Friday, April 4, 2025

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चालाक खरगोश और भेड़िया – एक अधूरी प्रेम कहानी (chalak khargosh aur bhediya love story)

पहाड़ियों के बीच बसा एक छोटा सा गाँव, जहाँ हर शाम कोई न कोई कहानी जन्म लेती थी। वहीं रहता था अर्जुन—तेज दिमाग वाला लड़का, जो हमेशा हर मुश्किल से खुद को निकाल लेता था। उसकी इसी समझदारी के कारण लोग उसे “खरगोश” बुलाते थे। दूसरी ओर था कबीर—बलशाली, गुस्सैल और अपनी मनमानी करने वाला। उसकी चालबाजियां और दबदबा देखकर लोग उसे “भेड़िया” कहते थे।(romantic love story)

लेकिन इस बार, उनकी ज़िंदगी में एक ऐसा मोड़ आने वाला था, जिसने सब कुछ बदल दिया। गाँव में आई एक नई लड़की—रावी। उसकी मासूमियत और सौम्यता हर किसी को अपनी ओर खींच रही थी। अर्जुन और कबीर, दोनों ही उसके प्यार में डूबने लगे, पर एक के दिल में सच्चा प्यार था और दूसरे के मन में सिर्फ जीत की भूख।

पहली मुलाकात (romantic love story)

गाँव के मेले में रावी अकेली घूम रही थी जब कबीर ने उसे रोका।

“तुम यहाँ अकेली क्यों घूम रही हो?” उसने धीमी मगर असरदार आवाज़ में पूछा।

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रावी मुस्कुराई, “बस यूँ ही, मेला देखने आई थी।”

कबीर उसके करीब आया, “अकेले घूमना ठीक नहीं, कोई भी तुम्हें देख सकता है…”

रावी कुछ कह पाती, इससे पहले ही एक आवाज़ आई, “उसे किसी से डरने की जरूरत नहीं, और तुमसे तो बिलकुल भी नहीं।”

अर्जुन वहाँ खड़ा था, उसकी आँखों में हल्की शरारत थी। रावी ने राहत की सांस ली और उसी दिन से अर्जुन उसका सबसे अच्छा दोस्त बन गया। मगर कबीर को यह बात अंदर ही अंदर जलाने लगी।

प्यार की पहचान (hindi love story)

अर्जुन और रावी की दोस्ती दिन-ब-दिन गहरी होती गई। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदलने लगी। रावी को अर्जुन की शरारतें, उसकी हंसी, उसकी बातें—सब पसंद आने लगा। दूसरी ओर, कबीर की जलन और गुस्सा बढ़ता जा रहा था।

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एक दिन, कबीर ने अर्जुन को रास्ते में रोका।

“जो भी हो, जीत मेरी ही होगी,” उसने आँखों में क्रोध भरकर कहा।

अर्जुन मुस्कुराया, “प्यार कोई ट्रॉफी नहीं है, जिसे जीतने की कोशिश कर रहे हो।”

कबीर उसकी बात सुनकर और गुस्से में भर गया। उसने एक चाल चली—एक ऐसी चाल जो अर्जुन और रावी के रिश्ते को हमेशा के लिए बदल सकती थी।

धोखा या सच्चाई? (suspenseful story)

रात के अंधेरे में, रावी को कबीर का एक संदेश मिला, “अगर सच्चाई जाननी है, तो पुराने खंडहर में आकर देख लो।”

रावी वहाँ पहुँची और जो देखा, उसने उसका दिल तोड़ दिया। अर्जुन और कबीर एक साथ खड़े थे, और कबीर ठहाके लगा रहा था।

“अर्जुन ने शर्त लगाई थी कि वह तुम्हें एक महीने में प्यार में डाल देगा,” कबीर ने कहा।

रावी की आँखें आश्चर्य से फैल गईं। “यह सब झूठ है, ना?” उसकी आवाज़ कांप रही थी।

अर्जुन ने चुपचाप आँखें झुका लीं।

रावी का दिल टूट गया। “मुझे तुमसे नफरत हो गई है, अर्जुन,” उसने कहा और वहाँ से चली गई।

सच्चाई का पर्दाफाश (emotional love tale)

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कई दिन बीत गए। अर्जुन अकेला रह गया और रावी ने उससे दूरी बना ली। मगर एक दिन, उसे अर्जुन की डायरी मिली। उसमें लिखा था:

“मैं रावी से पहले दिन से ही प्यार करता था। कबीर ने शर्त लगाई थी कि कोई भी लड़की सिर्फ एक महीने में प्यार में डाली जा सकती है। लेकिन मैं इस शर्त से कब का बाहर निकल चुका था, क्योंकि रावी के साथ बिताए हर पल ने मुझे सच्चे प्यार का एहसास कराया था।”

रावी की आँखों में आँसू आ गए। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और बिना समय गँवाए वह अर्जुन से मिलने दौड़ी।

प्यार की जीत (chalak khargosh aur bhediya)

अर्जुन तालाब के किनारे अकेला बैठा था, जब रावी उसके सामने आई।

“अर्जुन…” उसने धीरे से कहा।

अर्जुन ने ऊपर देखा, पर कुछ नहीं बोला।

रावी ने उसका हाथ थाम लिया, “मुझे माफ कर दो। मुझे देर से समझ आया कि सच्चा प्यार शर्तों का मोहताज नहीं होता।”

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अर्जुन की आँखों में आँसू आ गए, और उसने उसे अपनी बाहों में भर लिया।

दूर, एक पेड़ के पीछे से कबीर यह सब देख रहा था—एक हारा हुआ भेड़िया, जिसे एक चालाक खरगोश ने हरा दिया था।

अंत (best Hindi love story)

प्यार कोई खेल नहीं, यह एक एहसास है। जो इसे खेल समझते हैं, वे हमेशा हार जाते हैं। और जो इसे सच्चे दिल से निभाते हैं, उनका प्यार हमेशा जीत जाता है।

अर्जुन और रावी की प्रेम कहानी (hindi love story) एक मिसाल बन गई—एक चालाक खरगोश की, जिसने भेड़िए को हराकर अपना सच्चा प्यार जीत लिया।https://www.hindi-kahani.in/2020/02/panchtantra-kahaniya-panchtantra-story-in-hindi.html

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