गर्मियों का मौसम था। आसमान से आग जैसी धूप बरस रही थी और पेड़ों की पत्तियाँ भी जैसे तपकर सिकुड़ने लगी थीं। जंगल में रहने वाले सारे जानवर परेशान थे, क्योंकि पिछले कई दिनों से बारिश नहीं हुई थी और पानी की कमी हर तरफ दिखाई दे रही थी। किसी तालाब में पानी आधा था, किसी नदी की गहराई कम हो गई थी, और कई छोटे-छोटे पोखर तो बिल्कुल सूख चुके थे। ऐसे में हर पक्षी, हर जीव सिर्फ एक ही चीज़ ढूँढ रहा था—पानी। यही इस Thirsty Crow Story in Hindi की शुरुआत है, जिसमें एक छोटे से कौए की बड़ी सी सीख छिपी है।
जंगल के किनारे के बड़े नीम के पेड़ पर एक चंचल और बुद्धिमान कौआ रहता था, जिसका नाम कोको था। कोको बाकी कौओं से थोड़ा अलग था। जहाँ बाकी कौए बिना सोचे-समझे उड़ जाते थे, वहीं कोको हर काम दिमाग लगाकर करता था। वह हमेशा अपने दादाजी की बातें याद रखता था कि “मुश्किलें जब भी रास्ते में आएँ, घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सोचना चाहिए कि उन्हें कैसे हल किया जाए।” लेकिन आज, गर्मी इतनी ज्यादा थी कि कोको का दिमाग भी जैसे सूख गया था। उसका गला सूख रहा था, पंख गर्म हो चुके थे, और आँखों में धूप से जलन होने लगी थी।
सुबह से उसने कई जगह पानी खोजा, लेकिन हर जगह मायूसी हाथ लगी। कभी तालाब का सूखा किनारा दिखता, कभी किसी बर्तन में बस थोड़ी सी भीगी मिट्टी नजर आती। लगातार उड़ते-उड़ते कोको बहुत थक चुका था और अब उसे लग रहा था कि शायद आज उसे पीने के लिए पानी नहीं मिलेगा। लेकिन हार मानना उसके स्वभाव में था ही नहीं। वह बार-बार खुद को समझा रहा था— “नहीं कोको, हार मानना बहुत आसान है, लेकिन कोशिश करना ही असली हिम्मत है।”
इसी सोच के साथ वह एक बार फिर अपने पंख फैलाकर उड़ गया। रास्ते में उसे कई पक्षी मिले, कोई चुपचाप पेड़ों की छाया में बैठा था, कोई अपनी कम होती सांसें बचा रहा था, और कोई दूर उड़कर पानी की तलाश में निकल रहा था। कोको को उन सब पर दया भी आई और वह मन में बोला— “काश मैं पानी ढूँढ लूँ, तो मैं सबके साथ बाँट सकूँ।”
काफी देर तक उड़ने के बाद अचानक कोको की नजर एक छोटे से गाँव पर पड़ी जो जंगल के ठीक किनारे पर था। गाँव में कुछ बच्चे खेल रहे थे, कुछ लोग अपने घरों के बाहर काम कर रहे थे, और कुछ महिलाएँ पानी भरकर अपने घरों की ओर जा रही थीं। यह देखकर कोको के मन में उम्मीद की एक छोटी सी लौ जली। उसे लगा कि अगर गाँव में लोग रहते हैं तो वहाँ पानी भी जरूर होगा। इसलिए उसने सोच लिया कि वह अब गाँव की तरफ जाएगा।
धीरे-धीरे कोको गाँव में उतरा और एक दीवार पर बैठकर इधर-उधर देखने लगा। उसे नजर तो कुछ नहीं आया, लेकिन तभी हवा के साथ आती हल्की-सी ठंडक ने उसका ध्यान खींचा। यह हवा शायद किसी ऐसे स्थान से आ रही थी जहाँ थोड़ी नमी मौजूद थी। कौए अपनी सूंघने और महसूस करने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, और कोको भी इसी ताकत का इस्तेमाल कर रहा था। वह हवा की दिशा में उड़ता चला गया और कुछ ही देर बाद उसे एक पुराना मिट्टी का घड़ा दिखा, जो एक पेड़ की छाया में रखा था।
कोको की आँखें चमक उठीं। उसके दिल ने कहा— “बस, यही वो जगह है जिसे मैं ढूँढ रहा था!” और वह तेजी से उस घड़े के पास जा पहुँचा। उसने घड़े में झाँका, लेकिन अंदर पानी बहुत, बहुत कम था—इतना कम कि उसकी चोंच वहाँ तक पहुँच ही नहीं सकती थी।
कोको ने निराश होकर घड़े की गर्दन पर बैठते हुए गहरी साँस ली। अब उसे महसूस हुआ कि पानी दिखने के बावजूद भी वह पानी तक नहीं पहुँच सकता। यह देखकर उसका दिल थोड़ा टूटने लगा। उसके पंख भारी हो गए और आँखों में थकान का धुंधलापन आ गया। पर वह सोच रहा था— “अगर इतने मुश्किल समय में पानी दिख भी जाए, और मैं उसे पी न पाऊँ, तो इससे बड़ी परेशानी और क्या होगी?”
लेकिन तभी उसके दिमाग में एक छोटा सा विचार चमका। उसने घड़े से थोड़ा दूर पड़े कुछ छोटे-छोटे कंकड़ देखे। अचानक उसे अपने दादाजी की एक कहानी याद आई, जिसमें उन्होंने बताया था कि “अक्ल का इस्तेमाल करो, तो मुश्किलें भी आसान हो जाती हैं।” और वही पल था जब कोको को लगा कि कंकड़ शायद उसकी मदद कर सकते हैं।
यहाँ से यह Thirsty Crow Story in Hindi और भी रोमांचक होने लगी। कोको ने अपने छोटे-से शरीर और कम ताकत के बावजूद कंकड़ उठाने शुरू किए। वह एक कंकड़ लाता, घड़े में डालता, फिर दूसरा लाता और फिर तीसरा। धीरे-धीरे कंकड़ों की वजह से पानी ऊपर आने लगा। हर बार जब वह एक नया कंकड़ डालता, तो उसे लगता कि वह अपनी जीत के एक कदम और करीब पहुँच गया है।
गर्मी से तड़पते हुए भी उसकी कोशिशें जारी थीं। पसीने की बूंदें उसके छोटे पंखों के बीच जमा हो रही थीं, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं टूट रही थी। ऐसे में कई बार वह फिसल जाता, कई बार उसके पंख थककर उससे कम दूरी भी मुश्किल कर देती, लेकिन कोको ने एक भी बार हार नहीं मानी।
कुछ देर बाद घड़े में पानी काफी ऊपर आ गया। कोको ने घड़े में झाँककर देखा, उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब पानी उस स्तर पर था जहाँ उसकी चोंच आराम से पहुँच सकती थी। वह तुरंत घड़े की गर्दन पर बैठा, अपनी चोंच डुबोई और धीरे-धीरे पानी पीने लगा। ठंडे पानी की पहली बूंद उसके गले से नीचे गई, तो उसे ऐसा लगा जैसे उसकी सारी थकान गायब हो गई। उसके चेहरे पर एक चमक आ गई। उसने इतना स्वादिष्ट और ताजगी भरा पानी शायद कई दिनों से नहीं पिया था।
पानी पीकर कोको ने राहत की गहरी साँस ली और आसमान की ओर देखकर बोला— “धन्यवाद भगवान, आपने मेरी मेहनत का फल दिया!”
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पानी पीने के बाद उसने महसूस किया कि अभी भी घड़े में काफी पानी बचा है। उसने सोचा, “जब मुझे इतनी मुश्किल से पानी मिला है, तो मैं इसे सिर्फ अपने लिए क्यों रखूँ? क्यों न इसे उन छोटे-छोटे पंछियों के साथ बाँटूँ जिन्हें शायद आज पानी न मिले?”
उसकी इस सोच से कहानी और भी सुंदर बन जाती है। कोको उड़कर उन पक्षियों के पास गया जो पास के पेड़ों पर प्यास से तड़प रहे थे। उसने उन्हें आवाज दी और बताया कि उसने पानी ढूँढ लिया है। सभी पक्षी उसके साथ उड़कर घड़े तक पहुँचे और खुशी-खुशी पानी पीने लगे।
कुछ देर बाद सारे पक्षी खुश थे, ताजगी महसूस कर रहे थे और कोको की बुद्धिमानी की प्रशंसा कर रहे थे। जंगल में यह बात फैल गई कि छोटे से कोको ने न केवल खुद पानी पाया बल्कि सबके लिए भी पानी का इंतजाम किया।
उस दिन जंगल के सारे जानवरों ने यह समझा कि “कौआ छोटा हो सकता है, लेकिन उसका दिल और दिमाग बहुत बड़ा है।” कोको अब सिर्फ एक कौआ नहीं रहा, वह सबके लिए एक प्रेरणा बन गया।
इस Thirsty Crow Story in Hindi से बच्चे ही नहीं, बड़े भी एक बात सीख सकते हैं कि समय कितना भी कठिन क्यों न हो, अगर हम हिम्मत न हारें और दिमाग का इस्तेमाल करें, तो हर समस्या का समाधान मिल ही जाता है।https://hindikahanisaga.in/the-thirsty-crow-story-in-hindi/
नैतिक शिक्षा (Moral of the Story)
हार कभी मत मानो। कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती।
मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, समझदारी और धैर्य से काम लो।
जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद करो—खुशियाँ कई गुना बढ़ जाती हैं।
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