Tuesday, February 3, 2026

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Top 5 Carmakers in India CY25 Consumer Sales: भारत की टॉप कार कंपनियों की पूरी रिपोर्ट

भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार का नया दौर

साल CY25 भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। इस वर्ष गाड़ियों की बिक्री में साफ तौर पर तेज़ी देखी गई, लेकिन अगर हम केवल रजिस्ट्रेशन या डिस्पैच नहीं बल्कि असल उपभोक्ता खरीद यानी Consumer Sales पर नज़र डालें, तो बाजार की असली तस्वीर सामने आती है। इसी विश्लेषण के आधार पर Top 5 Carmakers in India CY25 Consumer Sales की यह रिपोर्ट तैयार की गई है, जो बताती है कि भारत के ग्राहक किस ब्रांड पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रहे हैं और किस कंपनी की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर हो रही है।

इस पूरे साल बाजार में सबसे बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि भारतीय ग्राहक अब केवल सस्ती गाड़ी नहीं चाहते, बल्कि मजबूत बॉडी, ऊँची ड्राइविंग पोज़िशन, सेफ्टी फीचर्स और ब्रांड वैल्यू को पहले से कहीं ज्यादा महत्व दे रहे हैं। यही वजह है कि SUV सेगमेंट की मांग में ज़बरदस्त उछाल आया और इस बदलाव ने कंपनियों की स्थिति पूरी तरह बदल दी।

मारुति सुज़ुकी: बादशाहत बरकरार, लेकिन दबाव बढ़ा

मारुति सुज़ुकी वर्षों से भारत की नंबर-1 कार कंपनी बनी हुई है और CY25 में भी यह स्थान उसी के पास रहा। कंपनी ने इस वर्ष 17,86,226 गाड़ियाँ सीधे ग्राहकों को बेचीं, जिससे उसे कुल बाजार का 39.91 प्रतिशत हिस्सा मिला। हालाँकि CY24 में यह आंकड़ा 40.24 प्रतिशत था, यानी इस बार हिस्सेदारी में हल्की गिरावट देखी गई।

मारुति की ताकत उसका विशाल सर्विस नेटवर्क, किफायती मॉडल्स और भरोसेमंद ब्रांड इमेज है। इस साल कंपनी ने 22.55 लाख यूनिट का उत्पादन किया और 3.95 लाख यूनिट विदेशों में निर्यात कीं। फिर भी यह साफ दिखाई दे रहा है कि प्रतिस्पर्धा अब पहले से कहीं ज़्यादा कठिन हो गई है। ग्राहक अब नए विकल्पों को भी उतना ही महत्व दे रहे हैं।

महिंद्रा एंड महिंद्रा: सबसे तेज़ उभरती शक्ति

CY25 का सबसे बड़ा विजेता अगर कोई कंपनी बनी है तो वह महिंद्रा एंड महिंद्रा है। इस ब्रांड ने 5,92,771 यूनिट की Consumer Sales दर्ज कीं और उसका बाजार हिस्सा बढ़कर 13.25 प्रतिशत पहुँच गया, जो पिछले साल केवल 12.08 प्रतिशत था।

महिंद्रा की यह सफलता कोई संयोग नहीं है। Scorpio-N, XUV700 और Thar जैसी SUV की भारी मांग ने इस ब्रांड को युवाओं से लेकर फैमिली ग्राहकों तक हर वर्ग में लोकप्रिय बना दिया। कई मॉडलों पर महीनों की वेटिंग लिस्ट लगी रही, जो यह बताती है कि भारतीय ग्राहक अब ताकतवर और ऊँची गाड़ियों की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। कंपनी की कुल होलसेल डिस्पैच 6,25,603 यूनिट रही।

टाटा मोटर्स: बिक्री बढ़ी, पर मुकाबला कड़ा हुआ

टाटा मोटर्स ने CY25 में 5,67,607 यूनिट की बिक्री कर तीसरा स्थान हासिल किया। इसके बावजूद कंपनी का मार्केट शेयर घटकर 12.68 प्रतिशत रह गया, जबकि CY24 में यह 13.18 प्रतिशत था।

टाटा की बिक्री भले बढ़ी हो, लेकिन EV और कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण हिस्सेदारी पर दबाव पड़ा है। Nexon, Punch, Harrier और Tiago जैसी गाड़ियाँ अब भी ग्राहकों की पसंद बनी हुई हैं। कंपनी की कुल होलसेल 5,78,771 यूनिट रही, जो उसकी मजबूत उत्पादन क्षमता को दर्शाती है।

हुंडई मोटर इंडिया: पकड़ थोड़ी ढीली

CY25 में हुंडई ने 5,59,558 यूनिट की बिक्री की और उसका मार्केट शेयर घटकर 12.50 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल यह 13.76 प्रतिशत था। Creta अब भी हुंडई की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है, जिसकी होलसेल बिक्री 2 लाख से ज्यादा यूनिट रही। वहीं नई Venue को 55,000 से अधिक बुकिंग मिली।

इसके बावजूद कुछ सेगमेंट्स में पुराने मॉडल और नई कंपनियों की आक्रामक रणनीति ने हुंडई की रफ्तार को थोड़ा धीमा कर दिया है। कंपनी को अब नए प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम करने की जरूरत है।

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर: शांत लेकिन मजबूत प्रगति

टोयोटा ने इस साल 3,20,703 यूनिट की बिक्री दर्ज की और उसका मार्केट शेयर बढ़कर 7.17 प्रतिशत हो गया, जो पिछले साल 6.39 प्रतिशत था। Innova, Hycross और Fortuner की लगातार मजबूत मांग और मारुति के साथ साझेदारी में बने मॉडल्स ने टोयोटा को स्थिर बढ़त दी।

टोयोटा की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता और लंबे समय तक टिकने वाली गाड़ियाँ हैं, जिस पर ग्राहक पूरा भरोसा करते हैं।

बाजार का बदलता मिज़ाज

पूरी रिपोर्ट यह साफ बताती है कि Top 5 Carmakers in India CY25 Consumer Sales में जो बदलाव हुए हैं, वे भारतीय ग्राहकों की बदलती सोच का परिणाम हैं। अब ग्राहक सिर्फ कीमत नहीं देखते, बल्कि सुरक्षा, आराम, स्टाइल, मजबूती और ब्रांड भरोसे को बराबर महत्व देते हैं। SUV सेगमेंट की जबरदस्त ग्रोथ इसका सबसे बड़ा सबूत है।

भविष्य की दिशा

आने वाले वर्षों में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार और भी तेजी से बदलेगा। EV सेगमेंट बढ़ेगा, लेकिन पेट्रोल-डीज़ल गाड़ियों की माँग भी अभी लंबे समय तक बनी रहेगी। जो कंपनियाँ ग्राहकों की जरूरतों को सही समय पर समझेंगी और तकनीक में आगे रहेंगी, वही इस दौड़ में सबसे आगे निकलेंगी।

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