Wednesday, February 4, 2026

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Indian Rupee में RBI के कदमों से लौटी मजबूती, तीसरे दिन भी मुद्रा बाजार में दिखी तेजी

RBI की सख्ती से बदला बाजार का मूड

भारतीय मुद्रा बाजार में बीते कुछ दिनों से जो हलचल चल रही थी, उसमें अब थोड़ा सुकून देखने को मिल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के समय पर उठाए गए कदमों के कारण Indian Rupee ने लगातार तीसरे दिन मजबूती दर्ज की है। कुछ समय पहले तक जिस रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ था और जो ऐतिहासिक निचले स्तर तक फिसल गया था, वही अब धीरे-धीरे संभलता नजर आ रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपये की यह रिकवरी बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मजबूती अचानक नहीं आई है, बल्कि इसके पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण काम कर रहे हैं।

पिछले हफ्तों में डॉलर के मुकाबले Indian Rupee में तेज गिरावट देखी गई थी। पहली बार रुपया 91 के पार चला गया, जिससे आयात महंगा होने की चिंता बढ़ गई थी। आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक सभी इस गिरावट से परेशान थे। लेकिन जैसे ही RBI ने बाजार में हस्तक्षेप बढ़ाया, डॉलर की सप्लाई को संतुलित किया और अस्थिरता को रोकने की कोशिश की, वैसे ही हालात बदलने लगे। इसका असर यह हुआ कि रुपये ने लगातार तीन कारोबारी दिनों में मजबूती दिखाई और अपने रिकॉर्ड लो से करीब 1.25 फीसदी तक सुधर गया।

शुरुआती कारोबार में दिखी रुपये की ताकत

शुक्रवार को जब विदेशी मुद्रा बाजार खुला, तो Indian Rupee ने मजबूत शुरुआत की। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 90.19 पर खुला और थोड़ी ही देर में 89.96 के स्तर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव से लगभग 24 पैसे की मजबूती को दर्शाता है। इससे एक दिन पहले गुरुवार को भी रुपया 18 पैसे मजबूत होकर 90.20 पर बंद हुआ था। यानी साफ तौर पर देखा जाए तो तीन दिनों में रुपये ने लगातार बढ़त दर्ज की है, जिसे बाजार की भाषा में मजबूती की हैट्रिक कहा जा सकता है।

मंगलवार को हालात बिल्कुल उलट थे, जब रुपया अपने अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया था। उस दिन पहली बार डॉलर के मुकाबले इसका स्तर 91 से नीचे चला गया था। उस समय बाजार में घबराहट का माहौल था। लेकिन RBI की सक्रिय भूमिका के बाद निवेशकों और कारोबारियों का भरोसा धीरे-धीरे लौटने लगा, जिसका असर Indian Rupee की चाल में साफ नजर आया।

RBI के हस्तक्षेप से थमी गिरावट

मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि रुपये की इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा हाथ RBI का है। जब डॉलर की मांग अचानक बढ़ी और रुपया तेजी से गिरने लगा, तब केंद्रीय बैंक ने बाजार में उतरकर स्थिति को संभालने की कोशिश की। RBI ने साफ संकेत दिया कि वह रुपये को अनियंत्रित तरीके से कमजोर नहीं होने देगा। इस कदम से सट्टेबाजों की गतिविधियों पर भी असर पड़ा और अनावश्यक दबाव कम हुआ।

फॉरेन करेंसी से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जब बाजार को यह भरोसा होता है कि केंद्रीय बैंक सतर्क है, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ता है। यही वजह है कि Indian Rupee में हालिया सुधार देखने को मिला। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह मजबूती पूरी तरह स्थायी नहीं कही जा सकती और आगे चलकर उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों से मिला सहारा

रुपये को मजबूती मिलने की एक और बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें सीधे Indian Rupee को प्रभावित करती हैं। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं और फिलहाल यह करीब 59 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं।

जब कच्चा तेल सस्ता होता है, तो भारत का आयात बिल कम होता है। इससे डॉलर की मांग घटती है और रुपये पर दबाव कम पड़ता है। यही कारण है कि तेल की कीमतों में नरमी ने भी रुपये को सहारा दिया है। बाजार के जानकार मानते हैं कि अगर आने वाले समय में तेल की कीमतें इसी दायरे में बनी रहती हैं, तो Indian Rupee को और राहत मिल सकती है।

विदेशी निवेशकों की वापसी से बढ़ा भरोसा

विदेशी निवेशकों की ओर से दोबारा खरीदारी शुरू होना भी रुपये के लिए सकारात्मक संकेत है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में निवेश बढ़ाया है। सिर्फ एक दिन में ही एफआईआई ने करीब 595 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। जब विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगाते हैं, तो वे डॉलर बेचकर रुपये खरीदते हैं। इससे Indian Rupee की मांग बढ़ती है और इसकी कीमत मजबूत होती है।

शेयर बाजार में आई तेजी भी इसी का संकेत है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जिससे बाजार का माहौल सकारात्मक बना। निवेशकों को यह भरोसा मिला कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अभी भी दम है और लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावनाएं बनी हुई हैं।

आगे भी रह सकता है उतार-चढ़ाव

हालांकि मौजूदा हालात में रुपये को लेकर राहत जरूर है, लेकिन खतरे पूरी तरह टले नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में Indian Rupee में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। इसके अलावा अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता भी बाजार पर असर डाल रही है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में सट्टेबाजों की गतिविधियां कम हुई हैं, जिससे डॉलर की खरीदारी में थोड़ी गिरावट आई है। लेकिन दिन के दौरान बाजार में तेज हलचल देखी जा सकती है। उनका मानना है कि फिलहाल रुपया 90 से 90.50 के दायरे में बना रह सकता है।

सरकार और विशेषज्ञों का नजरिया

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने भी रुपये को लेकर चिंता की बात से इनकार किया है। उनके अनुसार, जब कोई देश तेज आर्थिक विकास के दौर में होता है, तो उसकी मुद्रा पर दबाव आना सामान्य बात है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि चीन और जापान जैसे देशों ने भी अपने विकास काल में कमजोर मुद्रा का अनुभव किया है।

उनका कहना है कि 1990 के दशक के बाद से भारत ने Indian Rupee को काफी हद तक बाजार के हिसाब से चलने दिया है। RBI का काम केवल अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है, न कि किसी एक स्तर को पकड़कर रखना। इसलिए मौजूदा कमजोरी को किसी बड़े आर्थिक संकट से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर देखा जाए तो Indian Rupee की हालिया मजबूती ने बाजार को राहत जरूर दी है। RBI की सक्रियता, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की वापसी ने मिलकर रुपये को सहारा दिया है। हालांकि आगे चलकर वैश्विक हालात और अमेरिकी नीतियों का असर बना रह सकता है। फिलहाल संकेत यही हैं कि स्थिति नियंत्रण में है और केंद्रीय बैंक बाजार पर करीबी नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में रुपये की चाल में हल्का उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन अभी के लिए बाजार में संतुलन लौटता नजर आ रहा है।https://hindi.business-standard.com/commodities/rupee-recovery-rbi-intervention-dollar-selling-breaks-fall-id-494072

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