मार्गशीर्ष मास हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह महीना भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना माना जाता है और इसी कारण इस मास की अमावस्या का विशेष महत्व है। Margashirsha Amavasya 2025 20 नवंबर को पड़ रही है। इस दिन पितरों की पूजा, भगवान कृष्ण की आराधना और पीपल वृक्ष की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और पितृ तर्पण का फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर पाप नष्ट होते हैं और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
मार्गशीर्ष मास पूरी तरह भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस अमावस्या के दिन उनका सम्मान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या तालाब में स्नान करना चाहिए। यदि बाहर स्नान संभव न हो, तो घर पर ही गंगाजल और काले तिल से स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद साफ और नए वस्त्र पहनकर भगवान कृष्ण की पूजा का संकल्प लें।
पूजा में सबसे पहले अभिषेक करना आवश्यक है। बाल गोपाल की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से स्नान कराएं। उसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और मोरपंख, चंदन, और वैजयंती माला से श्रृंगारित करें। पूजा के दौरान उन्हें माखन-मिश्री का भोग लगाएं और भोग में तुलसी की पत्तियां अवश्य डालें। साथ ही, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “कृं कृष्णाय नमः” मंत्र का जाप करें।
इस दिन श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इससे मन को शांति मिलती है और पितरों को भी शांति मिलती है। शाम को घर के मंदिर में घी का दीपक जलाना पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह सभी विधियां Margashirsha Amavasya 2025 के दिन भगवान कृष्ण की पूजा को पूर्ण करती हैं और व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ प्रदान करती हैं।
पीपल का पेड़ हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है। इसमें भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा सहित सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है। साथ ही इसे पितरों का निवास स्थान भी माना गया है। इसलिए Margashirsha Amavasya 2025 के दिन पीपल की पूजा करना विशेष रूप से शुभ है।
पूजा की विधि में सबसे पहले सुबह स्नान के बाद पीपल के पेड़ पर जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद पेड़ की 7 या 11 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय पितरों का स्मरण करें और उनके आशीर्वाद की कामना करें। शाम के समय सूरज अस्त होने के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखा दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद बिना पीछे मुड़े घर लौटें। यह विधि पितृ दोष को शांत करने और घर में सुख-शांति लाने के लिए प्रभावी मानी जाती है।
मार्गशीर्ष अमावस्या पर कुछ नियमों का पालन करने से पूजा और तर्पण का प्रभाव और बढ़ जाता है। सबसे पहले पितृ तर्पण करना चाहिए। इसके लिए दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल और कुशा डालकर तर्पण करें। यह विधि पितरों की आत्मा को शांति देती है और जीवन में समृद्धि लाती है।
इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व है। अन्न, वस्त्र, कम्बल, तिल, गुड़ या धन का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। Margashirsha Amavasya 2025 पर दान करने से घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है।
साथ ही, इस दिन पशु-पक्षियों को भोजन कराना भी लाभकारी माना गया है। गाय, कुत्ते और कौवे के लिए भोजन निकालने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सौभाग्य बढ़ता है। यह दिन केवल पूजा का नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लोग इस दिन अपने पूर्वजों को याद करते हैं, दान करते हैं और दूसरों की मदद भी करते हैं।
Margashirsha Amavasya 2025 का दिन अपने आप में अत्यंत पवित्र और लाभकारी है। इस दिन भगवान कृष्ण और पीपल की पूजा, पितृ तर्पण और दान करने से न केवल आध्यात्मिक लाभ होता है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी बढ़ती है। यदि व्यक्ति इन सभी विधियों का पालन श्रद्धा और भक्ति भाव से करता है, तो Margashirsha Amavasya 2025 उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम है। यह दिन हमें अपने पूर्वजों को याद करने, धर्म के महत्व को समझने और आध्यात्मिक जीवन की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।
Disclaimer:यह लेख मार्गशीर्ष अमावस्या 2025 और उसकी पूजा-पद्धतियों पर धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है। ajkasamachar.com इसकी सटीकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं करता है।https://www.hindfirst.in/dharmbhakti/margashirsha-amavasya-2025-special-ritual-to-perform-under-the-peepal-tree-for-ancestral-blessings/97491/amp
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