Garuda Purana हिंदू धर्म का वह ग्रंथ है जिसमें जीवन, मृत्यु और आत्मा की यात्रा को सबसे विस्तार से समझाया गया है। अक्सर किसी के निधन की खबर सुनकर मन में सवाल उठता है कि आखिर मृत्यु के बाद आत्मा के साथ क्या होता है? क्या आत्मा तुरंत यमलोक चली जाती है या उसके लिए कोई निश्चित समय बताया गया है? Garuda Purana में इस पूरी प्रक्रिया का बहुत गहराई से वर्णन मिलता है, जिसे जानकर मन में कई शंकाएँ दूर हो जाती हैं।
मृत्यु के बाद आत्मा की पहली अवस्था
Garuda Purana के अनुसार मृत्यु होने पर केवल शरीर का अंत होता है, लेकिन आत्मा कभी नहीं मरती। आत्मा के शरीर छोड़ते ही दो यमदूत उसके पास पहुंचते हैं। ये यमदूत आत्मा को उसके कर्मों के अनुसार मार्ग दिखाने के लिए आते हैं, दंड देने के लिए नहीं। जो मनुष्य अपने जीवन में सत्कर्म करता है, उसकी आत्मा को शरीर छोड़ते समय कष्ट नहीं होता। परंतु जिन लोगों ने बुरे कर्म किए हों, उनकी आत्मा को शरीर त्यागते समय पीड़ा का अनुभव होता है।
मृत्यु के बाद लगभग 24 घंटे तक आत्मा यमदूतों के साथ रहती है। इस दौरान आत्मा को उसके जीवन के पाप और पुण्य दिखाए जाते हैं। कहा जाता है कि इस समय आत्मा अपने जीवन की पूरी कहानी देख लेती है और समझ जाती है कि उसने क्या सही किया और क्या गलत।
घर में 13 दिन तक आत्मा की उपस्थिति
24 घंटे बाद यमदूत आत्मा को उसी स्थान पर छोड़ देते हैं, जहां उसने अंतिम सांस ली थी। Garuda Purana बताता है कि मृत्यु के बाद आत्मा 13 दिनों तक घर में ही रहती है। यही कारण है कि इस अवधि में परिवारजन पिंडदान, श्राद्ध और तेरहवीं जैसे संस्कार करते हैं।
इन दिनों में आत्मा अपने परिवार के हर भाव को महसूस करती है — उनका दुख, उनकी प्रार्थनाएँ, उनके द्वारा किए गए कर्म—सब आत्मा तक पहुंचता है। 13 दिनों की यह अवधि आत्मा के लिए अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है।
सूक्ष्म शरीर बनना कब शुरू होता है?
Garuda Purana के अनुसार आत्मा शरीर छोड़ते ही नया शरीर नहीं पाती। पहले 9 दिनों तक पिंडदान और जल तर्पण के माध्यम से आत्मा के लिए एक सूक्ष्म शरीर तैयार होता है। यह सूक्ष्म शरीर आत्मा की अगली यात्रा के लिए आवश्यक माना जाता है।
- 10वें दिन आत्मा को यात्रा करने की शक्ति मिलती है।
- 11वें और 12वें दिन सूक्ष्म शरीर में मांस, त्वचा और ऊर्जा का निर्माण माना जाता है।
- 13वें दिन विशेष पिंडदान से आत्मा को यमलोक की यात्रा प्रारंभ करने का बल मिलता है।
इसी कारण तेरहवीं संस्कार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
13वें दिन आत्मा यमलोक की ओर बढ़ती है
13 दिन पूरे होने के बाद आत्मा यमलोक की यात्रा शुरू करती है। यह यात्रा आसान है या कठिन—यह पूरी तरह आत्मा के कर्मों पर निर्भर करता है। अच्छे कर्म करने वालों की आत्मा को देवदूत मार्ग दिखाते हैं और यात्रा सरल होती है। लेकिन जिन्होंने जीवन में गलत कर्म किए हों, उनकी आत्मा को यमदूतों के साथ कठिन मार्ग से गुजरना पड़ता है।
इस यात्रा का उद्देश्य आत्मा को उसके कर्मों के अनुसार न्याय दिलाना है। यमराज के दरबार में आत्मा के पूरे जीवन का मूल्यांकन किया जाता है और उसके भविष्य का निर्णय उसी आधार पर होता है।
कर्मों का महत्व: Garuda Purana का मूल संदेश
Garuda Purana का मुख्य संदेश यही है कि मनुष्य चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसके कर्म ही उसकी आत्मा की यात्रा तय करते हैं। कोई भी व्यक्ति अपने कर्मों से बच नहीं सकता। अच्छे कर्म करने से आत्मा को शांति मिलती है और उसकी यात्रा सुखद होती है। वहीं बुरे कर्म करने से आत्मा को पीड़ा और कष्ट का सामना करना पड़ता है।
इसलिए हिंदू धर्म में हमेशा ये कहा गया है कि मनुष्य को अपने जीवन में सत्य, धर्म और अच्छे कर्मों का पालन करना चाहिए। मृत्यु निश्चित है, लेकिन आत्मा की यात्रा कैसी होगी—यह हमारे कर्मों पर पूरी तरह निर्भर करता है।
निष्कर्ष
Garuda Purana मृत्यु और मृत्यु के बाद की यात्रा को रहस्य नहीं बल्कि ज्ञान के रूप में प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक नया आरंभ है। आत्मा शरीर छोड़कर एक नई दिशा की ओर बढ़ती है और अपने कर्मों के आधार पर अपना भविष्य तय करती है।
इस ज्ञान को समझकर हम जीवन में अच्छे कर्म कर सकते हैं, दूसरों के प्रति दयालु हो सकते हैं और अपनी आत्मा को मोक्ष के मार्ग की ओर ले जा सकते हैं।
Disclaimer (डिस्क्लेमर)
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथ गरुड़ पुराण में वर्णित मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे किसी वैज्ञानिक तथ्य या चिकित्सकीय सलाह के रूप में न लें। धार्मिक आस्था और विश्वास व्यक्ति-व्यक्ति पर निर्भर करते हैं।https://www.jagran.com/spiritual/religion-garuda-purana-mrityu-know-what-happens
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