उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा 10वीं की परीक्षा प्रणाली में एक अहम सुधार किया है। बोर्ड ने UP Board 10th Exam Rule Change के तहत विज्ञान और गृहविज्ञान विषयों में लंबे समय से चली आ रही आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। अब इन दोनों विषयों की प्रयोगात्मक परीक्षा स्कूलों की बजाय परिषद द्वारा आयोजित की जाएगी। यह बदलाव आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। इस फैसले से प्रदेश के लाखों हाईस्कूल विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारी और मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिलेगा।
पिछले कुछ वर्षों से यह महसूस किया जा रहा था कि प्रैक्टिकल विषयों में आंतरिक मूल्यांकन का तरीका हर स्कूल में अलग-अलग है। कहीं संसाधनों की कमी रहती है तो कहीं मूल्यांकन में एकरूपता नहीं होती। कई बार छात्रों और अभिभावकों की ओर से यह सवाल भी उठाए जाते थे कि क्या प्रयोगात्मक अंकों का सही आकलन हो पा रहा है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए UP Board 10th Exam Rule Change के जरिए बोर्ड ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने का निर्णय लिया है।
राज्यपाल की स्वीकृति के बाद नियमों में संशोधन
बोर्ड ने इस बदलाव का प्रस्ताव शासन को भेजा था। शासन स्तर पर विचार के बाद राज्यपाल ने इसे स्वीकृति दी। इसके बाद परिषद के नियमों में आवश्यक संशोधन किए गए और नई व्यवस्था को औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया। बोर्ड की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि अब हाईस्कूल स्तर पर विज्ञान और गृहविज्ञान की प्रयोगात्मक परीक्षा परिषद के नियंत्रण में होगी।
पहले जहां स्कूल अपने स्तर पर प्रैक्टिकल मूल्यांकन करते थे, अब यह जिम्मेदारी बोर्ड निभाएगा। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और सभी जिलों में एक समान नियम लागू होंगे। इससे छात्रों के बीच भेदभाव की संभावना भी कम होगी।
पहले कैसी थी प्रैक्टिकल की व्यवस्था?
पहले यूपी बोर्ड 10वीं में विज्ञान और गृहविज्ञान विषयों में प्रैक्टिकल कार्यों का मूल्यांकन स्कूलों द्वारा किया जाता था। इस मूल्यांकन को ग्रेड के रूप में अंकपत्र में दर्ज किया जाता था। आमतौर पर यह पांच प्वाइंट ग्रेडिंग सिस्टम पर आधारित होता था। हालांकि, इन ग्रेड्स का छात्रों के कुल अंकों पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता था।
इस व्यवस्था में एक बड़ी समस्या यह थी कि हर स्कूल में प्रयोगशाला सुविधाएं समान नहीं थीं। कुछ स्कूलों में संसाधन अच्छे थे, तो कुछ में प्रैक्टिकल कराना भी मुश्किल हो जाता था। इसके अलावा, मूल्यांकन के मानकों में भी अंतर देखने को मिलता था। यही वजह रही कि बोर्ड ने इस पूरी प्रक्रिया को बदलने का फैसला किया।
नई मूल्यांकन प्रणाली में क्या होगा खास?
UP Board 10th Exam Rule Change के अनुसार अब विज्ञान और गृहविज्ञान विषय में 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित की जाएगी और इसका मूल्यांकन भी बोर्ड स्तर पर किया जाएगा। इन अंकों को छात्रों के अंकपत्र और प्रमाणपत्र में शामिल किया जाएगा, जिससे प्रैक्टिकल का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत छात्रों को प्रयोगात्मक विषयों की तैयारी गंभीरता से करनी होगी। अब केवल थ्योरी पढ़कर अच्छे अंक लाना आसान नहीं होगा, बल्कि प्रयोगशाला में किए जाने वाले कार्यों की समझ भी जरूरी होगी। इससे छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान विकसित होने की उम्मीद की जा रही है।
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर रहेगा जोर
बोर्ड का मानना है कि प्रैक्टिकल परीक्षा परिषद स्तर पर होने से मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सभी छात्रों का आकलन एक ही मानक के आधार पर किया जाए। स्कूल स्तर पर होने वाली संभावित अनियमितताओं और पक्षपात की शिकायतों में भी कमी आएगी।
इस बदलाव से छात्रों में प्रतियोगी भावना भी विकसित होगी, क्योंकि अब सभी का मूल्यांकन एक समान तरीके से किया जाएगा। इससे मेधावी छात्रों को अपनी प्रतिभा साबित करने का बेहतर अवसर मिलेगा।
स्कूलों को दिए गए विशेष निर्देश
नई व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए बोर्ड ने स्कूलों को पहले से तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। विद्यालयों को अपनी प्रयोगशालाओं को सुव्यवस्थित रखने, आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने और छात्रों को नियमित रूप से प्रयोगात्मक अभ्यास कराने के लिए कहा गया है।
जिन स्कूलों में प्रयोगशाला की सुविधाएं कमजोर हैं, उन्हें समय रहते अपनी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की सलाह दी गई है। बोर्ड का उद्देश्य है कि परिषद द्वारा आयोजित प्रैक्टिकल परीक्षा के समय किसी भी छात्र को संसाधनों की कमी के कारण परेशानी न हो।
छात्रों और अभिभावकों के लिए क्या बदलेगा?
छात्रों के लिए यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब उनके प्रैक्टिकल के अंक सीधे बोर्ड द्वारा तय होंगे। इससे मेहनती छात्रों को उनका सही परिणाम मिल सकेगा। अभिभावकों के लिए भी यह राहत की बात है कि अब मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष होगी और किसी भी तरह की मनमानी की गुंजाइश कम रहेगी।
नई प्रणाली छात्रों को प्रयोगात्मक शिक्षा की ओर गंभीरता से ध्यान देने के लिए प्रेरित करेगी। विज्ञान और गृहविज्ञान जैसे विषयों में व्यावहारिक ज्ञान का महत्व बहुत अधिक होता है और अब इसका सीधा असर उनके परीक्षा परिणाम पर पड़ेगा।
अन्य विषयों की व्यवस्था पहले जैसी
यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यह बदलाव केवल विज्ञान और गृहविज्ञान विषयों के लिए लागू किया गया है। अन्य विषयों में आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्था फिलहाल पहले की तरह ही जारी रहेगी। बोर्ड भविष्य में अनुभव के आधार पर अन्य विषयों में भी सुधार करने पर विचार कर सकता है।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम
कुल मिलाकर, UP Board 10th Exam Rule Change उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे मूल्यांकन प्रणाली अधिक विश्वसनीय बनेगी और छात्रों को प्रयोगात्मक विषयों की वास्तविक समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में यह बदलाव शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकता है।
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