सर्दियों की एक ठंडी सुबह थी। दिल्ली की गलियों में कोहरा छाया हुआ था। सूरज अब तक पूरी तरह निकला नहीं था, लेकिन ज़िंदगी की हलचल शुरू हो चुकी थी। एक छोटे से मोहल्ले में, सात साल का एक लड़का, आरव, स्कूल के लिए तैयार हो रहा था। उसकी माँ, सुमन, रसोई में खड़ी थी – एक हाथ से चाय बना रही थी और दूसरे हाथ से आरव के टिफिन में पराठा रख रही थी। माँ का प्यार (mother’s love) हर उस छोटे काम में झलक रहा था।
सुमन एक साधारण महिला थी, लेकिन उसका हौसला बहुत बड़ा था। जब आरव सिर्फ दो साल का था, तभी उसके पिता एक सड़क हादसे में चल बसे। सुमन ने किसी के सहारे के बिना ही खुद पर भरोसा करके बेटे की परवरिश की। कभी सिलाई करके, कभी लोगों के घर काम करके उसने अपने बेटे के हर सपने को जिंदा रखा। पर आरव अभी छोटा था। उसे माँ का प्यार (mother’s love) समझ नहीं आता था, उसे सिर्फ इतना लगता था कि माँ बहुत डांटती है।
एक दिन स्कूल से लौटते वक्त, आरव अपने दोस्त राहुल के साथ चिप्स खाते हुए घर आ रहा था। रास्ते में राहुल बोला, “तेरी मम्मी तो बहुत सख्त है यार, हर बात पर टोकती रहती है।”
आरव ने भी झुंझलाकर कहा, “हां यार, मेरी मम्मी भी बहुत परेशान करती है। खेलने से मना करती है, मोबाइल छीन लेती है, हर वक्त कहती रहती है कि पढ़ाई करो। कभी-कभी लगता है कि माँ है या जेलर।”
उसकी ये बातें सुनकर सुमन का दिल थोड़ा टूट गया, क्योंकि वह दरवाजे के पास ही खड़ी थी। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराकर अंदर चली गई। माँ का प्यार (mother’s love) चुपचाप सह लेना भी होता है, जब बच्चे अनजाने में कुछ कह जाएँ।
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रात को खाना खाते समय माँ ने बड़े प्यार से पूछा, “आरव, तुझे मेरी बातें बुरी लगती हैं?”
आरव ने जवाब दिया, “नहीं माँ, बस कभी-कभी लगता है कि आप ज़्यादा रोकती हो।”
माँ ने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा, “बेटा, माँ का प्यार (mother’s love) अक्सर सख्ती में छुपा होता है। मैं तुझे रोकती हूँ, क्योंकि तुझे सही रास्ता दिखाना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि तू बड़ा आदमी बने। कभी तू समझेगा कि यह डांट भी एक तरह का प्यार ही है।”
आरव को तब भी माँ की बातें भारी लगीं। उसने सर हिलाया और वापस मोबाइल में गेम खेलने लग गया।
कुछ दिन बाद स्कूल में पिकनिक की घोषणा हुई। सभी बच्चे बहुत खुश थे। आरव भी बेहद उत्साहित था। घर आकर उसने माँ से कहा, “माँ, स्कूल पिकनिक के लिए 500 रुपए चाहिए।”
सुमन के पास उस वक्त सिर्फ 200 रुपए ही बचे थे। फिर भी उसने मुस्कुराकर 200 रुपए आरव को दिए और कहा, “कल तक बाकी पैसे भी दे दूंगी बेटा।”
उस रात जब आरव गहरी नींद में था, माँ घर से बाहर निकली और पास के घरों में सफाई करने लगी ताकि कुछ पैसे और इकट्ठे हो सकें। ठंडी रात में काम करना आसान नहीं था, पर माँ का प्यार (mother’s love) मेहनत से डरता नहीं।
अगले दिन थकी-हारी सुमन ने आरव को पूरे 500 रुपए दिए। आरव बहुत खुश हुआ और पिकनिक की तैयारी में लग गया। लेकिन उसे ये अंदाज़ा नहीं था कि उसकी माँ ने उन पैसों के लिए क्या-क्या सहा।
पिकनिक में उसने अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती की। चॉकलेट्स, जूस और खिलौने खरीदे। जब वह घर लौटा तो माँ ने प्यार से पूछा, “पिकनिक कैसी रही बेटा?”
आरव ने मुस्कराते हुए जवाब दिया, “बहुत मज़ा आया माँ, पर काश और पैसे होते तो मैं बड़ा रोबोट भी खरीद पाता। बाकी बच्चों के पास तो बहुत कुछ था।”
माँ ने कहा, “कोई बात नहीं बेटा, अगली बार ले लेना।”
उस रात माँ की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बुखार बहुत तेज था। आरव घबरा गया और पड़ोसी अंकल को बुला लाया। डॉक्टर ने दवाइयाँ दीं और कहा कि कुछ दिन आराम जरूरी है।
पहली बार आरव को एहसास हुआ कि माँ के बिना घर कितना सूना लगता है। उसने रोटी सेंकने की कोशिश की – जो जल गई। बर्तन धोए – जिनमें झाग ही झाग रह गया। मगर उस पल माँ का प्यार (mother’s love) उसे हर चीज़ में महसूस हुआ।
आरव माँ के पास बैठ गया और बोला, “माँ, अब मुझे आपकी मेहनत समझ आने लगी है। आपने मेरे लिए जो कुछ किया है, मैं उसे कभी नहीं भूलूँगा।”
माँ की आँखों में आंसू थे, लेकिन होंठों पर मुस्कान थी। “बेटा, तू समझ गया – यही माँ का प्यार (mother’s love) है,” उन्होंने कहा।
उस दिन के बाद आरव में बदलाव आने लगा। वो पढ़ाई में मन लगाने लगा, माँ का काम खुद करने लगा। जब माँ थक जाती, तो वो खुद पानी लेकर आता और कहता – “अब मैं बड़ा हो गया हूँ माँ।”
समय बीतता गया। आरव अब 18 साल का हो गया था। एक समझदार, मेहनती और भावुक लड़का। उसने स्कॉलरशिप जीत ली और एक अच्छे कॉलेज में दाख़िला पा लिया। जब वह हॉस्टल जा रहा था, माँ ने उसे गले लगाते हुए कहा, “तू मेरी मेहनत का नतीजा है बेटा। जा, अपनी उड़ान भर, लेकिन माँ का प्यार (mother’s love) कभी मत भूलना।”
आरव ने माँ के पाँव छुए और बोला, “आपका प्यार ही तो मेरी सबसे बड़ी ताक़त है माँ।”
कुछ सालों बाद जब आरव इंजीनियर बन गया, उसका पहला वेतन आया। उसने माँ के लिए एक सुंदर साड़ी और सोने का छोटा सा लॉकेट खरीदा। जब उसने माँ को वो तोहफ़ा दिया, माँ की आँखें भर आईं। लॉकेट खोलते ही उन्होंने देखा कि उस पर लिखा था –
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“माँ का प्यार – मेरी सबसे बड़ी पूँजी” (mother’s love – my greatest treasure)
माँ ने बेटे को गले लगाते हुए कहा, “बेटा, तेरे इस प्यार ने मेरी सारी थकान मिटा दी। अब कुछ और पाने की इच्छा नहीं है।”
उस दिन आरव ने अपने दोस्तों से कहा, “हम माँ की डांट से परेशान हो जाते हैं, लेकिन नहीं समझ पाते कि वही माँ का प्यार (mother’s love) हमें सही राह पर लाता है। माँ का प्यार शब्दों से नहीं, एहसासों से समझा जाता है।”
माँ का प्यार (mother’s love) बिना शर्त होता है, बिना उम्मीद के होता है, और सबसे खास बात – वो कभी कम नहीं होता। चाहे हालात कैसे भी हों, माँ का प्यार हमेशा हमारे साथ रहता है।https://hindikahani.in/long-story-in-hindi/