Wednesday, February 4, 2026

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पंचतंत्र की कहानियाँ (Panchatantra Stories in Hindi) – मजेदार किस्से और नैतिक शिक्षा

भारत की धरती कहानियों और किस्सों की जननी मानी जाती है। यहाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी दादी-नानी अपने बच्चों और पोते-पोतियों को bedtime stories सुनाती रही हैं। इन्हीं कहानियों में पंचतंत्र की कहानियाँ (Panchatantra Stories in Hindi) सबसे ज्यादा मशहूर और पसंद की जाने वाली कहानियाँ हैं।

पंचतंत्र का मतलब है – पाँच तंत्र या पाँच खंड। इसमें जानवरों, पक्षियों और इंसानों के जरिए ऐसी कहानियाँ बताई गई हैं जो मजेदार भी हैं और साथ ही जीवन की गहरी सच्चाई सिखाती हैं। इन कहानियों में दोस्ती, चालाकी, समझदारी, धैर्य और ईमानदारी जैसे अनमोल सबक मिलते हैं।

इस लेख में हम आपको पंचतंत्र की कहानियाँ सुनाएंगे। भाषा बेहद आसान होगी, जैसे कोई दादी अपने पोते को कहानी सुना रही हो। हर कहानी के अंत में नैतिक शिक्षा भी दी जाएगी। तो चलिए शुरू करते हैं यह लंबा सफर मजेदार किस्सों और जीवन की सच्चाइयों के साथ।

कहानी 1 – बंदर और मगरमच्छ

एक बार की बात है, नदी किनारे एक आम का पेड़ था। उस पेड़ पर एक चंचल बंदर रहता था। वह रोज मीठे-मीठे आम खाता और बहुत खुश रहता।

नदी में एक मगरमच्छ भी रहता था। एक दिन मगरमच्छ ने बंदर से दोस्ती कर ली। धीरे-धीरे दोनों में गहरी मित्रता हो गई। बंदर रोज उसे आम खिलाता और खूब बातें करता।

एक दिन मगरमच्छ की पत्नी ने उससे कहा –
“तुम रोज आम खाकर आते हो, ज़रा बंदर का दिल भी तो मीठा होगा। मुझे उसका दिल खाने की इच्छा है।”

मगरमच्छ दुविधा में पड़ गया, लेकिन पत्नी के दबाव में उसने बंदर को धोखा देने की योजना बनाई। वह बोला –
“दोस्त, मेरी पत्नी तुम्हें बुला रही है। तुम हमारे घर चलो।”

बंदर खुश होकर मगरमच्छ की पीठ पर बैठ गया। नदी के बीच पहुँचते ही मगरमच्छ ने सच्चाई बता दी। बंदर समझदार था। उसने कहा –
“अरे! तुमने पहले क्यों नहीं बताया? मेरा दिल तो मैंने पेड़ पर छोड़ दिया है। चलो, वापस चलते हैं।”

मगरमच्छ उसे पेड़ तक ले आया। बंदर तुरंत पेड़ पर चढ़ गया और बोला –
“मूर्ख मगरमच्छ! दिल कभी बाहर निकाला जाता है क्या? तुमने अपनी दोस्ती खो दी।”

नैतिक शिक्षा (Moral):

सच्चा दोस्त कभी धोखा नहीं देता। लालच और धोखे से रिश्ते टूट जाते हैं।

कहानी 2 – सिंह और चतुर खरगोश

जंगल में एक भयंकर सिंह रहता था। वह रोज कई जानवरों का शिकार करता और सबको डरा देता। परेशान होकर जानवरों ने योजना बनाई कि रोज एक जानवर खुद उसके पास जाएगा ताकि बाकी बच सकें।

कुछ दिनों बाद खरगोश की बारी आई। खरगोश बहुत बुद्धिमान था। वह जान-बूझकर देर से सिंह के पास पहुँचा।

सिंह गुस्से में दहाड़ा –
“इतनी देर क्यों की?”

खरगोश बोला –
“महाराज, रास्ते में एक और सिंह मिल गया। उसने कहा कि वह असली राजा है। उसने मुझे रोक लिया।”

सिंह आग-बबूला हो गया और बोला –
“मुझे दिखाओ वह दूसरा सिंह।”

खरगोश उसे कुएँ के पास ले गया और पानी में उसका प्रतिबिंब दिखाया। सिंह ने समझा कोई दूसरा सिंह है और गुस्से में कुएँ में कूद पड़ा। वहीं उसकी मौत हो गई।

नैतिक शिक्षा (Moral):

बुद्धि और चतुराई बल से कहीं ज्यादा ताकतवर होती है।

कहानी 3 – कबूतर और शिकारी

एक बार एक शिकारी ने अपने जाल में दाने बिखेर दिए। कई कबूतर वहाँ आकर दाना चुगने लगे और सब जाल में फँस गए।

कबूतर घबरा गए। तभी उनके राजा ने कहा –
“डरो मत! अगर हम सब मिलकर एक साथ उड़ान भरेंगे तो जाल को तोड़ सकते हैं।”

सभी ने मिलकर अपने पंख फड़फड़ाए और जाल को उठाकर उड़ गए। वे पास के जंगल में अपने दोस्त चूहे के पास पहुँचे। चूहे ने अपने दाँतों से जाल काट दिया और सब कबूतर आज़ाद हो गए।

नैतिक शिक्षा (Moral):

एकता में अपार शक्ति होती है। मिलजुलकर कोई भी मुश्किल आसान हो जाती है।

कहानी 4 – नीला सियार

जंगल में एक बार एक भूखा सियार घूम रहा था। वह गलती से रंग बनाने वाले के घर में गिर गया और नीले रंग में रंग गया।

जब वह जंगल लौटा तो जानवर उसे पहचान न पाए। सब डर गए और बोले –
“यह कोई नया प्राणी है!”

सियार ने मौके का फायदा उठाया और खुद को राजा घोषित कर दिया। कुछ समय तक सब उसे मानने लगे। लेकिन एक दिन जब दूसरे सियार हुंकार भरने लगे तो वह भी अपनी असली आवाज़ में चिल्ला उठा।

सभी जानवरों ने उसकी पोल खोल दी और उसे जंगल से भगा दिया।

नैतिक शिक्षा (Moral):

झूठ और नकली पहचान ज्यादा दिन तक नहीं छिप सकती।

कहानी 5 – दो दोस्त और भालू

दो दोस्त जंगल से गुजर रहे थे। अचानक सामने से एक भालू आ गया। एक दोस्त पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन दूसरा नहीं चढ़ पाया।

उसने ज़मीन पर लेटकर साँस रोक ली और मरने का नाटक किया। भालू उसके पास आया, सूँघा और चला गया।

भालू के जाने के बाद पेड़ पर बैठे दोस्त ने पूछा –
“भालू ने तुम्हारे कान में क्या कहा?”

वह बोला –
“उसने कहा, सच्चा दोस्त वही होता है जो मुसीबत में साथ दे। तुम असली दोस्त नहीं हो।”

नैतिक शिक्षा (Moral):

सच्ची दोस्ती वही है जो मुश्किल वक्त में काम आए।

कहानी 6 – धोखेबाज़ व्यापारी

एक व्यापारी के पास बहुत बड़ी लोहे की तिजोरी थी। उसने अपने दोस्त के यहाँ सुरक्षित रखने के लिए रख दी।

कुछ समय बाद जब व्यापारी ने तिजोरी माँगी तो उसका दोस्त बोला –
“भाई, उस तिजोरी को तो चूहे खा गए।”

व्यापारी ने कुछ नहीं कहा। अगले दिन उसने दोस्त के बेटे को घुमा-फिराकर अपने साथ रख लिया। जब दोस्त ने बेटे को माँगा तो व्यापारी ने कहा –
“उसे तो एक बाज उठा ले गया।”

दोस्त गुस्से से बोला –
“बाज कैसे बच्चे को उठा सकता है?”

व्यापारी बोला –
“अगर चूहे लोहे की तिजोरी खा सकते हैं, तो बाज भी बच्चे को उठा सकता है।”

दोस्त शर्मिंदा हुआ और तिजोरी लौटा दी।

नैतिक शिक्षा (Moral):

झूठ और चालाकी का अंत हमेशा बुरा होता है।

निष्कर्ष

पंचतंत्र की कहानियाँ (Panchatantra Stories in Hindi) सिर्फ बच्चों के मनोरंजन के लिए नहीं हैं, बल्कि ये कहानियाँ हर उम्र के इंसान को जीवन का सच्चा ज्ञान देती हैं। इन कहानियों में दोस्ती, ईमानदारी, चतुराई, धैर्य और एकता जैसे अनमोल संदेश छिपे हैं।https://blogassets.leverageedu.com/media/uploads/sites

आज भी जब दादी-नानी ये कहानियाँ सुनाती हैं तो बच्चे मंत्रमुग्ध होकर सुनते हैं और साथ ही नैतिक शिक्षा भी सीखते हैं। यही वजह है कि पंचतंत्र की कहानियाँ हजारों साल बाद भी आज उतनी ही लोकप्रिय और जीवंत हैं।

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