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देश की अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव: Gold Import बढ़ने से तीन महीने में कितना बिगड़ा हाल?

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक ऐसी समस्या का सामना कर रही है, जिसकी उम्मीद न सरकार को थी और न ही अर्थशास्त्रियों को। सोना एक बार फिर अपने उच्चतम स्तर के करीब पहुंच चुका है और विदेशी बाजारों में इसकी कीमतों में उछाल के साथ भारत में Gold Import बहुत तेज़ी से बढ़ा है। चीन, यूरोप और कई बड़े देशों की तरह भारत का केंद्रीय बैंक भी बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहा है। इस बढ़ती खरीद का असर अब देश के करंट अकाउंट डेफिसिट पर साफ दिखाई देने लगा है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि Gold Import इतनी तेज़ी से बढ़ा है कि इसने देश की आर्थिक सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

करंट अकाउंट डेफिसिट में अप्रत्याशित बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) अचानक काफी बढ़ गया। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार CAD अब 12.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो कि देश की जीडीपी का 1.3 प्रतिशत है। पिछले तिमाही में यह केवल 0.3 प्रतिशत था, इसलिए इस अचानक उछाल ने सभी को चौंका दिया है। सर्विस सेक्टर से मजबूत आय और विदेशों से बढ़े रेमिटेंस होने के बावजूद व्यापार घाटे में जितनी तेजी आई, उससे CAD को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। मुख्य वजह स्पष्ट है— Gold Import में भारी उछाल।

Gold Import से बढ़ा व्यापार घाटा

क्रिसिल, ICICI बैंक रिसर्च और एमके ग्लोबल के विश्लेषण के अनुसार इस तिमाही में Gold Import लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 19 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। यह वृद्धि इतनी बड़ी है कि इसने देश के कुल वस्तु व्यापार घाटे को और बढ़ा दिया। इसके साथ ही अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से भारतीय निर्यात और गिर गया। इस तिमाही में कुल निर्यात 109 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि आयात बढ़कर 197 अरब अमेरिकी डॉलर के करीब पहुंच गया। ऐसी स्थिति में CAD का बढ़ना स्वाभाविक था, और इसमें Gold Import की भूमिका सबसे बड़ी रही।

सर्विस सेक्टर ने दी कुछ राहत, पर असर कम

आईटी, बिज़नेस सेवाओं और रेमिटेंस ने इस तिमाही में देश को कुछ राहत दी। सर्विस एक्सपोर्ट में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली और क्रिसिल के अनुसार कुल रिसिप्ट 101.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ गईं। प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी गई रकम भी 36 से 39 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में कुछ सकारात्मक प्रभाव पड़ा। लेकिन Gold Import में इतनी तेज़ी से बढ़े खर्च के सामने यह राहत काफी छोटी साबित हुई और घाटा कम नहीं हो पाया।

कैपिटल अकाउंट सरप्लस में भारी गिरावट

कैपिटल अकाउंट भी इस बार निराशाजनक रहा। पिछली तिमाही में 8 अरब डॉलर का सरप्लस दर्ज किया गया था, लेकिन इस तिमाही में यह मात्र 0.6 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। एमके ग्लोबल का कहना है कि एफडीआई और एफपीआई दोनों में गिरावट आई है और विदेशी निवेशक लगातार मुनाफावसूली कर रहे हैं। लोन डिस्ट्रीब्यूशन और बाहरी सहायता में कमी होने से पूंजी प्रवाह और कमजोर हो गया। इन सभी कारणों से पेमेंट बैलेंस 11 अरब अमेरिकी डॉलर के घाटे में चला गया और भारत के forex reserves में लगभग 10.9 अरब अमेरिकी डॉलर की गिरावट आ गई।

आगे भी बढ़ सकता है आर्थिक दबाव

एमके ग्लोबल ने वित्त वर्ष 2026 के लिए CAD बढ़ने का अनुमान पहले से अधिक कर दिया है। उनका कहना है कि पूरे वित्त वर्ष में निर्यात वृद्धि नकारात्मक रह सकती है और नॉन-ऑयल आयात में वृद्धि जारी रह सकती है, जिसमें Gold Import मुख्य कारण रहेगा। अनुमान है कि इस पूरे साल में सोने का आयात लगभग 22% बढ़ सकता है, जिससे CAD पर और दबाव बनता रहेगा। हालांकि सर्विसेज सेक्टर और रेमिटेंस कुछ राहत देंगे, लेकिन विदेशी पूंजी प्रवाह में अस्थिरता बनी रहेगी।

रुपये पर बढ़ता दबाव और आगे की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारतीय रुपये की कमजोरी बरकरार रह सकती है। उच्च टैरिफ, ग्लोबल अनिश्चितता और घरेलू मांग की मजबूती के कारण बाहरी संतुलन पर दबाव बना रहेगा। एमके ग्लोबल का अनुमान है कि वित्त वर्ष के अंत तक डॉलर-रुपया दर 88 से 91 के बीच रह सकती है। क्रिसिल और आईसीआईसीआई बैंक भी इसी तरह के संकेत दे रहे हैं। उनके अनुसार जब तक Gold Import नियंत्रित नहीं होता और विदेशी निवेश वापस नहीं बढ़ता, तब तक रुपये पर दबाव बना रहेगा।

Gold Import पर नियंत्रण ही सबसे बड़ा समाधान

देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि सोने के आयात को नियंत्रित करना अत्यंत ज़रूरी है। भारत में लोग सोने को सुरक्षित निवेश मानकर खरीदते हैं, लेकिन बढ़ता Gold Import विदेशी मुद्रा को तेजी से बाहर ले जाता है और सरकार का आयात बिल बढ़ाता है। सरकार यदि गोल्ड बॉन्ड, डिजिटल गोल्ड और अन्य विकल्पों को बढ़ावा दे, तो Gold Import में कुछ कमी आ सकती है। इसके साथ ही निर्यात बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए भी मजबूत नीतियों की जरूरत है।

समग्र रूप से देखा जाए तो भारत की आर्थिक सेहत पर इस समय सबसे बड़ा दबाव Gold Import की वजह से है। यदि आने वाले समय में इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखा गया, तो करंट अकाउंट डेफिसिट और पेमेंट बैलेंस दोनों पर गंभीर असर जारी रह सकता है। इसलिए सरकार और आर्थिक संस्थानों को मिलकर ऐसी रणनीतियां बनानी होंगी, जो सोने के आयात को घटाएं और विदेशी मुद्रा को सुरक्षित रखें।https://www.udaipurvocals.com/news/business/india/gold-is-harming-the-health-of-the-country-how-much-has-the-government-deficit-increased-in-three/

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Jiya lal verma

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