एक बार की बात है। एक हरे-भरे जंगल में एक छोटा-सा नन्हा खरगोश रहता था। उसका स्वभाव बहुत प्यारा था। वह हमेशा सबकी मदद करता और सबको हँसाता-खिलखिलाता। जंगल के कई जानवर उसे पसंद करते थे, लेकिन कुछ जानवर ऐसे भी थे जो सिर्फ अपने काम निकलवाने के लिए उससे दोस्ती दिखाते थे।Hindi Story for Kids
खरगोश हर किसी पर भरोसा कर लेता था। उसे लगता था कि जंगल में रहने वाले सारे जानवर उसके सच्चे दोस्त हैं। मगर असली दोस्त और झूठे दोस्त में फर्क वह समझ नहीं पाता था।
शेर की दहाड़ और घबराहट
एक दिन अचानक जंगल का शेर जोर-जोर से दहाड़ने लगा। शेर बहुत गुस्से में था क्योंकि कोई उसकी गुफा के पास से उसका खाना उठा ले गया था। उसकी दहाड़ सुनकर सारे जानवर डर गए और इधर-उधर भागने लगे। नन्हा खरगोश भी डर गया और सोचने लगा – “अब क्या करूँ? मुझे कौन बचाएगा?”Hindi Story for Kids
उसने सबसे पहले मोर से मदद माँगी। मोर बोला, “मुझे माफ कर दो दोस्त, मैं तो अपने पंख बचाने में ही व्यस्त हूँ।” खरगोश उदास हो गया। फिर उसने लोमड़ी से कहा, “क्या तुम मेरी मदद करोगी?” लेकिन लोमड़ी हँसते हुए बोली, “मुझे तो अपनी चालाकी से बचना आता है, तुम देख लो अपना रास्ता।”
खरगोश को अब समझ आने लगा कि जब मुसीबत आती है तो सब साथ छोड़ देते हैं।
असली दोस्त की पहचान Hindi Story for Kids
तभी अचानक उसकी नन्ही गिलहरी दोस्त भागती हुई आई। उसने खरगोश से कहा, “डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ।” गिलहरी ने पेड़ों की शाखाओं से रास्ता दिखाया और खरगोश को सुरक्षित जगह पर पहुँचा दिया।https://www.vedantu.com/stories/the-bunny-rabbit
खरगोश की आँखों में आँसू आ गए। वह बोला, “गिलहरी, तुम सचमुच मेरी सच्ची दोस्त हो। सबने मुझे छोड़ दिया, लेकिन तुम मेरे साथ खड़ी रही।”Hindi Story for Kids
गिलहरी मुस्कुराई और बोली, “दोस्ती का मतलब सिर्फ हँसी-मज़ाक नहीं होता। असली दोस्त वही है जो मुसीबत में साथ दे।”
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