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आंध्र प्रदेश नक्सली मुठभेड़: मारेडुमिल्ली में दो दिनों में 13 नक्सली ढेर, हिडमा और जोखा राव भी मारे गए

मारेडुमिल्ली में लगातार दो दिनों से बड़ा अभियान जारी

आंध्र प्रदेश नक्सली मुठभेड़ ने इस समय पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, क्योंकि मारेडुमिल्ली क्षेत्र में चल रहे लगातार अभियानों में सुरक्षा बलों ने दो दिनों के भीतर 13 नक्सलियों को ढेर कर दिया। यह इलाका घने जंगलों और कठिन पहाड़ी रास्तों से भरा हुआ है, जहाँ लंबे समय से नक्सली सक्रिय रहे हैं। मंगलवार को मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने कुख्यात माओवादी नेता मादवी हिडमा को मार गिराया था, और इसी घटना के अगले ही दिन सुबह फिर से मुठभेड़ शुरू हुई, जिसमें सात और नक्सली मारे गए। मारे गए नक्सलियों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं।

सुबह फिर शुरू हुई आंध्र प्रदेश नक्सली मुठभेड़

बुधवार की सुबह अंधेरा छटने के साथ ही सुरक्षा बलों ने जंगलों में एक और बड़ा सर्च अभियान शुरू किया। जल्द ही बलों को कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं और थोड़ी ही देर में घने पेड़ों के बीच यह दूसरी आंध्र प्रदेश नक्सली मुठभेड़ शुरू हो गई। नक्सलियों की तरफ से अचानक फायरिंग होने पर पुलिस ने तुरंत पोज़ीशन लेते हुए जवाबी कार्रवाई की। थोड़े समय चली इस मुठभेड़ में सात नक्सली ढेर हो गए। अधिकारियों ने बताया कि यह जगह मंगलवार को हुए पहले एनकाउंटर से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित थी, जहाँ नक्सलियों का एक और समूह छिपकर बैठा था।

जोखा राव उर्फ टेक शंकर का अंत – तकनीकी ढांचे को बड़ा नुकसान

इन सात नक्सलियों में से एक की पहचान मेटुरी जोखा राव उर्फ टेक शंकर के रूप में हुई है। जोखा राव लंबे समय से नक्सल आंदोलन का हिस्सा था और हथियार बनाने, संचार व्यवस्था तैयार करने और तकनीकी नेटवर्क को मजबूत करने में सबसे अहम भूमिका निभाता था। वह लगभग बीस वर्षों से AOB क्षेत्र में सक्रिय रहा और दक्षिण भारत में संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिशों में जुटा हुआ था। उसकी मौत को सुरक्षा एजेंसियां नक्सलियों के तकनीकी ढांचे के लिए बड़ा झटका मान रही हैं।

कुख्यात हिडमा की मौत का बड़ा असर

इसी बीच, मंगलवार को मारे गए छह नक्सलियों में शामिल PLGA बटालियन-1 के प्रमुख मादवी हिडमा की मौत का प्रभाव अभी भी पूरे क्षेत्र में देखा जा रहा है। हिडमा को देश का सबसे खतरनाक और रणनीतिक माओवादी नेता माना जाता था। पिछले कई वर्षों में हुए कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड वही था। उसकी मौत के बाद नक्सल संगठन अंदर से कमजोर होता दिख रहा है, और इसी कमजोरी पर सुरक्षा बल लगातार दबाव बना रहे हैं।

इलाके में गहन तलाशी अभियान जारी

बुधवार की आंध्र प्रदेश नक्सली मुठभेड़ के बाद पुलिस और सुरक्षाबलों ने पूरे मारेडुमिल्ली क्षेत्र में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया है। उन्होंने बताया कि नक्सलियों के पास से कई हथियार, संचार उपकरण, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद हुए हैं। इस सामग्री से साफ होता है कि नक्सली किसी बड़े हमले की तैयारी में थे या फिर वे अपने बचे हुए सदस्यों को फिर से संगठित करना चाहते थे। लेकिन सुरक्षा बलों ने उनकी इस योजना को समय रहते नाकाम कर दिया।

जंगल में नक्सली नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी

अधिकारियों का यह भी मानना है कि इस इलाके में अभी भी कुछ छोटे नक्सली समूह इधर-उधर फैले हो सकते हैं। यही वजह है कि स्थानीय पुलिस, सीआरपीएफ और विशेष बल मिलकर लगातार इलाके की घेराबंदी कर रहे हैं। ड्रोन निगरानी, जंगलों में पैदल गश्त और आसपास के गांवों में लगातार खोज अभियान जारी है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस बार का अभियान पहले से ज्यादा सख्त है और तब तक जारी रहेगा जब तक पूरे इलाके से नक्सली नेटवर्क पूरी तरह टूट नहीं जाता।

सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता

इस बीच, मुठभेड़ की घटनाओं पर एडीजी (इंटेलिजेंस) महेश चंद्र लड्ढा ने बताया कि पिछले दो दिनों में सफलता मिलने के पीछे लगातार चल रहा खुफिया काम, स्थानीय इनपुट और सुरक्षा बलों की तैयारी सबसे अहम रही। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश नक्सली मुठभेड़ सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं बल्कि नक्सलियों के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ है। लगातार कमज़ोर होते नक्सली संगठन अब बड़े हमलों की क्षमता खोते जा रहे हैं, और ये अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

नक्सलियों की पकड़ अब कमजोर – अभियान नहीं रुकेगा

सोमवार रात से लेकर बुधवार सुबह तक हुए इन अभियानों से सुरक्षा एजेंसियों को पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में मारेडुमिल्ली और आसपास के कई जंगल पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगे। अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि नक्सली अब इस क्षेत्र में दोबारा अपनी पकड़ नहीं बना पाएंगे, क्योंकि उनके बड़े नेताओं के मारे जाने के बाद संगठन में नेतृत्व का संकट बढ़ गया है।

आंध्र प्रदेश नक्सली मुठभेड़ ने नक्सल आंदोलन को दिया बड़ा झटका

अंत में, दो दिनों में हुई यह आंध्र प्रदेश नक्सली मुठभेड़ न केवल सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि है बल्कि नक्सल आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका भी है। मादवी हिडमा और जोखा राव जैसे बड़े नेताओं के मारे जाने से संगठन कमजोर हुआ है और उनकी योजनाएं विफल हो गई हैं। सुरक्षा बलों ने साफ कर दिया है कि यह अभियान तब तक नहीं रुकेगा जब तक पूरा मारेडुमिल्ली क्षेत्र नक्सली गतिविधियों से मुक्त नहीं हो जाता।https://www.newsonair.gov.in/hi/%E0%A4%86%E0

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