर 90 दिन का लॉक-इन बताया गया है।
लॉक-इन अवधि के दौरान संबंधित शेयरों की बिक्री पर निर्धारित नियमों के अनुसार प्रतिबंध रहता है। इसलिए एंकर निवेशकों के शेयरों की लॉक-इन जानकारी भी आईपीओ से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू है।
कंपनी का IPO साइज कितना है?
Black Opal Consultants IPO का कुल आकार करीब 55.08 करोड़ रुपये बताया गया है। इस इश्यू में फ्रेश इश्यू के साथ-साथ ऑफर फॉर सेल का हिस्सा भी शामिल है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कंपनी करीब 22.38 लाख नए शेयर जारी कर रही है। इसके अतिरिक्त ऑफर फॉर सेल के माध्यम से लगभग 10.99 करोड़ रुपये के शेयर बेचने की जानकारी दी गई है।
फ्रेश इश्यू और OFS के बीच अंतर समझना निवेशकों के लिए जरूरी है। फ्रेश इश्यू से कंपनी को नई पूंजी प्राप्त होती है, जबकि OFS में मौजूदा शेयरधारक अपने हिस्से के शेयर बेचते हैं। OFS से मिलने वाली रकम सामान्य तौर पर कंपनी के बजाय शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारक को जाती है।
इसलिए किसी भी IPO को समझते समय केवल कुल इश्यू साइज देखना पर्याप्त नहीं होता। निवेशक को यह भी देखना चाहिए कि कुल रकम में नया इश्यू कितना है और OFS कितना है।
IPO के लिए कौन-कौन से अधिकारी नियुक्त हैं?
कंपनी ने Black Opal Consultants IPO की प्रक्रिया के लिए Khambatta Securities Limited को लीड मैनेजर नियुक्त किया है। वहीं Skyline Financial Services Private Limited को इश्यू का रजिस्ट्रार बनाया गया है।
IPO की प्रक्रिया में लीड मैनेजर और रजिस्ट्रार दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। निवेशकों को अलॉटमेंट से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए।
विशेष रूप से अलॉटमेंट के समय इंटरनेट पर कई अनधिकृत वेबसाइट और लिंक सामने आ सकते हैं। निवेशकों को किसी भी संदिग्ध लिंक पर अपनी PAN, बैंक या डीमैट संबंधी जानकारी दर्ज करने से बचना चाहिए।
रिटेल निवेशकों के लिए क्या रहा अनुभव?
रिटेल कैटेगरी में करीब 60.15 गुना सब्सक्रिप्शन इस आईपीओ की मजबूत मांग को दर्शाता है। उपलब्ध शेयरों की तुलना में आवेदन काफी अधिक आने की वजह से अलॉटमेंट को लेकर निवेशकों की उत्सुकता भी बढ़ गई है।
कई बार जब किसी आईपीओ को बहुत ज्यादा आवेदन मिलते हैं तो प्रत्येक आवेदक को शेयर मिलने की संभावना कम हो सकती है। हालांकि वास्तविक अलॉटमेंट निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध शेयरों के अनुसार होता है।
इसलिए किसी निवेशक ने दो या अधिक लॉट के लिए आवेदन किया है तो यह जरूरी नहीं कि उसे सभी शेयर मिल जाएं। अलॉटमेंट की अंतिम स्थिति आधिकारिक परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
QIB और NII की भागीदारी भी महत्वपूर्ण
इस IPO में केवल रिटेल निवेशकों ने ही दिलचस्पी नहीं दिखाई। QIB कैटेगरी में भी करीब 59.77 गुना सब्सक्रिप्शन और NII हिस्से में करीब 124.29 गुना सब्सक्रिप्शन की जानकारी सामने आई है।
NII कैटेगरी में इतनी अधिक मांग ने IPO के कुल सब्सक्रिप्शन आंकड़े को काफी ऊपर पहुंचाने में भूमिका निभाई। दूसरी तरफ QIB कैटेगरी का मजबूत सब्सक्रिप्शन भी इस इश्यू की मांग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
फिर भी इन आंकड़ों को कंपनी के भविष्य के शेयर प्रदर्शन का सीधा संकेत नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।
लिस्टिंग के दिन क्या हो सकता है?
Black Opal Consultants IPO की प्रस्तावित लिस्टिंग 7 अक्टूबर को बताई गई है। लिस्टिंग वाले दिन निवेशकों की सबसे ज्यादा नजर शुरुआती बाजार भाव पर रहेगी।
अगर शुरुआती खरीदारी मजबूत रही तो शेयर इश्यू प्राइस से ऊपर कारोबार शुरू कर सकता है। दूसरी तरफ अगर बाजार में बिक्री का दबाव रहा तो शुरुआती कीमत अपेक्षाकृत कम भी हो सकती है।
GMP के आधार पर करीब 40 प्रतिशत की संभावित बढ़त की चर्चा जरूर है, लेकिन इसे निश्चित परिणाम मानना उचित नहीं होगा। लिस्टिंग का वास्तविक मूल्य केवल उस समय बाजार में मौजूद मांग और आपूर्ति से तय होगा।
इसके अलावा उस दिन व्यापक बाजार का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार में अचानक कोई बड़ी तेजी या गिरावट आने पर IPO की लिस्टिंग पर भी उसका प्रभाव पड़ सकता है।
IPO में निवेश से पहले किन बातों पर ध्यान देना चाहिए?
किसी भी IPO में निवेश करने से पहले केवल सोशल मीडिया, GMP या सब्सक्रिप्शन आंकड़ों पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। सबसे पहले कंपनी का कारोबार समझना जरूरी है।
निवेशक को यह देखना चाहिए कि कंपनी की आय किस तरह आती है, उसका बिजनेस मॉडल क्या है, कंपनी लगातार मुनाफा कमा रही है या नहीं, उसके ऊपर कर्ज कितना है और भविष्य में कंपनी का कारोबार किस दिशा में बढ़ सकता है।
इसके साथ ही कंपनी के आधिकारिक IPO दस्तावेजों में दिए गए जोखिम कारकों को पढ़ना भी महत्वपूर्ण है। इन दस्तावेजों में कारोबार, वित्तीय स्थिति, प्रमोटर, कंपनी के जोखिम और इश्यू से संबंधित कई जरूरी जानकारी दी जाती है।
अगर कोई निवेशक केवल यह देखकर आवेदन करता है कि IPO 70 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हो गया है या GMP 80 रुपये है, तो वह कंपनी के दूसरे महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज कर सकता है।
Black Opal Consultants IPO की प्रमुख तारीखें
Black Opal Consultants IPO से जुड़ी प्रमुख तारीखों और आंकड़ों को एक नजर में समझें तो IPO 29 सितंबर को खुला था। निवेशकों के पास 1 अक्टूबर तक आवेदन करने का अवसर था।
शेयर अलॉटमेंट 5 अक्टूबर को प्रस्तावित बताया गया है। वहीं कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 7 अक्टूबर को होने की जानकारी दी गई है।
कंपनी का इश्यू प्राइस 197 रुपये प्रति शेयर था और रिटेल निवेशकों के लिए 600 शेयरों का एक लॉट निर्धारित था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार न्यूनतम दो लॉट के लिए आवेदन की आवश्यकता थी, जिसके कारण न्यूनतम राशि करीब 2,36,400 रुपये रही।
IPO का कुल आकार लगभग 55.08 करोड़ रुपये है। वहीं ग्रे मार्केट में लगभग 80 रुपये के प्रीमियम की जानकारी सामने आई है।
शेयर अलॉटमेंट कैसे चेक करें?
जिन लोगों ने Black Opal Consultants IPO में पैसा लगाया है, वे अलॉटमेंट जारी होने के बाद अपनी स्थिति जांच सकते हैं। इसके लिए संबंधित IPO रजिस्ट्रार या स्टॉक एक्सचेंज के आधिकारिक माध्यम का इस्तेमाल करना चाहिए।
अलॉटमेंट चेक करने के लिए निवेशक से PAN, आवेदन संख्या या अन्य निर्धारित विवरण मांगे जा सकते हैं। सही जानकारी दर्ज करने के बाद यह पता चल सकता है कि आवेदन के बदले कितने शेयर मिले हैं।
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अलॉटमेंट से जुड़ी जानकारी केवल विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोत से ही प्राप्त करें। किसी अनजान वेबसाइट पर निजी वित्तीय जानकारी दर्ज करना जोखिम भरा हो सकता है।
GMP और IPO की वास्तविक कीमत में अंतर क्यों होता है?
GMP और शेयर की वास्तविक बाजार कीमत को एक जैसा समझना सही नहीं है। GMP ग्रे मार्केट में चलने वाला एक अनौपचारिक प्रीमियम है, जबकि वास्तविक लिस्टिंग कीमत स्टॉक एक्सचेंज पर खरीद और बिक्री की स्थिति से तय होती है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी IPO का इश्यू प्राइस 197 रुपये है और GMP 80 रुपये है, तो गणित के हिसाब से 277 रुपये का अनुमान लगाया जा सकता है। लेकिन यह केवल एक अनुमान है।
लिस्टिंग के समय निवेशकों की मांग बहुत ज्यादा हुई तो कीमत अलग हो सकती है। अगर बाजार में बिकवाली ज्यादा रही तो कीमत अनुमान से नीचे भी जा सकती है।
यही कारण है कि GMP को सिर्फ एक संकेत के रूप में देखना बेहतर है। इसे निश्चित रिटर्न या गारंटीड लिस्टिंग प्राइस मानना सही नहीं होगा।
लिस्टिंग से पहले निवेशकों की नजर किन चीजों पर होगी?
अब Black Opal Consultants IPO के निवेशकों के लिए आने वाले दिनों में कुछ प्रमुख घटनाएं महत्वपूर्ण होंगी। सबसे पहले शेयर अलॉटमेंट की जानकारी सामने आएगी। इसके बाद लिस्टिंग से पहले GMP में क्या बदलाव होता है, इस पर भी बाजार की नजर रहेगी।
अगर ग्रे मार्केट प्रीमियम में बदलाव होता है तो संभावित लिस्टिंग को लेकर बाजार की चर्चा भी बदल सकती है। हालांकि अंतिम कीमत फिर भी एक्सचेंज पर ही तय होगी।
लिस्टिंग के दिन बाजार की सामान्य दिशा भी महत्वपूर्ण रहेगी। अगर पूरे बाजार में कमजोरी रहती है तो उसका असर नए लिस्ट होने वाले शेयर पर भी पड़ सकता है। इसी तरह सकारात्मक बाजार माहौल में मांग मजबूत रह सकती है।
इसलिए लिस्टिंग से पहले किसी निश्चित लाभ की भविष्यवाणी करना उचित नहीं है।
क्या Black Opal Consultants IPO में 40% फायदा निश्चित है?
नहीं। उपलब्ध GMP के आधार पर लगभग 40 प्रतिशत के संभावित लिस्टिंग गेन की चर्चा है, लेकिन इसे पक्का मुनाफा नहीं कहा जा सकता।
197 रुपये के इश्यू प्राइस और लगभग 80 रुपये के GMP के आधार पर करीब 277 रुपये का संभावित मूल्य निकलता है। लेकिन यह केवल गणितीय अनुमान है।
वास्तविक बाजार में शेयर की शुरुआत 277 रुपये से ऊपर भी हो सकती है और इससे नीचे भी। इसका फैसला लिस्टिंग के समय बाजार में मौजूद खरीद-बिक्री की ताकत करेगी।
निवेशकों को इसलिए किसी भी संभावित रिटर्न को गारंटी की तरह नहीं देखना चाहिए। IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी और बाजार से जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है।
Black Opal Consultants IPO में अब आगे क्या?
IPO का सब्सक्रिप्शन चरण पूरा हो चुका है। अब निवेशकों का ध्यान अलॉटमेंट और लिस्टिंग पर है। 5 अक्टूबर को प्रस्तावित अलॉटमेंट के बाद निवेशकों को यह पता चलेगा कि उन्हें शेयर मिले हैं या नहीं।
इसके बाद 7 अक्टूबर को प्रस्तावित लिस्टिंग के दौरान कंपनी के शेयर का वास्तविक बाजार भाव सामने आएगा। इसी समय GMP से लगाए जा रहे अनुमानों की तुलना वास्तविक बाजार कीमत से की जा सकेगी।
फिलहाल ग्रे मार्केट में लगभग 80 रुपये के प्रीमियम की जानकारी होने के कारण करीब 40 प्रतिशत संभावित लिस्टिंग गेन की चर्चा जरूर है, लेकिन अंतिम परिणाम के लिए आधिकारिक लिस्टिंग का इंतजार करना होगा।
निष्कर्ष
Black Opal Consultants IPO को सब्सक्रिप्शन अवधि के दौरान निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल इश्यू 73 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ। रिटेल कैटेगरी में करीब 60.15 गुना, QIB में 59.77 गुना और NII कैटेगरी में लगभग 124.29 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया।
कंपनी ने IPO का प्राइस 197 रुपये प्रति शेयर तय किया था। रिटेल निवेशकों के लिए 600 शेयरों का एक लॉट था और उपलब्ध जानकारी के अनुसार न्यूनतम दो लॉट के लिए करीब 2,36,400 रुपये की जरूरत थी। कंपनी के इश्यू का कुल आकार लगभग 55.08 करोड़ रुपये बताया गया है।
इस IPO को लेकर सबसे ज्यादा ध्यान फिलहाल Black Opal Consultants IPO GMP पर है। ग्रे मार्केट में लगभग 80 रुपये के प्रीमियम की जानकारी के आधार पर इश्यू प्राइस की तुलना में करीब 40 प्रतिशत के संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत मिल रहा है।
फिर भी GMP को निश्चित मुनाफा या पक्की लिस्टिंग कीमत नहीं समझना चाहिए। ग्रे मार्केट का प्रीमियम लिस्टिंग से पहले बदल सकता है और वास्तविक शेयर कीमत बाजार में मांग तथा आपूर्ति के आधार पर तय होगी।
कंपनी के शेयर अलॉटमेंट की प्रस्तावित तारीख 5 अक्टूबर और लिस्टिंग की प्रस्तावित तारीख 7 अक्टूबर है। इसलिए अब निवेशकों की नजर इन दोनों तारीखों पर रहेगी। किसी भी निवेश संबंधी निर्णय से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज, वित्तीय आंकड़े, जोखिम और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान से समझना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। GMP और संभावित लिस्टिंग गेन की जानकारी बदल सकती है। निवेश करने से पहले कंपनी की आधिकारिक जानकारी और जोखिमों की जांच जरूर करें। यह निवेश सलाह नहीं है।
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