Monday, December 1, 2025

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आ रहा है 8000mAh बैटरी वाला OnePlus 15R smartphone! कीमत और फीचर्स जानें

OnePlus 15R की पहली झलक और डिजाइन

OnePlus ने आखिरकार उस स्मार्टफोन की झलक दिखा दी है जिसका लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। कंपनी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जो तस्वीरें जारी की हैं, उनमें साफ दिखता है कि OnePlus 15R smartphone एक बेहद प्रीमियम और स्टाइलिश डिवाइस होने वाला है। फोन का फ्लैट-एज्ड फ्रेम इसे आधुनिक और आकर्षक बनाता है, जबकि पीछे दिया गया स्क्वेयर्ड कैमरा मॉड्यूल इसे एक अलग पहचान देता है। इसे दो कलर ऑप्शन—ब्लैक और ग्रीन—में लॉन्च किया जाएगा, जो दोनों ही रंग पहली नजर में काफी शानदार लगते हैं। फोन को देखकर लगता है कि डिजाइन के मामले में OnePlus ने इस बार काफी ध्यान दिया है ताकि यूजर्स को एक फ्लैगशिप जैसा फील मिल सके। कंपनी ने अभी हार्डवेयर की पूरी जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन इसकी झलक देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह फोन अपने सेगमेंट में दूसरों को कड़ी टक्कर दे सकता है।

Snapdragon 8 Gen 5 का दम और 8000mAh की बैटरी पावर

फोन के फीचर्स की बात करें तो सबसे ज्यादा चर्चा इसकी विशाल बैटरी को लेकर हो रही है। लीक में बताया जा रहा है कि OnePlus 15R smartphone में 8000mAh की बैटरी दी जाएगी, जो आज के समय में काफी दुर्लभ है। इतनी बड़ी बैटरी का मतलब है कि यूजर को बार-बार फोन चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, और एक बार चार्ज करने पर फोन आराम से एक से दो दिन चल सकता है। इसके साथ ही 100W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट की भी बात सामने आई है, जो इसे अपनी कैटेगरी के सबसे तेज चार्ज होने वाले फोन में शामिल कर सकता है। इस फोन को OnePlus Ace 6T का रीबैज्ड वर्जन बताया जा रहा है, और Ace 6T में भी इसी तरह की बैटरी को पहले टीज़ किया जा चुका है। इससे साफ पता चलता है कि कंपनी पावर बैकअप पर इस बार काफी गंभीर है। इसके अलावा, फोन में Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है, जो इसे हैवी गेमिंग, मल्टीटास्किंग और हाई-एंड ऐप्स चलाने में बेहद तेज और स्मूद अनुभव देगा।

डिस्प्ले और कैमरा: तेज रिफ्रेश रेट और डुअल 50MP सेटअप

डिस्प्ले के मामले में भी OnePlus 15R smartphone शानदार विकल्प साबित हो सकता है। कहा जा रहा है कि इस फोन में 165Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले मिलेगा, जो वीडियो देखने, गेम खेलने और स्क्रॉलिंग को बेहद स्मूद बना देगा। हालांकि ब्राइटनेस और डिस्प्ले टाइप के बारे में कंपनी ने अभी कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन OnePlus की पहचान हमेशा से बेहतर डिस्प्ले देने के लिए रही है। कैमरा सेटअप की बात करें तो पीछे डुअल 50MP कैमरा सिस्टम दिए जाने का दावा है। यह सेटअप दिन में ली गई तस्वीरों को और भी शार्प और नैचुरल बनाने में मदद करेगा। OnePlus लगातार अपने कैमरा सिस्टम को बेहतर बनाता चला आ रहा है, और इस मॉडल में भी वही ट्रेंड दिखने की उम्मीद है। सेल्फी कैमरा कैसा होगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आयी है, लेकिन उम्मीद है कि कंपनी इस मामले में भी निराश नहीं करेगी।

कितनी हो सकती है संभावित कीमत?

अब बात कीमत की आती है, क्योंकि किसी भी नए लॉन्च के समय लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है। टेक एक्सपर्ट्स की मानें तो OnePlus 15R smartphone की कीमत भारत में लगभग 40,000 से 45,000 रुपये के बीच रखी जा सकती है। यह कीमत उन लोगों के लिए काफी आकर्षक हो सकती है जो एक प्रीमियम और शक्तिशाली स्मार्टफोन लेना चाहते हैं लेकिन फ्लैगशिप कीमत चुकाना नहीं चाहते। इस फोन में मिलने वाले विशाल बैटरी बैकअप, फास्ट चार्जिंग सपोर्ट, बेहतरीन प्रोसेसर और स्टाइलिश डिजाइन को देखते हुए यह कीमत काफी वाजिब लगती है।

आखिरी नजर: क्यों है OnePlus 15R इतना खास?

कुल मिलाकर देखा जाए तो OnePlus ने इस मॉडल में हर वह फीचर शामिल करने की कोशिश की है जिसकी आज के यूजर्स को सबसे ज्यादा जरूरत होती है। चाहे लंबी चलने वाली बैटरी हो, अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग हो, गेमिंग के लिए पावरफुल प्रोसेसर हो या फिर स्टाइलिश और प्रीमियम लुक—OnePlus 15R smartphone हर मामले में मजबूत दिखाई देता है। यह फोन लॉन्च होने से पहले ही सुर्खियों में बना हुआ है और उम्मीद है कि इसके आने के बाद यह अपनी कैटेगरी में बड़ी सफलता हासिल करेगा। अब बस इंतजार है इसके आधिकारिक लॉन्च का, जिसके बाद इसकी पूरी जानकारी सामने आएगी और यूजर्स को पता चलेगा कि फोन असल में कितना दमदार है।https://www.tv9hindi.com/technology/oneplus-15r-set-to-launch-in-india-for-17-december-expected-specs-features-price-leak

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दुनिया में बजेगा भारत के सरकारी बैंकों का डंका: सरकार ने बनाया नया Mega Merger Plan

भारत के सरकारी बैंकों को दुनिया के सबसे मजबूत और प्रभावशाली बैंकों की सूची में शामिल करने के लिए सरकार अब एक बहुत बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में कई बदलाव किए गए, लेकिन इस बार जो तैयारी की जा रही है, वह पहले हुए सभी सुधारों से कहीं ज्यादा बड़ी मानी जा रही है। सरकार के इस नए Mega Merger Plan का उद्देश्य छोटे-छोटे सरकारी बैंकों को मिलाकर कुछ बेहद विशाल और शक्तिशाली बैंक तैयार करना है, जो न केवल भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था का समर्थन करें, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मज़बूत पहचान बना सकें।

किन बैंकों का हो सकता है विलय?

रिपोर्टों के अनुसार इस Mega Merger Plan में कुछ छोटे सरकारी बैंकों को बड़े बैंकों के साथ मिलाया जा सकता है। संभावित छोटे बैंकों में इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), बैंक ऑफ इंडिया (BOI) और बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BOM) जैसे नाम शामिल हैं। ये बैंक अपने स्तर पर तो अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन बड़े बैंकों के साथ जुड़ने पर इनकी क्षमता, पहुँच और संसाधन कई गुना बढ़ सकते हैं।
दूसरी ओर, जिन बड़े बैंकों में इनका विलय हो सकता है, उनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) के नाम सामने आ रहे हैं। ये बैंक पहले से ही विशाल नेटवर्क, मजबूत ब्रांड और बड़े ग्राहक आधार के साथ काम कर रहे हैं। इनके साथ छोटे बैंकों का जुड़ना पूरे सरकारी बैंकिंग ढांचे को और ज्यादा प्रभावशाली बना देगा।

क्यों लाया जा रहा है इतना बड़ा Mega Merger Plan?

सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि सरकारी बैंकों की संख्या कम की जाए और कुछ बड़े, आधुनिक, तकनीकी रूप से मजबूत और विश्वस्तरीय बैंक बनाए जाएँ। आज के समय में निजी बैंक और फिनटेक कंपनियाँ काफी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में सरकारी बैंकों के लिए एकजुट होकर मजबूत होना बेहद जरूरी हो गया है। इस Mega Merger Plan के आने से बड़े पैमाने पर लोन देने की क्षमता बढ़ेगी, बैंकिंग सिस्टम की लागत घटेगी, प्रशासनिक बोझ कम होगा और डिजिटल सेवाओं में गति आएगी।

बड़े बैंक बनने से वे देश की विकास योजनाओं, जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, नई इंडस्ट्री और बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स को आसानी से फंड कर सकेंगे। छोटे बैंक अक्सर बड़े ऋण की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते, लेकिन विलय होने पर उनकी बैलेंस शीट मजबूत होगी और उनकी आर्थिक स्थिति और भी विश्वसनीय बन जाएगी। इस तरह यह Mega Merger Plan बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।

सरकार की रणनीति और ‘चर्चा का रिकॉर्ड’ की प्रक्रिया

इस योजना पर अभी सरकार के अंदरूनी स्तर पर लगातार चर्चा हो रही है और किसी भी आधिकारिक घोषणा से पहले “चर्चा का रिकॉर्ड” तैयार किया जाएगा। यह एक ऐसा दस्तावेज़ होता है जिसमें किसी भी योजना से जुड़े हर पहलू, फायदे-नुकसान, अलग-अलग विभागों की राय और सभी विकल्पों का पूरा विवरण दर्ज किया जाता है। इसके बाद ही कोई प्रस्ताव कैबिनेट या प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुँचता है। इस Mega Merger Plan के लिए भी इसी तरह की विस्तृत प्रक्रिया अपनाई जाएगी ताकि आगे चलकर सभी निर्णय मजबूत आधार पर लिए जाएँ।

रिपोर्टें कहती हैं कि इस पूरे प्रस्ताव पर चर्चा 2027 तक चलने की संभावना है और सरकार चाहती है कि उसी वित्त वर्ष के भीतर इसका पूर्ण रोडमैप तैयार हो जाए। इसका मतलब यह है कि आने वाले वर्षों में बैंकिंग सेक्टर में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

पहले कितने बैंकों का हुआ है विलय?

यह पहली बार नहीं है जब सरकार बैंकिंग क्षेत्र में मर्जर कर रही है। इससे पहले 2017 से 2020 के बीच सरकार ने सरकारी बैंकों का एक बड़ा पुनर्गठन किया था। उस समय 27 सरकारी बैंकों को धीरे-धीरे मिलाकर 12 बैंकों में बदल दिया गया था। इस अवधि में कई बड़े विलय किए गए थे, जैसे ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का PNB में विलय, सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में मिलना, आंध्र बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में जुड़ना और इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय।

इन विलयों का उद्देश्य सरकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत करना, उनकी संचालन क्षमता बढ़ाना और आर्थिक जोखिमों को कम करना था। अब जो Mega Merger Plan तैयार किया जा रहा है, वह उसी प्रक्रिया का एक बड़ा और अधिक आधुनिक संस्करण माना जा रहा है।

Mega Merger Plan से क्या बदल जाएगा?

अगर यह योजना लागू होती है तो भारत में तीन बहुत बड़े सरकारी बैंक बन सकते हैं, जिनकी ताकत वैश्विक स्तर पर भी प्रभाव डालेगी। बड़े बैंक देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, विशेषकर बड़ी परियोजनाओं और उद्योगों में फंडिंग के मामले में। इसके अलावा, बड़े बैंक प्राइवेट बैंकों और फिनटेक कंपनियों को प्रतिस्पर्धा दे सकेंगे, जिससे बैंकिंग सेवाएँ और बेहतर और आधुनिक बनेंगी।

साथ ही, ग्राहकों को भी इस Mega Merger Plan का फायदा मिलेगा, क्योंकि बड़े बैंकों के साथ सेवाएँ अधिक मजबूत और सुरक्षित होंगी। डिजिटल बैंकिंग, लोन प्रोसेसिंग, निवेश सुविधाएँ, ग्रामीण बैंकिंग और आधुनिक फाइनेंशियल सेवाएँ और भी आसान होंगी। सरकार के इस कदम से भारत की बैंकिंग व्यवस्था वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बना सकती है।https://newagenda.org/?p=136085

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चायपत्ती, सिंदूर और कत्था: ऐसे तैयार होते हैं Fake Desi Egg और खरीदते वक्त आप कैसे पहचानें असली अंडा

सर्दियों का मौसम आते ही देसी अंडों की डिमांड तेजी से बढ़ जाती है, क्योंकि लोग मानते हैं कि देसी अंडा शरीर को गर्म रखने और पोषण देने में ज्यादा फायदेमंद होता है। लेकिन जैसे ही देसी अंडों की मांग बढ़ती है, वैसे ही बाजार में मिलावट करने वाले लोग भी सक्रिय हो जाते हैं। कई शहरों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां नकली देसी अंडे यानी Fake Desi Egg तैयार किए जा रहे हैं। हाल ही में मुरादाबाद में भी एक बड़ा फर्जी अंडा बनाने का रैकेट पकड़ा गया, जहां चायपत्ती, सिंदूर, कत्था और सिंथेटिक रंगों का उपयोग करके अंडों को देसी जैसा बनाया जा रहा था। यह घटना इस बात की चेतावनी है कि अब अंडे खरीदते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो गया है।

देसी अंडा क्यों होता है खास?

देसी अंडा पोषण का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसमें विटामिन ए, बी6, बी12, विटामिन डी, फास्फोरस, सेलेनियम, प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को गर्म रखने, इम्यूनिटी मजबूत करने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करते हैं। इसी वजह से देसी अंडा मार्केट में हमेशा फार्म अंडों से महंगा बिकता है। लेकिन अधिक कीमत के कारण नकली देसी अंडों यानी Fake Desi Egg की बिक्री बढ़ती जा रही है। कई लोग इनसे अच्छी कमाई करने के लिए रंग, रसायन और नकली तरीकों से अंडे तैयार करते हैं, जिन्हें पहचानना आम लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है।

छिलके का टेक्सचर और लुक देखें

खरीदते समय अंडे के छिलके को ध्यान से देखना बहुत जरूरी है। असली देसी अंडे का छिलका हल्का दानेदार, खुरदुरा और प्राकृतिक दिखता है। इसके विपरीत Fake Desi Egg आमतौर पर चमकदार, चिकना और ज़्यादा साफ-सुथरा दिखता है, क्योंकि उस पर सिंथेटिक कलर या मिश्रण लगाया जाता है।
अगर आप नाखून से हल्का सा थपथपाएं, तो असली अंडे की आवाज भारी और ठोस लगती है, जबकि नकली अंडा हल्का और कभी-कभी खोखला महसूस होता है। ये छोटी-छोटी बातें आपको असली और नकली में फर्क समझने में मदद कर सकती हैं।

अंडे का आकार भी देता है संकेत

देसी अंडे का आकार आमतौर पर फार्म अंडों से थोड़ा छोटा होता है। नकली अंडे यानी Fake Desi Egg कई बार सामान्य अंडों से बड़े और अधिक चमकदार दिखते हैं। कई बार विक्रेता इन पर ऐसा रंग चढ़ा देते हैं कि वे देखने में बहुत आकर्षक लगें। इसलिए अंडे का आकार, रंग और चमक सभी पर थोड़ा ध्यान देना जरूरी है। असली देसी अंडा कभी भी बहुत ज्यादा चमकदार नहीं होता।

महक से करें नकली अंडे की पहचान

असली देसी अंडे में किसी प्रकार की तेज गंध नहीं होती। उसकी महक बिल्कुल हल्की और नैचुरल होती है। लेकिन Fake Desi Egg में अक्सर चायपत्ती, रसायन या रंग की हल्की अनचाही महक आ सकती है। यह इसलिए होता है क्योंकि नकली अंडा तैयार करते समय सिंथेटिक रंगों और मिलावटी चीजों का उपयोग किया जाता है।
अगर अंडे से केमिकल जैसी या अजीब सी कोई गंध आए, तो समझ लें कि वह अंडा सुरक्षित नहीं है और उसे खरीदना सही नहीं होगा।

घर पर ऐसे करें Fake Desi Egg की पहचान

घर पहुंचकर भी आप अंडे की जांच कर सकते हैं। इसके लिए गर्म पानी एक बर्तन में भरें और अंडे को उसमें डाल दें।
अगर पानी का रंग बदलने लगे या हल्का सा रंग घुलने लगे, तो यह साफ संकेत है कि अंडे के ऊपर रंग चढ़ाया गया है और वह Fake Desi Egg हो सकता है।
जब आप अंडा फोड़ेंगे, तो भी आप उसकी पहचान कर सकते हैं। असली देसी अंडे की जर्दी मोटी, एकदम गोल और गहरे पीले रंग की होती है। उसकी सफेदी भी गाढ़ी होती है। वहीं नकली अंडे की जर्दी हल्की, फीकी और कम गाढ़ी होती है। कई बार इसका आकार भी एकदम बराबर नहीं बन पाता और जल्दी फैल जाता है।

जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है

आजकल मिलावट इतनी बढ़ गई है कि खाने की चीजों को खरीदते समय सतर्क रहना बहुत जरूरी हो गया है। Fake Desi Egg सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है। इसे खाने से फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द या अन्य समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए हमेशा विश्वसनीय दुकानदार से ही अंडे खरीदें और उनकी सतह, महक, आकार और अंदर की जर्दी को ध्यान से जांचें।
थोड़ी सी जागरूकता आपकी सेहत को सुरक्षित रख सकती है और आपको Fake Desi Egg जैसे मिलावटी उत्पादों से दूर रखेगी। अगली बार जब भी अंडे खरीदें, ऊपर बताए गए तरीकों को जरूर अपनाएं ताकि आप असली पोषक देसी अंडा ही घर लाएं।https://www.herzindagi.com/hindi/diary/easy-ways-to-identify-the-difference-between-fake-and-real-eggs-article-1030686

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Free Deep Learning Course: IIT खड़गपुर दे रहा है छात्रों को AI सीखने का फ्री मौका

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज की दुनिया की सबसे तेज़ी से विकसित होने वाली तकनीकों में से एक है। कंपनियां अब ऐसे युवाओं की तलाश में हैं जो AI, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग जैसे विषयों को अच्छी तरह समझते हों। यही वजह है कि कई छात्र इन क्षेत्रों में सीखना चाहते हैं, लेकिन महंगी फीस उनकी राह में रुकावट बन जाती है। ऐसे समय में IIT खड़गपुर द्वारा शुरू किया गया Free Deep Learning Course छात्रों के लिए बेहद लाभदायक अवसर बन गया है, क्योंकि यह कोर्स लगभग पूरा निशुल्क है और घर बैठे किया जा सकता है।

IIT खड़गपुर का मुफ्त AI कोर्स क्यों खास है?

IIT खड़गपुर का यह कोर्स उन सभी छात्रों के लिए एक बेहतरीन शुरुआत है जो तकनीक के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। यह Free Deep Learning Course SWAYAM और NPTEL प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिससे हर छात्र अपनी सुविधानुसार इसे पूरा कर सकता है। इस कोर्स की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और छात्र 26 जनवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कोर्स जनवरी 2026 से शुरू होकर अप्रैल 2026 तक चलेगा, जो कुल 12 सप्ताह का होगा।

इस कोर्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्रों को पढ़ाई के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता। सिर्फ परीक्षा देने के लिए 1000 रुपये फीस तय की गई है। बाकी पूरा कोर्स मुफ्त है और यही इसे छात्रों के लिए बेहद उपयोगी बनाता है। इस तरह का उच्च-स्तरीय Free Deep Learning Course देश में बहुत कम मिलता है।

इस कोर्स में कौन दाखिला ले सकता है?

यह कोर्स किसी भी इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर, मैथ्स या साइंस बैकग्राउंड वाले छात्र के लिए बिल्कुल सही है। चाहे आप यूजी कर रहे हों या पीजी, आप आसानी से इसमें आवेदन कर सकते हैं। चूंकि कोर्स ऑनलाइन है, कोई भी छात्र अपनी सुविधा के अनुसार लेक्चर देखकर व असाइनमेंट पूरा करके सिलेबस को समझ सकता है। कोर्स पूरी तरह शुरुआती छात्रों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, इसलिए तकनीक से जुड़े नए विद्यार्थी भी इसे आराम से समझ सकते हैं।
यह कारण है कि इस Free Deep Learning Course में देशभर के छात्र रुचि दिखा रहे हैं।

कोर्स में क्या-क्या पढ़ाया जाएगा?

यह कोर्स डीप लर्निंग की बुनियाद से शुरू होता है। सबसे पहले छात्रों को मशीन लर्निंग से जुड़े बेसिक कॉन्सेप्ट समझाए जाएंगे जैसे बेयसियन मॉडल, मल्टीलेयर परसेप्ट्रॉन और अन्य शुरुआती तकनीकें। धीरे-धीरे कोर्स आधुनिक डीप लर्निंग तकनीकों की ओर बढ़ता है, जिसमें कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क (CNN), ऑटोएनकोडर और अन्य उन्नत आर्किटेक्चर शामिल हैं। पूरी पढ़ाई इस तरह से डिजाइन की गई है कि छात्र धीरे-धीरे बेसिक से एडवांस स्तर तक पहुँचते हैं।

सबसे खास बात यह है कि यह Free Deep Learning Course केवल थ्योरी पर आधारित नहीं है। इसमें रियल-वर्ल्ड समस्याओं को हल करने का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। जैसे –
● मेडिकल स्कैन से बीमारी पहचानना
● तस्वीरों में इंसान, जानवर या वस्तु पहचानना
● चैटबॉट और वॉइस असिस्टेंट को ट्रेन करना
● टेक्स्ट पैटर्न से फ्रॉड डिटेक्ट करना
● मौसम और ट्रैफिक का अनुमान लगाना
● ड्रोन और रोबोट को कंट्रोल करना

ये सभी उदाहरण दिखाते हैं कि डीप लर्निंग सिर्फ सीखने की चीज नहीं है, बल्कि यह हर उद्योग में काम आ रहा है और करियर के लिए बड़ा अवसर पैदा कर रहा है।

परीक्षा और सर्टिफिकेट कैसे मिलेगा?

कोर्स पूरा होने के बाद 25 अप्रैल 2026 को परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा ऑफलाइन होगी और इसके लिए छात्रों को 1000 रुपये शुल्क देना होगा। कोर्स पूरा करने के बाद सर्टिफिकेट तभी मिलेगा जब छात्र असाइनमेंट में 25 में से कम से कम 10 अंक और परीक्षा में 75 में से 30 अंक प्राप्त कर ले।
सर्टिफिकेट IIT खड़गपुर और NPTEL दोनों द्वारा जारी किया जाएगा, जिसमें छात्र की फोटो, नाम और मार्क्स का पूरा विवरण दर्ज होगा। इस प्रकार का प्रमाणपत्र छात्रों की प्रोफाइल को मजबूत बनाता है और करियर के कई नए अवसर खोलता है।

डीप लर्निंग क्या है और इसे क्यों सीखना चाहिए?

अगर डीप लर्निंग को आसान भाषा में समझें तो यह कंप्यूटर को उदाहरणों से सीखाने का तरीका है। जैसे हम मनुष्य कई चीजें देखकर सीखते हैं, उसी तरह कंप्यूटर को भी बहुत सारी फोटो, आवाजें या टेक्स्ट दिखाकर ट्रेन किया जाता है। धीरे-धीरे कंप्यूटर पैटर्न समझना सीख जाता है और बता सकता है कि कौन-सी तस्वीर में क्या है, कौन-सी आवाज किसकी है या कोई टेक्स्ट किस अर्थ में लिखा गया है।
आज दुनिया भर में डीप लर्निंग का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। उसके बिना स्मार्टफोन के फीचर्स, कैमरा, सर्च इंजन, ई-कॉमर्स सुझाव और यहां तक कि सेल्फ-ड्राइविंग कारें भी संभव नहीं हैं। इसलिए यह Free Deep Learning Course छात्रों को वह skill देता है जिसकी बाजार में भारी मांग है।

AI में करियर बनाना चाहने वाले छात्रों के लिए सुनहरा अवसर

IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से डीप लर्निंग सीखना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। जब ऐसा मौका मुफ्त में मिल जाए, तो इसे बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिए। यह कोर्स छात्र को न सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान देगा बल्कि भविष्य की तकनीकों की गहरी समझ भी प्रदान करेगा।
अगर आप AI में मजबूत करियर बनाना चाहते हैं, आधुनिक तकनीक सीखना चाहते हैं या फिर अपने रिज़्यूमे में एक शानदार उपलब्धि जोड़ना चाहते हैं, तो यह Free Deep Learning Course आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।https://www.patrika.com/education-news/deep-learning-free-online-course-2025-iit-kharagpu

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CTET February 2026 Registration: आवेदन 18 दिसंबर तक खुले, योग्यता से लेकर फीस तक पूरी जानकारी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने CTET February 2026 परीक्षा को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नोटिफिकेशन जारी होते ही अभ्यर्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यह परीक्षा उन सभी उम्मीदवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है जो शिक्षक बनने का सपना देखते हैं और केंद्रीय या राज्य सरकार के स्कूलों में नौकरी पाना चाहते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 18 दिसंबर तय की गई है, इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। आवेदन केवल सीटेट की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।
CTET February 2026 की परीक्षा 8 फरवरी को पूरे देश में स्थित सेंटरों पर दो अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित होगी, जिसमें पेपर 1 और पेपर 2 दोनों का आयोजन उसी दिन किया जाएगा।

CTET February 2026 के लिए कौन कर सकता है आवेदन

सीटेट परीक्षा दो भागों में होती है—पेपर 1 और पेपर 2। पेपर 1 उन अभ्यर्थियों के लिए है जो पहली से पांचवीं कक्षा तक पढ़ाना चाहते हैं, जबकि पेपर 2 छठी से आठवीं कक्षा के शिक्षकों के लिए होता है। CTET February 2026 में आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को अपनी शैक्षिक योग्यता के अनुसार सही पेपर चुनना होगा।

पेपर 1 के लिए उम्मीदवार को 12वीं पास होना जरूरी है और इसके साथ 4 साल का बी.एल.एड (B.El.Ed) कोर्स या फिर 12वीं के बाद दो साल का डी.एल.एड (D.El.Ed) होना चाहिए। वहीं पेपर 2 के लिए उम्मीदवार को ग्रेजुएशन पूरा होना चाहिए और इसके साथ बी.एड (B.Ed) की डिग्री या बीएड अंतिम वर्ष में पढ़ रहे अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। ग्रेजुएशन में कम से कम 50% अंक आवश्यक हैं।
जो भी उम्मीदवार CTET February 2026 के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें सभी दस्तावेज़ पहले से तैयार रखने चाहिए ताकि आवेदन प्रक्रिया में कोई परेशानी न हो।

CTET February 2026 के लिए आवेदन शुल्क

सीटेट परीक्षा का शुल्क उम्मीदवारों की श्रेणी के आधार पर निर्धारित किया गया है। सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को एक पेपर के लिए 1000 रुपये का शुल्क देना होगा। यदि कोई उम्मीदवार पेपर 1 और पेपर 2 दोनों के लिए आवेदन करता है, तो फीस 1200 रुपये होगी।
दिव्यांग, एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए शुल्क काफी कम रखा गया है। इन्हें एक पेपर के लिए 500 रुपये और दोनों पेपरों के लिए 600 रुपये का भुगतान करना होगा।
CTET February 2026 के लिए फीस का भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन मोड—डिजिटल पेमेंट, नेट बैंकिंग या कार्ड के माध्यम से किया जाएगा।

CTET February 2026 परीक्षा कब और कैसे होगी

सीबीएसई के अनुसार CTET February 2026 परीक्षा 8 फरवरी को आयोजित होगी और यह परीक्षा ऑफलाइन मोड में पेन-पेपर आधारित होगी। इस बार भी परीक्षा दो पालियों में ली जाएगी।
पहली पाली में पेपर 2 का आयोजन सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक किया जाएगा। पेपर 2 उन उम्मीदवारों के लिए होता है जो 6वीं से 8वीं कक्षा तक पढ़ाना चाहते हैं।
दूसरी पाली दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक आयोजित की जाएगी, जिसमें पेपर 1 लिया जाएगा। पेपर 1 प्राथमिक कक्षाओं के शिक्षक बनने वाले अभ्यर्थियों के लिए है।
दोनों पेपरों में कुल 150 प्रश्न होते हैं और हर प्रश्न एक अंक का होता है। इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग नहीं होती, जो अभ्यर्थियों के लिए फायदा है। उम्मीदवार को परीक्षा में सफल होने के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स हासिल करने होते हैं।

CTET February 2026 क्यों है महत्वपूर्ण

सीटेट सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में करियर बनाने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है। CTET February 2026 में उत्तीर्ण होने वाले उम्मीदवार देशभर के केंद्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, आर्मी स्कूलों और राज्य सरकार के कई स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए योग्य हो जाते हैं।
सीटेट का सर्टिफिकेट अब आजीवन मान्य होता है, यानी एक बार परीक्षा पास करने के बाद आपको बार-बार यह परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए यह परीक्षा सभी शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए बेहद मूल्यवान है।

अभ्यर्थियों को परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले आधिकारिक सिलेबस और परीक्षा पैटर्न को अच्छी तरह समझना चाहिए। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास करने से परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों का पैटर्न आसानी से समझ में आता है।

आवेदन करते समय किन बातों का रखें ध्यान

  • आवेदन करते समय सभी जानकारी सही तरीके से भरें।
  • दस्तावेज़ों की स्कैन कॉपी साफ और सही फॉर्मेट में अपलोड करें।
  • फीस भरने के बाद रसीद डाउनलोड करके सुरक्षित रखें।
  • आवेदन फॉर्म जमा करने के बाद उसका प्रिंट निकालना न भूलें।
  • अंतिम तारीख का इंतजार न करें, समय रहते रजिस्ट्रेशन पूरा करें।

CTET February 2026 उन उम्मीदवारों के लिए एक बेहतरीन अवसर है जो शिक्षण क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। इसलिए आवेदन की अंतिम तारीख 18 दिसंबर को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करें।https://www.jagranjosh.com/articles/ctet-2026-application-form-released-at-ctet-nic-in-check-last-date-eligibility

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भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में हर साल नई-नई कारें आती हैं, कई मॉडल छा जाते हैं और कई धीरे-धीरे भीड़ में गुम हो जाते हैं। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी कार है जिसने शुरुआत से लेकर आज तक अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है—WagonR। यह कार 1999 में भारतीय बाजार में आई थी और अपनी सरल डिजाइन, विशाल केबिन और भरोसेमंद प्रदर्शन की वजह से शुरुआती दिनों से ही लोगों की पसंद बन गई। समय के साथ कई कंपनियों ने अपनी लोकप्रिय हैचबैक लॉन्च कीं, लेकिन WagonR ने जिस तरह परिवारों के दिलों में जगह बनाई, उस स्थान तक पहुंचना अन्य कारों के लिए आसान नहीं रहा।

वित्तीय वर्ष 2024–25 के आंकड़े बताते हैं कि WagonR देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली कार रही। इसकी लगभग 1.98 लाख यूनिट्स बिकना यह साबित करता है कि WagonR भारतीय सड़कों की सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा फैमिली कार बन चुकी है। और यह अकेली सफलता नहीं है—WagonR पिछले चार सालों से लगातार नंबर एक कार बनी हुई है। आज जब ज्यादातर गाड़ी खरीदार एसयूवी या प्रीमियम सेडान में दिलचस्पी लेते हैं, तब भी WagonR का इतने बड़े स्तर पर बिकना इस कार की मजबूती और लोकप्रियता को साफ दिखाता है।

WagonR को खास बनाने वाली सबसे बड़ी चीज इसका ‘टॉल बॉय’ डिजाइन है। बाहर से यह कॉम्पैक्ट लगती है, लेकिन अंदर बैठते ही बड़ा और आरामदायक केबिन महसूस होता है। ऊंची सीटें, आसान एंट्री-एग्जिट और अच्छा लेगरूम इसे परिवारों के लिए और भी उपयोगी बनाते हैं। यही कारण है कि तीन जनरेशन में मिलाकर WagonR की 33.70 लाख से भी ज्यादा कारें भारत में बिक चुकी हैं। इस सफलता के पीछे सिर्फ डिजाइन नहीं, बल्कि मारुति का भरोसा, बेहतर माइलेज और कम मेंटेनेंस की लागत भी एक बड़ी वजह है। अब आइए देखते हैं कि WagonR ने किन-किन कारों को पीछे छोड़कर अपने लिए मजबूत जगह बनाई।

Hyundai Santro – अच्छा प्रदर्शन लेकिन फिर भी पीछे

Hyundai Santro 1998 में लॉन्च हुई थी और उस समय यह एक बहुत चर्चित हैचबैक थी। Santro का डिजाइन आकर्षक था और इसकी बिल्ड क्वालिटी भी अच्छी मानी जाती थी। कई सालों तक भारतीय बाजार में Santro और WagonR के बीच कड़ी टक्कर रही। Santro को प्रीमियम फील और स्मूथ ड्राइव के लिए लोग पसंद करते थे, जबकि WagonR को किफायती कीमत, अच्छी माइलेज और मारुति के भरोसे की वजह से ज्यादा लोग खरीदते थे।

लगभग 17 साल तक Santro बाजार में बनी रही, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता कम होती गई। 2015 में Hyundai ने इसे बंद कर दिया और अपनी नई छोटी कारों Eon और i10 पर ज्यादा ध्यान दिया। हालांकि 2018 में Santro को नई डिजाइन के साथ फिर लॉन्च किया गया, लेकिन तब तक WagonR ने बाजार में अपना मजबूत स्थान हासिल कर लिया था। दोबारा लॉन्च होने के बावजूद Santro ज्यादा सेल नहीं कर पाई और 2022 में इसे फिर से बंद करना पड़ा। इस दौरान WagonR की पकड़ बाजार में और मजबूत हो चुकी थी।

Tata Indica – दमदार कार लेकिन WagonR जैसा जुड़ाव नहीं बना पाई

Tata Indica भी WagonR की एक महत्वपूर्ण प्रतिद्वंद्वी थी। इंडिका के बड़े केबिन, चौड़े डिजाइन और दमदार इंजन ने कई ग्राहकों को शुरुआत में अपनी ओर आकर्षित किया। इसकी कीमत भी WagonR से कम थी, इसलिए कई लोग इसे एक किफायती विकल्प मानते थे। लेकिन समय के साथ WagonR की विश्वसनीयता और मारुति के मजबूत नेटवर्क ने इंडिका को पीछे छोड़ दिया।

टाटा ने इंडिका में कई बदलाव किए, फेसलिफ्ट लाए और डीज़ल इंजन विकल्प भी दिया, लेकिन WagonR जैसी लोकप्रियता उसे नहीं मिल पाई। धीरे-धीरे इंडिका की सेल घटती गई और 20 साल के उत्पादन के बाद 2018 में इसे बंद कर दिया गया। जहां इंडिका ग्राहकों को स्पेस और ताकत देती थी, वहीं WagonR लोगों के लिए सरल, भरोसेमंद और लंबे समय तक टिकने वाला विकल्प बन गई।

Fiat Uno – अंतरराष्ट्रीय पहचान लेकिन भारतीय बाजार में असफल

Fiat Uno एक ऐसी कार थी जिसने दुनिया के कई बाजारों में पहचान बनाई थी। जब इसे भारत में लॉन्च किया गया तो उम्मीद थी कि यह यहां भी अच्छा प्रदर्शन करेगी। लेकिन भारतीय बाजार की जरूरतें और व्यवहार विदेशी बाजारों से काफी अलग थे। Uno को इंडियन फैक्ट्रियों में प्रोडक्शन की कई समस्याएं झेलनी पड़ीं। इसके अलावा सर्विस नेटवर्क सीमित होने की वजह से भी ग्राहकों में भरोसा पैदा नहीं हो पाया।

Uno में फीचर्स और डिजाइन अच्छा था, लेकिन WagonR जैसी उपयोगिता और किफायत उसमें नहीं थी। भारतीय ग्राहकों को ऐसी कार चाहिए थी जो कम खर्च में ज्यादा सुविधा दे सके, और WagonR ने वही किया। कुछ ही वर्षों बाद Uno की बिक्री गिरती गई और Fiat ने इसे भारत में बंद कर दिया।

Daewoo Matiz – सुंदर डिजाइन लेकिन कम उम्र

Daewoo Matiz 1998 में बाजार में आई थी और अपने समय की सबसे स्टाइलिश हैचबैक में मानी जाती थी। इसका डिजाइन आकर्षक था और यह शहर में चलाने के लिए एक हल्की और आसान कार थी। लेकिन सिर्फ एक साल बाद ही WagonR लॉन्च हो गई, जिसने ग्राहकों को ज्यादा स्पेस, बेहतर सीटिंग और भरोसेमंद प्रदर्शन जैसे फायदे दिए।

दूसरी ओर Daewoo कंपनी की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई और आखिरकार 2002 में कंपनी दिवालिया हो गई। इसके बाद Matiz भी बाजार से गायब हो गई। WagonR अपनी विश्वसनीयता और प्रैक्टिकल डिजाइन की वजह से लगातार ऊपर चढ़ती रही और Matiz जैसी कारें धीरे-धीरे खत्म हो गईं।

WagonR क्यों बनी भारत की सबसे भरोसेमंद फैमिली कार?

WagonR की सफलता का राज सिर्फ इसका डिजाइन नहीं है। यह कार शहर और हाईवे दोनों पर आराम से चलती है। माइलेज अच्छा देती है और मेंटेनेंस भी कम लगता है। परिवारों के लिए इसका बड़ा केबिन, आसान ड्राइविंग और सस्ती सर्विसिंग इसे परफेक्ट फैमिली कार बनाते हैं। यही वजह है कि WagonR पिछले कई सालों से भारतीय परिवारों की पहली पसंद है और आने वाले वर्षों में भी यह अपनी जगह आसानी से बनाए रखेगी।https://www.indiatoday.in/auto/cars/story/hyundai-santro-the-car-that-challenged-marutis-supremacy-2707683-2025-04-12

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अमेरिका में इनकम टैक्स खत्म करने की तैयारी? राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दावा | Trump Income Tax Plan

ट्रंप का नया दावा जिसने चर्चा बढ़ा दी

अमेरिका में एक नई बहस तेज़ हो गई है कि क्या आने वाले समय में अमेरिकियों को अपनी कमाई पर इनकम टैक्स देना बंद करना पड़ सकता है। (Trump Income Tax Plan)यह सवाल तब उभरा जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोबारा कहा कि सरकार को टैरिफ से इतनी ज्यादा कमाई हो रही है कि इनकम टैक्स को काफी कम किया जा सकता है या शायद लगभग खत्म भी कर दिया जाए। उन्होंने यह बात अमेरिकी सैन्य जवानों से वीडियो कॉल के दौरान कही। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं बताया कि यह बदलाव कब लागू होगा, पर उनके बयान ने देशभर में बड़ी उम्मीद और उत्सुकता पैदा कर दी है।

ट्रंप का कहना है कि उनकी टैरिफ पॉलिसी से सरकार को लगातार भारी राजस्व मिल रहा है। उनके अनुसार, जितना अधिक आयात शुल्क से पैसा आएगा, उतना ही सरकार को आम नागरिकों की कमाई पर लगने वाले टैक्स पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसी विचार को आधार बनाकर वे आगे Trump Income Tax Plan को आगे बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि यह योजना लागू हो गई तो लाखों अमेरिकियों को अपने टैक्स बोझ से मुक्त कराया जा सकता है।

इनकम टैक्स पर ट्रंप की पुरानी राय

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने इनकम टैक्स को कम या खत्म करने का दावा किया हो। इस साल अप्रैल में भी उन्होंने TRUTH Social पर एक पोस्ट में कहा था कि टैरिफ से होने वाली बढ़ती कमाई के कारण $200,000 सालाना से कम आय करने वाले अमेरिकियों का टैक्स पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। उनका कहना था कि यदि आयात शुल्क से सरकार को लगातार धन मिलता रहा, तो आम नागरिकों पर इनकम टैक्स लागू रखने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। यही कारण है कि वे Trump Income Tax Plan को देश की भविष्य की आर्थिक दिशा बताते हैं।

ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी क्या है?

व्हाइट हाउस में वापसी के बाद ट्रंप ने आयातित सामान पर बड़े बदलाव किए। उन्होंने कई देशों से आने वाले उत्पादों पर 10% से 50% तक का टैरिफ लगाने का फैसला किया। अलग-अलग देशों और उत्पादों के लिए टैरिफ दरें अलग रखी गईं। ट्रंप का कहना है कि इससे घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, विदेशी सामान महंगा होगा और लोग अमेरिकी सामान खरीदने पर ज्यादा ध्यान देंगे। उनका दावा है कि देश में हो रहा यह बदलाव अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत और स्थिर बनाने में मदद करेगा। इसी नीति को ध्यान में रखकर वे बार-बार समझाते हैं कि Trump Income Tax Plan कोई कल्पना नहीं, बल्कि टैरिफ आधारित आर्थिक मॉडल का स्वाभाविक परिणाम है।

$2,000 टैरिफ बोनस का बड़ा वादा

ट्रंप सिर्फ इनकम टैक्स खत्म करने की बात नहीं कर रहे, बल्कि उन्होंने हर नागरिक को $2,000 टैरिफ बोनस देने का भी वादा किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को टैरिफ पसंद नहीं हैं, वे इसकी ताकत को समझ नहीं पा रहे हैं। उनके अनुसार, आज अमेरिका दुनिया का सबसे अमीर और आर्थिक रूप से मजबूत देश बना है। महंगाई घट रही है, स्टॉक मार्केट रिकॉर्ड बना रहा है और रिटायरमेंट फंड नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं। ऐसे समय में टैरिफ से मिली कमाई लोगों को सीधे लाभ पहुंचा सकती है। यहीं पर उनका Trump Income Tax Plan और मजबूत हो जाता है, क्योंकि ट्रंप के अनुसार यह वित्तीय लाभ हर घर तक पहुंचाने का एक तरीका है।

अमेरिका की आर्थिक स्थिति पर ट्रंप की राय

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका अब टैरिफ से ट्रिलियन डॉलर कमा रहा है और जल्द ही देश अपने लगभग 37 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज को चुकाना शुरू कर देगा। उनका दावा है कि पूरे देश में निवेश की बाढ़ आ गई है—नई फैक्ट्रियां बन रही हैं, बड़े उद्योग विस्तार कर रहे हैं और रोजगार तेजी से बढ़ रहे हैं। इस तरह की आर्थिक गतिविधि से सरकार के पास इतना पैसा होगा कि इनकम टैक्स जैसी परंपरागत व्यवस्था को कमजोर किया जा सके और लोगों को अधिक कमाई बचाने का मौका मिले। उनका कहना है कि Trump Income Tax Plan को लागू करने से न केवल नागरिकों को फायदा होगा, बल्कि देश आर्थिक रूप से और भी स्वतंत्र बन जाएगा।

क्या सच में इनकम टैक्स खत्म हो सकता है?

हालांकि ट्रंप के दावे बड़े और आकर्षक हैं, लेकिन कई विशेषज्ञ इस पर सवाल भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पूरी अर्थव्यवस्था को केवल टैरिफ पर निर्भर करना जोखिम भरा हो सकता है। विदेशी देश भी जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैक्स लगा सकते हैं, जिससे व्यापारिक संबंध खतरे में पड़ सकते हैं। दूसरी ओर, ट्रंप के समर्थक इसका समर्थन करते हैं। उनका मानना है कि अगर Trump Income Tax Plan सफल हुआ तो अमेरिका दुनिया में आर्थिक नीति का नया मॉडल पेश करेगा, जहां आम लोग टैक्स मुक्त होकर अपनी पूरी कमाई खर्च या निवेश कर पाएंगे।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह योजना कब तक लागू हो पाएगी। अमेरिकी संसद में इसे पास कराना भी एक बड़ी चुनौती होगी। लेकिन ट्रंप के इस बयान के बाद जनता के बीच यह चर्चा तेजी से फैल गई है कि क्या सच में ऐसा दिन आएगा जब अमेरिका में कमाई पर टैक्स नहीं देना पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ, तो यह अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक बदलावों में से एक होगा। लोग अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि Trump Income Tax Plan भविष्य में कैसा रूप लेता है और क्या यह आम नागरिकों के जीवन में कोई बड़ा बदलाव ला सकेगा।https://hindi.etnownews.com/economy/donald-trump-no-income-tax-america-us-tax-policy-2025-tariff-based-revenue-model-article-153216240

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साल 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि इस पूरे साल कंपनियों ने IPO के जरिए जितना पैसा जुटाया है, वह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा बन गया है। IPO Calendar इस साल नए रिकॉर्ड बनाता दिखाई दे रहा है। शुरुआती 11 महीनों में ही कंपनियों ने सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटा ली है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि साल की शुरुआत से ही वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता, विदेशी बाजारों में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक फैसलों का असर भारतीय बाजार पर देखने को मिल रहा था। इसके बावजूद निवेशकों और कंपनियों दोनों ने शेयर बाजार पर अपना भरोसा बनाए रखा और लगातार बड़े इश्यू लॉन्च होते रहे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए नए टैरिफ नियमों का दबाव भारतीय बाजार पर जरूर पड़ा, लेकिन बाजार ने धीरे-धीरे अपनी मजबूती वापस पा ली। पिछले कुछ हफ्तों से सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तेजी में कारोबार कर रहे हैं और तीन दिनों से बाजार में सकारात्मक रुझान देखने को मिला है। इतना ही नहीं, बीता कारोबारी दिन तो इस साल का नया इतिहास बनाते हुए बाजार को ऑल-टाइम हाई तक ले गया। इस माहौल ने कंपनियों को IPO लाने के लिए और भी प्रोत्साहित किया और यही वजह है कि IPO Calendar पूरे साल निवेशकों के लिए उत्साह का केंद्र बना रहा।

कंपनियों ने सालभर के उतार-चढ़ाव के बीच भी शेयर बाजार से दूरी नहीं बनाई। मीशो लिमिटेड, एक्वस लिमिटेड और विद्या वायर्स लिमिटेड जैसे बड़े नाम आने वाले महीने में अपना IPO लॉन्च कर रहे हैं। इनके आने के बाद 2025 में कुल जुटाई गई राशि पिछले सभी रिकॉर्ड पार कर चुकी है। मीशो करीब 5421 करोड़ रुपये जुटाने की योजना में है, एक्वस लिमिटेड लगभग 921 करोड़ रुपये का इश्यू ला रही है, और विद्या वायर्स लिमिटेड भी करीब 300 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रही है। इन इश्यूज़ ने पहले से ही तय कर दिया है कि यह साल IPO बाजार में ऐतिहासिक साबित होगा।

सितंबर बना IPO का सबसे चमकदार महीना

अगर 2025 के पूरे IPO प्रदर्शन को देखा जाए, तो सितंबर सबसे खास महीनों में रहा। इस महीने के बाद IPO की संख्या अचानक बढ़ गई और बड़ी कंपनियों ने बाजार में दमदार तरीके से दस्तक दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 10 और कंपनियां 25,000 करोड़ रुपये तक के नए इश्यू तैयार कर रही हैं। यदि ये सभी लॉन्च हो जाते हैं, तो IPO Calendar का कुल फंड जुटाव 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच सकता है, जो अब तक किसी भी साल में नहीं हुआ।

बड़ी बिकवाली के बाद भी IPO में बरकरार रही तेजी

2025 इसलिए भी अलग है क्योंकि इस साल प्रमोटर्स और शुरुआती निवेशकों ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से बड़ी मात्रा में शेयर बेचे। 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली OFS के जरिए हुई है। यह आंकड़ा पिछले साल से अधिक है और इससे यह साफ होता है कि बड़े निवेशक इस समय अच्छे वैल्यूएशन पर अपनी हिस्सेदारी बेचना पसंद कर रहे हैं। तुलना की जाए तो 2024 में OFS से करीब 95,300 करोड़ रुपये जुटाए गए थे जबकि इस साल यह संख्या पहले ही पार कर चुकी है। 2021 से 2025 के बीच कुल 5.4 लाख करोड़ रुपये भारतीय कंपनियों ने IPO और OFS के जरिए जुटाए, जिनमें से लगभग दो-तिहाई हिस्सा OFS से आया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा पुराने शेयरधारकों की एग्जिट स्ट्रेटेजी पर भी कायम है।

नए IPO ने बढ़ाया निवेशकों का आत्मविश्वास

भारतीय बाजार में आए कुछ बड़े इश्यू ने निवेशकों का विश्वास काफी बढ़ाया है। ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन गैराज वेंचर्स, एडटेक कंपनी फिजिक्सवाला और फिनटेक ब्रांड पाइन लैब्स जैसे बड़े IPO ने बाजार को सकारात्मक दिशा दी है। उनके मजबूत बिजनेस मॉडल और बेहतर विकास क्षमता ने निवेशकों को नए IPO की ओर आकर्षित किया है। इससे बाजार में यह संदेश गया कि नई कंपनियां भी मुनाफे और विस्तार के मामले में पीछे नहीं हैं। इसी कारण पूरे साल IPO Calendar चर्चा में बना रहा।

विदेशी निवेशकों की भूमिका भी काफी अहम रही है। भले ही उन्होंने कई अन्य देशों के बाजारों से लगभग 24 अरब डॉलर की बिकवाली की हो, लेकिन भारत में नए इश्यू में उन्होंने करीब 7.55 अरब डॉलर का निवेश किया है। यह दर्शाता है कि भारत अब भी विदेशी निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद बाजारों में शामिल है।

क्यों खास है यह IPO सीजन?

इस साल का IPO सीजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई सेक्टर पहली बार मजबूती के साथ बाजार में उतरे हैं। ई-कॉमर्स, मैन्युफैक्चरिंग, फिनटेक, एडटेक और टेक्नोलॉजी सेक्टर की कई नई कंपनियां शेयर बाजार में अपनी जगह बना रही हैं। घरेलू निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने भी IPO बाजार को मजबूत किया है। SIP और डायरेक्ट निवेश के जरिए भारतीय निवेशक लगातार बाजार में पैसे लगा रहे हैं। यही वजह है कि चाहे बाजार ऊपर हो या नीचे, IPO की रफ्तार धीमी नहीं हुई।

आगे क्या?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर में भी कई मजबूत IPO लॉन्च हो सकते हैं। अगर यह रफ्तार ऐसी ही बनी रही, तो पूरे साल का कुल फंड जुटाव 2 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती, कंपनियों की ग्रोथ और निवेशकों के बढ़ते भरोसे से साफ है कि आने वाले समय में भी IPO Calendar ऐसा ही चमकता रहेगा और भारत दुनिया के सबसे बड़े IPO बाजारों में अपनी जगह मजबूत करेगा।https://ipowatch.in/upcoming-ipo-list/

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इस Electric SUV Sales में महिंद्रा ने तोड़ा सभी रिकॉर्ड, ग्राहक हर 10 मिनट में खरीद रहे एक SUV

इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती पसंद और महिंद्रा का नया इतिहास

भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक कारों की मांग जिस तेजी से बढ़ रही है, उसने पूरे ऑटो सेक्टर का माहौल बदल दिया है। लोग अब पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते खर्च से परेशान होकर ऐसी गाड़ियाँ ढूंढ़ रहे हैं जो किफायती हों, पर्यावरण के अनुकूल हों और रोजमर्रा की जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकें। इसी बदलती सोच का सीधा फायदा महिंद्रा को मिला है। कंपनी की Electric SUV Sales ने नया इतिहास बना दिया है और महिंद्रा ने सिर्फ सात महीनों के भीतर 30 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक एसयूवी ग्राहकों तक पहुंचा दीं। कंपनी का दावा है कि हर 10 मिनट में एक नई ईवी बिक रही है, जो किसी भी ब्रांड के लिए बेहद बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

महिंद्रा के इस रिकॉर्ड ने पूरे बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह न सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि पूरे भारतीय EV सेगमेंट के लिए एक संकेत है कि ग्राहक अब इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले से कहीं अधिक भरोसा जताने लगे हैं। Electric SUV Sales में आई यह तेज़ बढ़त दिखाती है कि आने वाले समय में भारत ईवी सेक्टर में विश्वभर का सबसे बड़ा बाजार बन सकता है।

XEV 9e और BE 6 की लगातार बढ़ती डिमांड

महिंद्रा ने पिछले साल नवंबर में XEV 9e और BE 6 को बाजार में लॉन्च किया था, और तब किसी ने भी नहीं सोचा था कि ये दोनों मॉडल इतनी तेज रफ्तार से लोकप्रिय हो जाएंगे। कंपनी की Electric SUV Sales में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण यही दोनों मॉडल बने हैं। इनकी बढ़ती मांग ने पूरे ब्रांड को एक नई दिशा दी है। खास बात यह है कि इन SUVs को खरीदने वालों में से लगभग 80 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिन्होंने पहली बार महिंद्रा की कार चुनी है। इससे पता चलता है कि इन मॉडलों ने बिलकुल नए ग्राहक वर्ग को कंपनी से जोड़ा है।

नए ग्राहकों का भरोसा जीतना किसी भी कंपनी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। XEV 9e और BE 6 की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक डिजाइन, जबरदस्त फीचर्स और शानदार ड्राइविंग रेंज के साथ महिंद्रा अब इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट में एक मजबूत ब्रांड पहचान बना चुकी है। यही वजह है कि Electric SUV Sales लगातार ऊपर बढ़ रही हैं और दोनों मॉडल आज कई शहरों में वेटिंग लिस्ट तक पहुंच चुके हैं।

65% महिंद्रा EVs रोज सड़क पर दौड़ रही हैं

कंपनी ने एक दिलचस्प जानकारी साझा की है कि उनकी इलेक्ट्रिक एसयूवी लाइनअप की करीब 65 प्रतिशत गाड़ियाँ हर वर्किंग डे सड़क पर दौड़ती दिखाई देती हैं। यह आंकड़ा बताता है कि ग्राहक इन वाहनों को सिर्फ एक सेकेंडरी कार की तरह नहीं रखते, बल्कि इन्हें रोजाना की यात्रा के लिए भरोसे के साथ इस्तेमाल कर रहे हैं।

जब किसी इलेक्ट्रिक वाहन को बड़ी संख्या में लोग दैनिक उपयोग में लाते हैं, तो यह दर्शाता है कि उसकी रेंज, बैटरी, चार्जिंग क्षमता और परफॉर्मेंस पर ग्राहकों को पूरा विश्वास है। यही भरोसा महिंद्रा की Electric SUV Sales को बड़ी तेजी से आगे बढ़ा रहा है और यह दिखाता है कि कंपनी के मॉडल लंबे समय तक चलने वाले, सुरक्षित और उपयोगी हैं।

महिंद्रा का EV विजन अब भारत से निकलकर दुनिया तक

महिंद्रा पहले से ही भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में प्रमुख खिलाड़ी मानी जाती है, लेकिन अब कंपनी का फोकस सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। बेंगलुरु में आयोजित Scream Electric इवेंट के दौरान कंपनी ने अपने कई ग्लोबल प्लान पेश किए।

महिंद्रा ने बताया कि वह Formula E में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करेगी। यह कदम कंपनी को वैश्विक ईवी टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक रेसिंग प्लेटफॉर्म्स में नई पहचान दिलाएगा। साथ ही कंपनी ने XEV 9S का फर्स्ट एनिवर्सरी एडिशन भी पेश किया, जिसे बेहद स्टाइलिश और आधुनिक डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। इसके अलावा कई नए ईवी कॉन्सेप्ट पेश किए गए, जिसने यह साफ कर दिया कि आने वाले वर्षों में महिंद्रा दुनिया के इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में भी अपनी Electric SUV Sales बढ़ाना चाहती है।

इन योजनाओं से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिंद्रा का लक्ष्य सिर्फ भारतीय ग्राहकों तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी पूरी दुनिया में अपनी इलेक्ट्रिक एसयूवीज़ का प्रभाव बढ़ाना चाहती है। नई टेक्नोलॉजी, बेहतर बैटरी बैकअप, तेज चार्जिंग और आधुनिक डिजाइन के साथ महिंद्रा आने वाले समय में EV मार्केट की बड़ी कंपनियों को कड़ी टक्कर दे सकती है।

ग्राहकों का बदलता नजरिया और इलेक्ट्रिक SUVs पर भरोसा

आज का ग्राहक पहले की तरह सिर्फ इंजन पावर नहीं देखता। वह कीमत, तकनीक, रेंज, चार्जिंग सुविधा, सुरक्षा फीचर्स और सबसे महत्वपूर्ण—ब्रांड पर भरोसा—इन सभी चीजों को महत्व देता है। महिंद्रा की इलेक्ट्रिक एसयूवीज़ ने इन सभी पैरामीटर्स पर ग्राहकों को संतुष्ट किया है।

बेहतर रेंज, कम मेंटेनेंस, तेज चार्जिंग और उन्नत सुरक्षा फीचर्स के कारण महिंद्रा की Electric SUV Sales लगातार मजबूत हो रही हैं। लोग अब समझ चुके हैं कि इलेक्ट्रिक कारें न केवल पर्यावरण के लिए अच्छी हैं, बल्कि खर्च के मामले में भी बेहद किफायती साबित होती हैं।

देश में चार्जिंग नेटवर्क भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे अब इलेक्ट्रिक वाहन चलाना और भी आसान हो गया है। सरकार की नई नीतियों और EV-फ्रेंडली योजनाओं ने भी ग्राहकों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर आकर्षित किया है।

निष्कर्ष: महिंद्रा की दौड़ अभी और तेज होगी

महिंद्रा ने जो माइलस्टोन हासिल किया है, वह केवल एक बिक्री का आंकड़ा नहीं है बल्कि यह दर्शाता है कि भारत इलेक्ट्रिक भविष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। हर 10 मिनट में एक एसयूवी बेचना कोई साधारण बात नहीं है, और यह उपलब्धि महिंद्रा की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है।

कंपनी की Electric SUV Sales आने वाले समय में और भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है, और महिंद्रा का कहना है कि वे इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपनी उत्पादन क्षमता और टेक्नोलॉजी को और मजबूत कर रहे हैं। भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार अब सिर्फ शुरुआत कर रहा है, और महिंद्रा इस रेस में सबसे आगे दिखाई दे रही है। https://www.cardekho.com/hi/india-car-news/mahindra-sold-more-than-30000

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Mahindra Price Hike News 2026: नए साल में नहीं बढ़ेंगी Mahindra गाड़ियों की कीमतें

हर साल दिसंबर के अंत में यह चर्चा ज़ोर पकड़ लेती है कि नए साल की शुरुआत में कार कंपनियां अपने दाम बढ़ा देंगी। ज़्यादातर लोग जनवरी आते ही कीमतों में वृद्धि की उम्मीद मानकर चलते हैं। लेकिन इस बार Mahindra Price Hike News 2026 ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया है। महिंद्रा ने साफ घोषणा की है कि जनवरी 2026 से उनके वाहनों की कीमतों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होने वाली है। यह खबर उन लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर आई है जो लंबे समय से गाड़ी खरीदना चाहते थे, लेकिन दाम बढ़ने का डर उन्हें रोक रहा था।

कच्चे माल की कीमतें स्थिर रहीं तो गाड़ियों के दाम नहीं बढ़ेंगे

महिंद्रा के अनुसार, कीमतें तभी बदली जाएंगी जब स्टील, एल्युमिनियम और अन्य महत्वपूर्ण कच्चे माल की लागत में कोई बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। जब तक उत्पादन खर्च सामान्य रहता है, कंपनी भी पुराने दामों को ही बनाए रखेगी। Mahindra Price Hike News 2026 में यह बात विशेष रूप से कही गई है कि सिर्फ परंपरा निभाने के लिए कीमतें बदलना ग्राहकों के हित में नहीं होता। महिंद्रा का मानना है कि खरीददारों को सही मूल्य पर वाहन मिलना चाहिए और उनके भरोसे को टूटने नहीं देना चाहिए।

कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी राजेश जेजुरिकर ने बताया कि सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए GST कटौती से ग्राहकों को पहले ही बड़ी राहत मिली है। महिंद्रा नहीं चाहती कि नई कीमतें तय करके सरकार के इस फैसले का लाभ कम कर दिया जाए। इसी वजह से कंपनी ने फिलहाल अपनी कीमतों को स्थिर रखने का निर्णय लिया है। इस कारण Mahindra Price Hike News 2026 ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर बन गई है।

GST कटौती का असर महिंद्रा के निर्णय पर साफ दिखा

सरकार ने छोटी और मीडियम साइज कारों पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% कर दिया है। वहीं, बड़ी SUVs और लग्ज़री गाड़ियों पर टैक्स में कमी के बाद ग्राहकों को कम कीमत में बेहतर विकल्प मिल रहे हैं। कुछ कंपनियों ने इस बदलाव के बाद अपने वाहनों की कीमतें भी कम की हैं ताकि ग्राहकों तक राहत सीधे पहुंचे। महिंद्रा का कहना है कि वे सरकार के इस कदम को आगे बढ़ाते हुए अपने दामों में कोई बदलाव नहीं करेंगे।

यह निर्णय Mahindra Price Hike News 2026 में इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अधिकांश कंपनियां जनवरी में नई मूल्य सूची जारी करती हैं। लेकिन महिंद्रा ने इस बार पूरी तरह अलग रुख अपनाया है, जिसकी वजह से ऑटो सेक्टर में भी काफी सकारात्मक माहौल बन गया है।

ग्राहकों का विश्वास सबसे बड़ी प्राथमिकता

महिंद्रा ने यह स्पष्ट किया है कि वे सिर्फ वास्तविक परिस्थितियों में ही कीमतें बढ़ाएंगे। यदि कच्चे माल की लागत, उत्पादन खर्च या अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों की कीमत बढ़ती है, तभी कंपनी नए दाम तय करेगी। बिना जरूरत के मूल्य परिवर्तन करना कंपनी की नीति में शामिल नहीं है। इसी कारण लोग Mahindra Price Hike News 2026 को लेकर काफी सकारात्मक नजरिया रख रहे हैं।

ग्राहक आमतौर पर इस चिंता में रहते हैं कि जनवरी के बाद गाड़ी खरीदना महंगा पड़ सकता है। लेकिन महिंद्रा के इस फैसले के बाद अब वे अपनी जरूरत और बजट के अनुसार आराम से वाहन खरीदने का निर्णय ले सकते हैं। इस कदम से लोगों में कंपनी के प्रति भरोसा और भी मजबूत हुआ है।

EV और ICE मॉडल्स की मांग में बढ़ोतरी की संभावना

महिंद्रा का मानना है कि आने वाले महीनों में उनकी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और इंजन आधारित गाड़ियों (ICE) दोनों के लिए मांग बढ़ सकती है। कंपनी अपनी EV रेंज को लगातार बढ़ा रही है और उनकी SUV लाइनअप पहले ही बाजार में लोकप्रिय है। स्थिर कीमतें ग्राहकों को अधिक आकर्षित करेंगी, जिससे बिक्री में भी सुधार देखने की उम्मीद है। यही कारण है कि Mahindra Price Hike News 2026 को काफी सकारात्मक माना जा रहा है।

कंपनी का यह भी कहना है कि ग्राहकों को यह महसूस कराना बहुत जरूरी है कि कंपनी उनकी जरूरतों और बजट को समझती है। कीमतें न बढ़ाकर महिंद्रा ने एक बार फिर दिखाया है कि वह ग्राहक-केंद्रित सोच के साथ काम करती है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर Mahindra Price Hike News 2026 सिर्फ एक घोषणा नहीं, बल्कि ग्राहकों के लिए राहत की बड़ी खबर है। जहां अधिकतर वाहन निर्माता कंपनियां साल की शुरुआत में अपने दाम बढ़ाने का फैसला लेती हैं, वहीं महिंद्रा का यह निर्णय पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा है। इससे खरीदारों का भरोसा मजबूत होता है और उन्हें महसूस होता है कि कंपनी उनके हितों को महत्व देती है।

आने वाले समय में यह कदम न सिर्फ ग्राहकों के बजट को संतुलित रखेगा, बल्कि महिंद्रा की बिक्री और लोकप्रियता दोनों पर सकारात्मक असर डाल सकता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि महिंद्रा का यह फैसला भारतीय ऑटो सेक्टर में पारदर्शिता और ग्राहक भरोसे की नई मिसाल कायम करता है।https://www.prabhatkhabar.com/automobile/mahindra-car-prices-jan-2026

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