Tuesday, February 24, 2026

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AI Education in School 2027: 2027 से स्कूलों में लागू होगा नया AI पाठ्यक्रम, NCERT तैयार कर रही नई रूपरेखा

भारत की स्कूली शिक्षा अब धीरे-धीरे भविष्य की जरूरतों के अनुसार बदली जा रही है। जिस तरह से तकनीक हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए सरकार ने स्कूलों में AI Education in School को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल बड़े शहरों या तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में बच्चों को स्कूल के स्तर पर ही इस विषय की जानकारी देना जरूरी माना जा रहा है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से यह तय किया गया है कि वर्ष 2027-28 के शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में AI का नया और अपडेटेड सिलेबस लागू किया जाएगा। इसका मकसद छात्रों को केवल थ्योरी नहीं, बल्कि तकनीक की व्यवहारिक समझ देना है, ताकि वे बदलते समय के साथ खुद को ढाल सकें।

क्यों जरूरी हो गया है AI Education in School?

आज का युग डिजिटल युग है। ऑनलाइन पढ़ाई, मोबाइल एप, स्मार्ट मशीनें, ऑटोमेटेड सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित सेवाएं अब रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी हैं। ऐसे माहौल में अगर छात्रों को शुरुआत से ही तकनीक की बुनियादी जानकारी मिलती है, तो उनके लिए आगे की पढ़ाई आसान हो जाती है।

AI Education in School का उद्देश्य बच्चों में नई सोच विकसित करना है। इसके जरिए छात्र समस्याओं को अलग नजरिए से देखना सीखते हैं, लॉजिकल थिंकिंग बढ़ती है और तकनीक को समझने की क्षमता विकसित होती है। यह सब भविष्य में उन्हें बेहतर करियर विकल्प चुनने में मदद करता है।

2027 से 11वीं और 12वीं के लिए बदला हुआ AI सिलेबस

फिलहाल स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा तक AI विषय के रूप में पढ़ाया जा रहा है। यह व्यवस्था 2026-27 तक जारी रहेगी। इसके बाद 2027-28 से 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए विशेष रूप से नया AI पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।

इस नए सिलेबस में मौजूदा तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विषयों को शामिल किया जाएगा। छात्रों को यह समझाया जाएगा कि AI का उपयोग कहां-कहां हो रहा है और भविष्य में इसके क्या अवसर हैं। इसका फायदा यह होगा कि बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र तकनीकी रूप से ज्यादा जागरूक होंगे और आगे की पढ़ाई के लिए बेहतर रूप से तैयार रहेंगे।

NCERT की 16 सदस्यीय समिति तैयार कर रही सिलेबस

AI Education in School के नए पाठ्यक्रम की जिम्मेदारी NCERT को सौंपी गई है। इसके लिए 16 सदस्यों की एक विशेष समिति बनाई गई है, जिसमें शिक्षा और तकनीक से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। यह समिति नए सिलेबस की रूपरेखा तैयार कर रही है।

इस टीम का उद्देश्य ऐसा पाठ्यक्रम बनाना है जो छात्रों के लिए समझने में आसान हो और साथ ही तकनीकी दृष्टि से उपयोगी भी हो। माना जा रहा है कि जल्द ही इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा, ताकि समय रहते इसे लागू किया जा सके।

2026 से कक्षा 3 से 8 तक AI की शुरुआती पढ़ाई

सरकार का फोकस केवल सीनियर कक्षाओं तक सीमित नहीं है। 2026-27 से कक्षा 3 से 8वीं तक के छात्रों को भी AI से जुड़ी शुरुआती शिक्षा दी जाएगी। इस स्तर पर बच्चों को आसान भाषा में तकनीक की समझ दी जाएगी, ताकि वे डिजिटल दुनिया से परिचित हो सकें।

छोटे बच्चों को डिजिटल सेफ्टी, बेसिक लॉजिक, आसान टेक्नोलॉजी कॉन्सेप्ट और सही तरीके से तकनीक इस्तेमाल करने की जानकारी दी जाएगी। इससे उनकी रुचि बढ़ेगी और वे आगे चलकर नए विषयों को सीखने में ज्यादा सहज महसूस करेंगे।

छात्रों और शिक्षकों के लिए क्या बदलेगा?

AI Education in School लागू होने से छात्रों को आधुनिक शिक्षा का लाभ मिलेगा। उन्हें स्कूल स्तर पर ही तकनीक की समझ मिलने लगेगी, जिससे वे भविष्य के लिए खुद को तैयार कर सकेंगे।

शिक्षकों को भी नए सिलेबस के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे छात्रों को बेहतर तरीके से पढ़ा सकें। डिजिटल टूल्स और स्मार्ट क्लासरूम के जरिए पढ़ाई को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी।

तकनीकी रूप से मजबूत भारत की ओर कदम

स्कूलों में AI शिक्षा का विस्तार भारत को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जब देश के बच्चे नई तकनीक को शुरू से समझेंगे, तो आगे चलकर वे इनोवेशन और रिसर्च के क्षेत्र में बेहतर योगदान दे सकेंगे।

इस पहल से भविष्य में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और भारत तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत कर सकेगा।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, AI Education in School को बढ़ावा देने की यह योजना आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। 2026 से कक्षा 3 से AI की बुनियादी शिक्षा और 2027 से 11वीं-12वीं के लिए नया सिलेबस लागू होने से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारतीय छात्र तकनीकी रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनकर सामने आएंगे।

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