Wednesday, February 4, 2026

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क्या Smart TV आपकी बातें सुन रहा है? सरकार की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता

आजकल हर घर में स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल बढ़ गया है। इंटरनेट और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के कारण लोग इसे सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कई दूसरे कामों में भी उपयोग करते हैं। लेकिन इसी बीच एक गंभीर खतरा सामने आया है। भारत सरकार के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने चेतावनी दी है कि गलत सेटिंग्स की वजह से आपका Smart TV आपकी निजी बातचीत सुन सकता है, उन्हें रिकॉर्ड कर सकता है और इंटरनेट से जुड़ते ही यह डेटा कंपनियों के सर्वर तक पहुंच सकता है। यानी जिस डिवाइस को आप मनोरंजन का साधन समझते हैं, वही आपकी जासूसी भी कर सकता है। इस चेतावनी के बाद यह जरूरी हो गया है कि लोग अपने स्मार्ट टीवी की प्राइवेसी सेटिंग्स को ठीक से जांचें और उन्हें सुरक्षित बनाएं।

स्मार्ट टीवी हमेशा ‘लिसनिंग मोड’ में क्यों रहता है?

आज के अधिकतर स्मार्ट टीवी में वॉइस रिकग्निशन तकनीक दी जाती है। यह फीचर टीवी को आपकी आवाज से कमांड समझने में मदद करता है। उदाहरण के लिए—आप कहते हैं “हे टीवी”, “ओके गूगल” या “ये चैनल लगाओ”, तो आपका टीवी तुरंत कमांड पहचान लेता है। इसी वजह से टीवी का माइक पूरे समय एक्टिव रहता है। लेकिन जब माइक लगातार चालू रहता है, तो टीवी सामान्य बातचीत, घर में होने वाली चर्चा और दूसरी आवाजें भी सुन सकता है। अगर टीवी इंटरनेट से जुड़ा है, तो यह ऑडियो डेटा बिना बताये कंपनी के क्लाउड सर्वर तक जा सकता है। इस डेटा का उपयोग कंपनियां विज्ञापन दिखाने, आपकी पसंद समझने और व्यवहार का विश्लेषण करने में कर सकती हैं। हालांकि, कई बार यूज़र्स को खुद भी नहीं पता होता कि उनका टीवी कब और क्या रिकॉर्ड कर रहा है।

कैमरा और फेस रिकग्निशन फीचर से बढ़ता प्राइवेसी खतरा

कुछ हाई-एंड स्मार्ट टीवी में कैमरा और फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी भी होती है। यह फीचर टीवी को आपके चेहरे, उम्र और जेंडर की पहचान करने में सक्षम बनाता है। इससे टीवी को पता चल जाता है कि कमरे में कौन बैठा है और कितने लोग मौजूद हैं। इसके आधार पर टीवी पर्सनलाइज्ड कंटेंट और विज्ञापन दिखा सकता है। लेकिन अगर प्राइवेसी सेटिंग्स ठीक नहीं हैं, तो कैमरा कमरे की गतिविधियां, बैठे हुए लोगों की जानकारी और देखने की आदतें तक ट्रैक कर सकता है। यह डेटा इंटरनेट के जरिए कंपनियों तक पहुंच सकता है, जिससे आपकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। कैमरा का हमेशा एक्टिव रहना सबसे बड़ा जोखिम इसलिए भी है, क्योंकि हैकर्स इसका दुरुपयोग कर सकते हैं और घर की व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंच सकते हैं।

IoT डिवाइस बढ़ने के साथ साइबर खतरे भी बढ़े

भारत में स्मार्ट टीवी की बिक्री लगातार बढ़ने के साथ-साथ IoT डिवाइसों पर साइबर हमलों के मामले भी बढ़ रहे हैं। स्मार्ट टीवी हैक होने पर माइक और कैमरा दोनों खतरे में आ जाते हैं, जिससे घर की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। गलत सेटिंग्स की वजह से आपकी निजी बातचीत इंटरनेट पर लीक हो सकती है, परिवार की लोकेशन का पता लगाया जा सकता है, आपकी दिनचर्या को ट्रैक किया जा सकता है और डिजिटल सेटअप तक हैकर पहुंच सकता है। इससे पहचान चोरी, बैंकिंग जोखिम और साइबर ठगी की आशंका भी बढ़ जाती है। कई लोग टीवी को सेटअप करते समय प्राइवेसी सेटिंग्स को बदलना भूल जाते हैं, जिससे टीवी डिफॉल्ट मोड पर चलता रहता है और अनावश्यक डेटा शेयर करता रहता है।

स्मार्ट टीवी आपकी हर गतिविधि क्यों ट्रैक करता है?

स्मार्ट टीवी सिर्फ कंटेंट दिखाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह कई बैकग्राउंड प्रोसेस भी चलाता है। टीवी यह जानने की कोशिश करता है कि आप कौन-सा शो कितनी देर देखते हैं, बीच में कितनी बार ब्रेक लेते हैं, कमरे में कितने लोग हैं और आप किस प्रकार की सामग्री पसंद करते हैं। यह सब डेटा टीवी को आपको बेहतर सुझाव देने में मदद करता है, लेकिन जब यह जानकारी आपके नियंत्रण से बाहर चली जाए, तो आपकी प्राइवेसी को गंभीर खतरा हो सकता है। कंपनियों के लिए यह डेटा बहुत कीमती होता है, क्योंकि इससे उन्हें टारगेटेड विज्ञापन और यूज़र बिहेवियर समझने में मदद मिलती है। इसीलिए सरकार बार-बार यह चेतावनी दे रही है कि यूज़र अपनी सुरक्षा खुद संभाले और अपने स्मार्ट टीवी की सेटिंग्स पर पूरा नियंत्रण रखे।

इन सेटिंग्स को बदलकर बढ़ाएं सुरक्षा

सरकार के I4C और Cyberdost ने स्मार्ट टीवी यूज़र्स को अपनी सुरक्षा के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सबसे पहले, जब भी आप स्मार्ट टीवी सेटअप करें, उसकी प्राइवेसी और सुरक्षा से जुड़ी सेटिंग्स जरूर चेक करें। कोशिश करें कि वॉइस रिकग्निशन फीचर तभी ऑन रखें जब वह जरूरी हो, बाकी समय उसे बंद रखें। इसी तरह टीवी में मौजूद माइक्रोफोन और कैमरा एक्सेस को भी ऑफ रखा जा सकता है, ताकि टीवी आपकी आवाज और गतिविधियां रिकॉर्ड न कर सके। इसके अलावा, टीवी में इंस्टॉल किए गए ऐप्स की परमिशन को भी जांचना जरूरी है। अनचाहे ऐप्स को हटाएं और किसी भी संदिग्ध या नकली ऐप को डाउनलोड न करें। लोकेशन सर्विस को हमेशा बंद रखें और टीवी को इंटरनेट से तभी कनेक्ट करें जब आवश्यकता हो। साथ ही टीवी के सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करते रहें, क्योंकि अपडेट सुरक्षा से जुड़े पैच लाते हैं।

साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?

अगर कभी आपके साथ या आपके किसी परिचित के साथ साइबर फ्रॉड हो जाए, तो बिल्कुल भी देर न करें। तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी ही जल्दी समाधान की संभावना बढ़ जाती है। डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ा हथियार है।

निष्कर्ष

स्मार्ट टीवी का इस्तेमाल करना गलत नहीं है, लेकिन उसकी सुरक्षा सेटिंग्स को नजरअंदाज करना बहुत बड़ी गलती हो सकती है। आज के डिजिटल समय में हर स्मार्ट डिवाइस सुविधा के साथ खतरा भी लाता है। इसलिए स्मार्ट टीवी खरीदने के साथ-साथ उसे सुरक्षित तरीके से उपयोग करना भी उतना ही जरूरी है। थोड़ी-सी जागरूकता और सही सेटिंग्स आपकी प्राइवेसी को सुरक्षित कर सकती हैं और घर की सुरक्षा बनाए रख सकती हैं। याद रखें—स्मार्ट टीवी रखें, लेकिन उसका स्मार्ट इस्तेमाल करें।https://www.money9live.com/tech/your-smart-tv-listening-to-your-conversations-check-your-privacy-settings-private-conversations

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