Tata Capital IPO 2025: भारतीय शेयर बाजार में साल 2025 अब तक IPO के लिहाज से बेहद सक्रिय रहा है। इस साल कई नामी कंपनियां बाजार से पूंजी जुटाने के लिए पब्लिक इश्यू लेकर आई हैं। इसी कड़ी में अब टाटा समूह की प्रतिष्ठित NBFC कंपनी टाटा कैपिटल (Tata Capital) भी अपना IPO लेकर आ रही है। इसे साल 2025 का सबसे बड़ा IPO माना जा रहा है।
टाटा कैपिटल ने 26 सितंबर 2025 को सेबी (SEBI) में अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल किया है। कंपनी अक्टूबर के पहले हफ्ते में निवेशकों के लिए बिडिंग विंडो खोलेगी। इस IPO के जरिए न सिर्फ कंपनी अपनी पूंजी को मजबूत करेगी, बल्कि यह कदम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों के तहत भी जरूरी है। RBI ने 2022 में टाटा कैपिटल को “अपर-लेयर NBFC” की श्रेणी में रखा था और तीन साल के भीतर लिस्टिंग की अनिवार्यता तय की थी।
यह इश्यू अपने बड़े साइज की वजह से चर्चा में है। कंपनी की योजना है कि इस IPO से लगभग ₹17,200 करोड़ जुटाए जाएं।
इश्यू दो हिस्सों में बंटा होगा –
इस इश्यू में कंपनी की प्रमोटर इकाई Tata Sons अपनी 23 करोड़ तक की हिस्सेदारी बेचेगी। इसके अलावा इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IFC) भी करीब 3.58 करोड़ शेयर ऑफलोड करेगा।
IPO लाने से पहले ही निवेशकों का उत्साह ग्रे मार्केट में दिखने लगा है। 27 सितंबर 2025 तक अलग-अलग वेबसाइट्स पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक टाटा कैपिटल का शेयर ₹25 से ₹31 प्रति शेयर के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा था।
हालांकि यह प्रीमियम आधिकारिक नहीं होता और केवल डिमांड-सप्लाई पर आधारित होता है, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि बाजार में इस IPO को लेकर सकारात्मक माहौल है।
निवेशकों के लिए IPO से जुड़ी तारीखें सबसे अहम होती हैं। DRHP के अनुसार टाटा कैपिटल IPO का शेड्यूल इस प्रकार है –
यह टाइमलाइन निवेशकों के लिए आकर्षक है क्योंकि लिस्टिंग तक का पूरा प्रोसेस बहुत तेज़ी से पूरा होगा।
टाटा कैपिटल, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons की सहायक इकाई है। देश में NBFC सेक्टर में इसका नाम बेहद मजबूत माना जाता है। CRISIL की रिपोर्ट बताती है कि टाटा कैपिटल भारत की तीसरी सबसे बड़ी NBFC है।
कंपनी ग्राहकों को 25 से अधिक वित्तीय सेवाएं और लोन प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराती है। इसमें शामिल हैं –
मार्च 2025 तक कंपनी का वितरण नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है। इसकी 1,496 शाखाएं 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूद हैं। कंपनी ग्राहकों तक पहुंचने के लिए डिजिटल और फिजिकल दोनों चैनल का इस्तेमाल करती है, जिससे इसका ओमनी-चैनल मॉडल बेहद सफल माना जाता है।
NBFC सेक्टर में मुकाबला काफी कड़ा है। टाटा कैपिटल को बैंकों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स से सीधी टक्कर मिलती है।
इसके प्रमुख प्रतियोगी हैं:
बाजार में इतनी प्रतिस्पर्धा के बावजूद टाटा कैपिटल का ब्रांड वैल्यू और टाटा समूह का भरोसा इसे खास बनाता है।
निवेशकों के लिए किसी भी IPO में कंपनी की वित्तीय मजबूती सबसे ज्यादा मायने रखती है। टाटा कैपिटल ने हाल के वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है।
इन आंकड़ों से साफ है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल मजबूत है और यह लगातार ग्रोथ कर रही है।
इस IPO से जुटाई गई रकम को कंपनी कई उद्देश्यों में इस्तेमाल करेगी।
Tata Capital IPO 2025 निवेशकों के लिए एक सुनहरा अवसर माना जा रहा है। इसका बड़ा इश्यू साइज, लगातार मजबूत होते वित्तीय नतीजे और टाटा समूह का नाम इसे आकर्षक बनाते हैं। हालांकि, NBFC सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव जैसे कारक इसके बिजनेस पर असर डाल सकते हैं।
इसके बावजूद, बाजार की मौजूदा स्थिति और निवेशकों की रुचि को देखते हुए यह पब्लिक इश्यू शानदार लिस्टिंग देने की क्षमता रखता है।
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