आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में हम अपने शरीर के छोटे-छोटे संकेतों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। खासकर जब पैरों में हल्की सूजन, चलने में दर्द या सीढ़ियाँ चढ़ते समय खिंचाव महसूस होता है, तो अधिकतर लोग इसे थकान या मौसम की वजह मानकर टाल देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि यही लक्षण एक गंभीर समस्या की शुरुआत हो सकते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में Peripheral Artery Disease कहा जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे नसों को नुकसान पहुँचाती है और अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसे बड़े खतरों में बदल सकती है।
हमारे शरीर की नसें एक-दूसरे से जुड़ी हुई होती हैं। जब पैरों की नसों में खराबी आती है तो इसका असर दिल तक पहुँचता है। इसी कारण डॉक्टर पैरों में आने वाले बदलावों को दिल की सेहत से जोड़कर देखते हैं। Peripheral Artery Disease को कई बार “दिल की बीमारी का साइलेंट सिग्नल” भी कहा जाता है क्योंकि यह बिना ज्यादा शोर मचाए शरीर के भीतर नुकसान करती रहती है।
पैरों में सूजन सिर्फ पैरों की समस्या नहीं
पैरों में सूजन या दर्द को लोग अक्सर ज्यादा खड़े रहने, थकान, या बढ़ती उम्र का असर मान लेते हैं। लेकिन असल में जब पैरों की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है, तो खून का रास्ता संकरा हो जाता है। इससे पैरों तक खून सही मात्रा में नहीं पहुँच पाता और सूजन, ऐंठन व दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। यही स्थिति आगे चलकर Peripheral Artery Disease का रूप ले लेती है।
समस्या यहीं नहीं रुकती। नसों में जमा यह गंदा पदार्थ शरीर की दूसरी धमनियों में भी फैल सकता है। इसी वजह से यह बीमारी दिल की नसों को भी प्रभावित करती है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देती है।
यह बीमारी शरीर के अंदर कैसे बढ़ती है
जब शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है तो वह नसों की दीवारों से चिपकने लगता है। समय के साथ यह परत मोटी और सख्त होती जाती है। नतीजा यह होता है कि नसें सिकुड़ जाती हैं और खून का बहाव बाधित होने लगता है। यही प्रक्रिया Peripheral Artery Disease की असली जड़ है।
शुरुआत में शरीर खुद इसकी भरपाई करने की कोशिश करता है, लेकिन जब ब्लॉकेज ज्यादा बढ़ जाता है तो लक्षण साफ नजर आने लगते हैं और व्यक्ति को रोजमर्रा के कामों में भी परेशानी महसूस होने लगती है।
वे संकेत जिन्हें कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए
इस बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं, इसलिए लोग इन्हें सामान्य मान लेते हैं:
पैरों, टखनों या पंजों में सूजन
थोड़ी दूर चलने पर पैरों में दर्द या ऐंठन
पैरों में असामान्य ठंडक
पैरों का रंग नीला या बैंगनी पड़ जाना
पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन
त्वचा का रूखा और खुरदुरा हो जाना
नाखूनों का मोटा और पीला हो जाना
घाव का देर से भरना
ये सभी संकेत इस बात का इशारा करते हैं कि Peripheral Artery Disease धीरे-धीरे शरीर में घर बना रही है।
दिल और पैरों की नसों का गहरा रिश्ता
हृदय रोग विशेषज्ञ मानते हैं कि जिन लोगों में पैरों की नसों में ब्लॉकेज पाया जाता है, उनमें दिल की नसों में भी वही प्रक्रिया चल रही होती है। इसलिए Peripheral Artery Disease सिर्फ पैरों की बीमारी नहीं बल्कि पूरे हृदय तंत्र की चेतावनी है।
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और पहले से मौजूद हार्ट डिजीज वाले लोगों में इस बीमारी का खतरा कहीं ज्यादा होता है।
सर्दियों में जोखिम क्यों बढ़ जाता है
ठंड के मौसम में नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे खून का बहाव और धीमा हो जाता है। इस मौसम में शरीर में कोलेस्ट्रॉल भी तेजी से जमा होता है। इसी कारण Peripheral Artery Disease के मरीजों को सर्दियों में ज्यादा परेशानी होती है और हार्ट अटैक के मामले भी बढ़ जाते हैं।
कौन लोग ज्यादा सतर्क रहें
धूम्रपान करने वाले लोग
शारीरिक गतिविधि कम रखने वाले
मोटापे से जूझ रहे व्यक्ति
हाई बीपी और शुगर के मरीज
फास्ट फूड और तला-भुना अधिक खाने वाले
लगातार तनाव में रहने वाले लोग
इन सभी को Peripheral Artery Disease का खतरा अधिक रहता है।
समय पर जांच और इलाज का महत्व
अगर शुरुआती स्तर पर बीमारी पकड़ में आ जाए तो दवाओं और जीवनशैली सुधार से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। डॉक्टर ब्लड टेस्ट, डॉप्लर टेस्ट और अन्य जांचों से नसों की स्थिति समझते हैं। गंभीर मामलों में एंजियोप्लास्टी या सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।
बचाव: सबसे मजबूत सुरक्षा
रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज
संतुलित और ताजा भोजन
फैटी फूड और रेड मीट से दूरी
धूम्रपान और शराब से बचाव
वजन नियंत्रित रखना
ब्लड प्रेशर और शुगर पर नजर
मानसिक तनाव कम करना
इन आदतों से Peripheral Artery Disease के खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है।
निष्कर्ष
पैरों में आने वाला हर बदलाव शरीर की एक जरूरी चेतावनी हो सकता है। इसे नजरअंदाज करना दिल की सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। Peripheral Artery Disease धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बनाती है और आगे चलकर हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसे बड़े संकट में बदल सकती है। सही समय पर सावधानी और इलाज से इस खतरे को रोका जा सकता है।
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