भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicle) का दौर तेजी से बढ़ रहा है। पहले लोग पेट्रोल और डीजल वाली गाड़ियों को ही प्राथमिकता देते थे, लेकिन अब समय बदल रहा है। प्रदूषण, बढ़ती ईंधन की कीमतें और सरकार की नीतियों ने लोगों को Electric Vehicle Registration की ओर आकर्षित किया है। यही कारण है कि भारत में फरवरी 2025 तक 56.75 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर हो जाएंगे। यह आंकड़ा दिखाता है कि भारत अब ई-मोबिलिटी की ओर बढ़ रहा है।
क्यों बढ़ रही है Electric Vehicle की डिमांड?
भारत जैसे देश में जहां हर साल लाखों नई गाड़ियां सड़क पर उतरती हैं, वहां ईंधन की खपत और प्रदूषण दोनों ही बड़ी चुनौतियां रही हैं। ऐसे में Electric Vehicle Registration में बढ़ोतरी होना एक सकारात्मक संकेत है।
लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर खींचने के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहला कारण है—ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतें। पेट्रोल और डीजल के दाम साल दर साल महंगे होते जा रहे हैं। इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहन चलाने का खर्च बेहद कम आता है। उदाहरण के तौर पर, एक इलेक्ट्रिक स्कूटर को चार्ज करने का खर्च मात्र 10 से 15 रुपये तक आता है, जबकि उतनी ही दूरी तय करने के लिए पेट्रोल स्कूटर में 80 से 100 रुपये लग सकते हैं। यही बड़ा फर्क लोगों को EV की ओर आकर्षित कर रहा है।
सरकारी नीतियों का असर
Electric Vehicle Registration में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण सरकार की योजनाएं और सब्सिडी भी हैं। केंद्र सरकार ने “FAME India Scheme” (Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles) जैसी योजनाओं के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और चार-व्हीलर पर सब्सिडी दी है। इससे लोगों को EV खरीदना पहले की तुलना में सस्ता और आसान हो गया है।
इसके अलावा, कई राज्य सरकारें भी इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ कर रही हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में EV नीति लागू की गई है। इन नीतियों का सीधा असर Electric Vehicle Registration पर पड़ा है और लोग बड़ी संख्या में ईवी खरीदने लगे हैं।
चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क का विस्तार
इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर रही है। लोग अक्सर यह सोचकर EV लेने से हिचकिचाते थे कि अगर बीच रास्ते में बैटरी खत्म हो गई तो क्या होगा? लेकिन अब सरकार और निजी कंपनियां तेजी से चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं।
फरवरी 2025 तक देशभर में हजारों पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं और आने वाले समय में यह संख्या कई गुना बढ़ने वाली है। मेट्रो शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक चार्जिंग प्वाइंट बनाए जा रहे हैं। इससे Electric Vehicle Registration को और बढ़ावा मिल रहा है क्योंकि अब लोग EV खरीदने के बाद चार्जिंग की समस्या से डर नहीं रहे हैं।
ई-टू-व्हीलर की बढ़ती बिक्री
अगर बिक्री के आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2025 में ई-टू-व्हीलर (Electric Two-Wheeler) की बिक्री में 21% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह साबित करता है कि भारत में सबसे ज्यादा मांग स्कूटर और बाइक सेगमेंट में है। युवाओं और मिडिल क्लास परिवारों के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर किफायती और बेहतर विकल्प बन चुके हैं।
सिर्फ शहरी इलाकों में ही नहीं, बल्कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग Electric Vehicle Registration करवा रहे हैं। कम खर्च और आसान रखरखाव की वजह से यह गाड़ियां छोटे शहरों और गांवों तक अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।
पर्यावरण के लिए फायदेमंद
आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण से जूझ रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। यहां बड़े शहरों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे में Electric Vehicle को अपनाना पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है।
इलेक्ट्रिक गाड़ियां धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) जैसी हानिकारक गैसें नहीं छोड़तीं। इसका सीधा मतलब है कि अगर ज्यादा से ज्यादा लोग EV का इस्तेमाल करेंगे तो प्रदूषण में कमी आएगी और हवा साफ होगी। यही कारण है कि सरकार भी लगातार Electric Vehicle Registration बढ़ाने पर जोर दे रही है।
EV सेक्टर में रोजगार और निवेश
Electric Vehicle Industry की तेजी से वृद्धि से लाखों नौकरी के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। बैटरी बनाने, चार्जिंग स्टेशन बनाने, मरम्मत करने और सेवा देने जैसे क्षेत्रों में रोजगार तेजी से बढ़ रहा है।
इसके अलावा, विदेशी और भारतीय कंपनियां भी इस सेक्टर में बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं। टाटा, महिंद्रा, ओला इलेक्ट्रिक, एथर एनर्जी और टीवीएस जैसी कंपनियां नए-नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं। इससे आने वाले वर्षों में Electric Vehicle Registration और तेजी से बढ़ेगा।
आने वाला समय कैसा होगा?
फरवरी 2025 तक 56.75 लाख से ज्यादा Electric Vehicle Registration होना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अभी सफर लंबा है। भारत सरकार ने 2030 तक एक बड़ा लक्ष्य रखा है कि देश की कुल गाड़ियों में कम से कम 30% गाड़ियां इलेक्ट्रिक हों। अगर यह लक्ष्य पूरा होता है तो भारत न केवल प्रदूषण घटाने में सफल होगा, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनेगा।
EV भविष्य में बैटरी और चार्जिंग स्पीड में सुधार से अधिक आकर्षक हो जाएगा। साथ ही, उत्पादन बढ़ने से कीमतें भी कम होंगी। ईवी आरक्षण पर इसका सीधा असर पड़ेगा और आने वाले वर्षों में यह संख्या करोड़ों तक बढ़ सकती है।https://www-zeebiz-com.translate.goog/automobile/news-india-has-5675-lakh-registered-evs-till-february-2025
निष्कर्ष
भारत में Electric Vehicle Registration तेजी से बढ़ रहा है और फरवरी 2025 तक 56.75 लाख ईवी पंजीकृत होना इसका सबसे बड़ा सबूत है। बढ़ती ईंधन कीमतें, सरकारी सब्सिडी, चार्जिंग स्टेशन का विस्तार और लोगों की जागरूकता—ये सभी कारण मिलकर EV क्रांति को गति दे रहे हैं।
यह बदलाव सिर्फ एक ट्रेंड नहीं है, बल्कि आने वाले कल की जरूरत है। प्रदूषण घटाने, पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण बचाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन ही भविष्य का सबसे मजबूत विकल्प साबित हो रहे हैं। भारत आने वाले सालों में ई-वाहनों की पंजीकृतता में विश्व लीडर बन सकता है।
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