आज की बदलती दुनिया में हर कोई चाहता है कि उसकी सोशल स्किल्स इतनी मजबूत हों कि लोग उसे आसानी से समझ सकें और वह भी दूसरों से आत्मविश्वास के साथ बात कर सके। लेकिन Language Global Review Report ने एक चौंकाने वाला सच सामने रखा है। इस रिपोर्ट के अनुसार आज के समय में सबसे तेजी से महत्व बढ़ाने वाली सामाजिक क्षमता bilingual social skills है। यह स्किल किसी व्यक्ति को न केवल सामाजिक रूप से बेहतर बनाती है बल्कि उसकी सोचने, समझने और सीखने की क्षमता को भी कई गुना बढ़ा देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब दुनिया में सफलता का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति दो भाषाओं में कितनी सहजता से बात कर सकता है।
बाइलिंगुअल यानी दो भाषाओं को जानने और उपयोग करने वाले लोगों में एक खास तरह की मानसिक चुस्ती होती है। वे जरूरत पड़ने पर किसी भी माहौल में जल्दी ढल जाते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि bilingual social skills रखने वाले लोगों की मेमोरी बहुत तेज होती है, उनकी एकाग्रता बेहतर होती है और वे विभिन्न कल्चर्स को समझने में अधिक संवेदनशील होते हैं। यही कारण है कि आज कई देशों में बच्चों को छोटी उम्र से ही दो भाषाएं सीखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि उनका मानसिक विकास मजबूत हो और वे सामाजिक रूप से अधिक आत्मविश्वासी बन सकें।
भारत जैसे देशों को इस मामले में प्राकृतिक बढ़त हासिल है, क्योंकि यहां एक ही परिवार में कई भाषाओं का उपयोग आम है। घर पर क्षेत्रीय भाषा, बाहर हिंदी और पढ़ाई या नौकरी के लिए इंग्लिश का उपयोग करते हुए बच्चे बड़े होते हैं। इस तरह बचपन से ही दिमाग दो या तीन भाषाओं को संभालना सीख लेता है, जिससे bilingual social skills अपने-आप विकसित हो जाती हैं। भारत में 19,500 से ज्यादा भाषाएं और बोलियां बोली जाती हैं, इसी वजह से देश दुनिया की सबसे बड़ी द्विभाषी आबादी में शामिल है।
रिपोर्ट बताती है कि टेक्नोलॉजी, कस्टमर सपोर्ट, मीडिया, इंटरनेशनल सेल्स और ट्रैवल सेक्टर में ऐसी कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो कई भाषाएं बोलने वाले युवाओं को प्राथमिकता देती हैं। ऐसे कर्मचारी क्लाइंट्स से बेहतर तरीके से बात कर लेते हैं, किसी भी संस्कृति को जल्दी समझ लेते हैं और भाषा की वजह से होने वाली गलतफहमियों को कम कर देते हैं। इसी कारण भारतीय प्रोफेशनल्स की विदेशों में डिमांड लगातार बढ़ रही है, क्योंकि उनमें स्वाभाविक रूप से bilingual social skills बहुत मजबूत मिलती हैं।
रिपोर्ट में यह जानकारी भी सामने आई है कि यूनाइटेड स्टेट्स में bilingual social skills तेजी से बढ़ रही हैं। इसका बड़ा कारण है वहां की बड़ी प्रवासी आबादी। कई घरों में बच्चे स्पैनिश बोलते हैं और स्कूल या सार्वजनिक स्थानों पर इंग्लिश का उपयोग करते हैं। इस माहौल में बच्चे खुद-ब-खुद bilingual social skills विकसित कर लेते हैं। न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स और ह्यूस्टन जैसे शहरों में स्कूल छात्रों को अंग्रेजी के साथ उनकी अपनी भाषा भी मजबूत करने के लिए डुअल-लैंग्वेज प्रोग्राम चला रहे हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि ऐसे बच्चे प्रॉब्लम सॉल्विंग में बेहतर होते हैं, उनकी कल्चरल समझ अधिक होती है और वे सामाजिक वातावरण में कहीं अधिक प्रभावी साबित होते हैं।
यूरोप के कई देश बाइलिंगुअल एजुकेशन को बहुत महत्व देते हैं। नीदरलैंड्स, जर्मनी, डेनमार्क और स्वीडन जैसे देशों में बच्चों को शुरुआती क्लास से ही इंग्लिश के साथ उनकी स्थानीय भाषा सिखाई जाती है। वहां के लोग रोजमर्रा की बातचीत, दफ्तर और यूनिवर्सिटी में आसानी से दोनों भाषाओं के बीच स्विच कर लेते हैं। लक्जमबर्ग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां बच्चे स्कूल में तीन भाषाएं—लक्जमबर्गिश, फ्रेंच और जर्मन—सीखते हैं। इसी कारण यह देश दुनिया के सबसे ज्यादा मल्टीलिंगुअल देशों में शामिल है।
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह बताता है कि bilingual social skills अब केवल सांस्कृतिक आदत नहीं रही, बल्कि यह शिक्षा, नौकरी और कम्युनिकेशन को आकार देने वाली ग्लोबल स्किल बन गई है। दो भाषाएं जानने वाले लोग बातचीत में अधिक साफ होते हैं, तनाव की स्थिति में बेहतर निर्णय लेते हैं और किसी भी नए माहौल में जल्दी सामंजस्य बैठा लेते हैं। उनकी सोच खुली होती है और वे विविधता को अधिक आसानी से स्वीकार करते हैं। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में bilingual social skills को सबसे आवश्यक सोशल स्किल माना जा रहा है।
जब कोई व्यक्ति दो भाषाओं को समझता है, तो उसका नजरिया भी बड़ा हो जाता है। वह विभिन्न पृष्ठभूमि और संस्कृतियों के लोगों से अधिक सहजता से जुड़ता है। इस वजह से उसकी सोशल लाइफ मजबूत होती है, रिश्ते बेहतर बनते हैं और वह समाज में अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रख पाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि bilingual social skills वाले लोग नौकरी, बिज़नेस और पर्सनल लाइफ में दूसरों की तुलना में अधिक सफल होते हैं, क्योंकि वे हर स्थिति में लोगों को समझने और संवाद करने में सक्षम रहते हैं।
Language Global Review Report साफ तौर पर कहती है कि भविष्य उन्हीं लोगों का है जिनके पास मजबूत bilingual social skills होंगी। ये स्किल्स न केवल दिमाग की क्षमता बढ़ाती हैं, बल्कि किसी व्यक्ति की सामाजिक और पेशेवर पहचान को भी मजबूत बनाती हैं। अब समय है कि हम भाषा सीखने को केवल पढ़ाई न समझें, बल्कि इसे अपनी पर्सनालिटी और करियर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा मानें। दो भाषाएं जानना केवल एक ज्ञान नहीं, बल्कि आधुनिक दुनिया में आगे बढ़ने का एक सशक्त साधन बन चुका है।https://www.mywellnesshub.in/blog/10-reasons-why-social-skills-matter-for-kids/
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