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Gold vs Stock Market 2026: सोना या शेयर बाजार – अगले साल कहां बनेगी ज्यादा दौलत?

निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल

साल 2026 दस्तक देने वाला है और इसी के साथ निवेश से जुड़ी चर्चाएं भी तेज हो गई हैं. हर निवेशक यही जानना चाहता है कि आने वाला साल उसके पैसों के लिए कितना फायदेमंद रहेगा. कुछ लोग परंपरागत रूप से सोना-चांदी को सबसे सुरक्षित मानते हैं, जबकि कई निवेशक शेयर बाजार को लंबी अवधि में दौलत बनाने का सबसे मजबूत जरिया समझते हैं. ऐसे माहौल में Gold vs Stock Market 2026 की बहस अपने चरम पर है. इसी मुद्दे पर देश की जानी-मानी ब्रोकरेज फर्म कोटक सिक्योरिटीज ने अपना आउटलुक जारी किया है, जिसने निवेशकों का ध्यान खींचा है.

पिछले कुछ वर्षों का अनुभव बताता है कि बाजार अब पहले जैसा सीधा नहीं रहा. कभी अचानक तेजी तो कभी तेज गिरावट ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है. साल 2025 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. शेयर बाजार ने ऊंचे स्तर छुए, लेकिन आम निवेशकों को उतना फायदा नहीं मिल पाया, जितनी उम्मीद थी. वहीं दूसरी तरफ सोना और चांदी ने शानदार प्रदर्शन कर सबको चौंका दिया. यही वजह है कि 2026 को लेकर निवेशक पहले से ज्यादा सोच-समझकर फैसले लेना चाहते हैं.

शेयर बाजार का उतार-चढ़ाव और निवेशकों की परीक्षा

बीते साल शेयर बाजार कई चुनौतियों से गुजरा. रुपये में कमजोरी, वैश्विक टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को हिलाकर रख दिया. इसके बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह टूटा नहीं. सितंबर 2024 के ऊंचे स्तर से करीब 17 फीसदी की गिरावट के बाद भी निफ्टी 50 ने 2025 के आखिर तक नया रिकॉर्ड बना लिया. इस दौरान बड़े यानी लार्ज-कैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयर अपेक्षाकृत पीछे रह गए.

ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और मेटल सेक्टर ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई. इसके उलट आईटी और एफएमसीजी सेक्टर में सुस्ती देखने को मिली. खास बात यह रही कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों ने बाजार से भरोसा नहीं हटाया. SIP, म्यूचुअल फंड और डायरेक्ट निवेश के जरिए भारतीय निवेशक लगातार बाजार में पैसा लगाते रहे. इससे यह साफ हुआ कि भारत में इक्विटी निवेश को लेकर लंबी अवधि का भरोसा मजबूत बना हुआ है.

निफ्टी के आंकड़े क्या इशारा करते हैं

कोटक सिक्योरिटीज के मुताबिक आने वाले वर्षों में कंपनियों की कमाई बेहतर रहने की उम्मीद है. अनुमान है कि वित्त वर्ष 27 में निफ्टी की अर्निंग करीब 17 फीसदी से ज्यादा बढ़ सकती है और वित्त वर्ष 28 में भी दो अंकों की ग्रोथ बनी रह सकती है. अगर हालात सामान्य रहे तो दिसंबर 2026 तक निफ्टी करीब 29,000 के आसपास पहुंच सकता है. सकारात्मक माहौल में यह स्तर और ऊपर जा सकता है, जबकि नकारात्मक परिस्थितियों में कुछ गिरावट भी संभव है.

साल 2026 के लिए बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज, टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को लेकर उम्मीदें ज्यादा हैं. बढ़ती अर्थव्यवस्था, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग इन सेक्टरों को आगे बढ़ा सकती है. ऐसे में शेयर बाजार में सही सेक्टर और सही कंपनी चुनने वाले निवेशकों के लिए अच्छे मौके बन सकते हैं.

सोना-चांदी की चमक क्यों बनी हुई है

जब भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक सोना और चांदी की ओर रुख करते हैं. साल 2025 में यही देखने को मिला. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और सेंट्रल बैंकों की खरीदारी ने सोने को मजबूत बनाया. भारत में भी सोने की कीमतों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया. रुपये की कमजोरी ने इसमें और इजाफा किया.

चांदी ने तो सोने से भी ज्यादा कमाई करवाई. इंडस्ट्रियल मांग, सीमित सप्लाई और सेफ-हेवन निवेश की वजह से चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया. हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा रहा, लेकिन जिन्होंने धैर्य रखा, उन्हें फायदा मिला. यही कारण है कि Gold vs Stock Market 2026 की चर्चा में सोना-चांदी को नजरअंदाज करना मुश्किल है.

2026 में कमोडिटी और अन्य बाजार

2025 में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई, क्योंकि सप्लाई ज्यादा थी और बड़े जियो-पॉलिटिकल झटके नहीं आए. इससे 2026 के लिए तेल बाजार को लेकर सतर्कता बनी हुई है. वहीं कॉपर और एल्युमिनियम जैसे बेस मेटल इलेक्ट्रिफिकेशन और ग्रीन एनर्जी की बढ़ती मांग से सपोर्ट पा सकते हैं. हालांकि इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत होगी.

एक्सपर्ट की राय क्या कहती है

कोटक सिक्योरिटीज के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की ग्रोथ कहानी मजबूत बनी हुई है. उनके अनुसार, इक्विटी बाजार में लंबी अवधि के लिए अब भी दम है, क्योंकि कंपनियों की कमाई और नीतिगत माहौल दोनों सहयोगी नजर आ रहे हैं. साथ ही, 2026 में सोना भी एक सुरक्षित विकल्प के रूप में अपनी अहमियत बनाए रखेगा.

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में अभी निवेशकों की बड़ी संख्या बाजार से दूर है. जागरूकता बढ़ने और युवाओं की भागीदारी से आने वाले समय में शेयर बाजार में नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है. इससे बाजार को नई मजबूती मिल सकती है और वेल्थ क्रिएशन के नए रास्ते खुल सकते हैं.

निष्कर्ष: सोना या शेयर बाजार?

अगर सीधी भाषा में कहा जाए तो Gold vs Stock Market 2026 में कोई एक विकल्प सबके लिए सही नहीं है. सोना सुरक्षा और स्थिरता देता है, जबकि शेयर बाजार लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न की संभावना रखता है. समझदारी इसी में है कि निवेशक दोनों का संतुलन बनाकर चलें.

जो निवेशक जोखिम से बचना चाहते हैं, उनके लिए सोना राहत दे सकता है. वहीं जो निवेशक समय और धैर्य के साथ आगे बढ़ सकते हैं, उनके लिए शेयर बाजार दौलत बनाने का मजबूत जरिया बन सकता है. सही योजना, सही जानकारी और संयम के साथ लिया गया फैसला 2026 में निवेशकों को बेहतर नतीजे दे सकता है. यही Gold vs Stock Market 2026 की असली सीख है.https://pudhari.news/features/arthabhan/explained-gold-or-stock-market-what-will-deliver-higher-returns-in-2026-rs98

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