Wednesday, February 4, 2026

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RBI ने बैकों को दिया बड़ा वित्तीय सहारा – Liquidity Booster से बाजार में लौटेगी रफ्तार

भारतीय रिज़र्व बैंक ने अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा लाने के लिए इस बार बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। बैंकिंग सिस्टम में नकदी की कमी को दूर करने, लोन को सस्ता बनाने और ग्राहकों को राहत पहुंचाने के लिए RBI ने कई बड़े ऐलान किए हैं। इस फैसले को अर्थव्यवस्था के लिए एक तरह का Liquidity Booster माना जा रहा है, क्योंकि इससे पूरे वित्तीय तंत्र में बड़ा पैसा पहुंचेगा। हाल के महीनों में महंगाई लगातार घट रही है और विकास दर मजबूत दिख रही है, इसलिए RBI को पॉलिसी को नरम करने का मौका मिला। इसी वजह से इस बार ब्याज दरें भी कम की गईं और बाजार में अतिरिक्त लिक्विडिटी डालने की रणनीति भी अपनाई गई।

रेपो रेट कम होने से ग्राहकों को मिल सकती है राहत

RBI ने रेपो रेट को घटाकर 5.25% कर दिया है। यह कटौती 25 बेसिस पॉइंट की है, और फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 बेसिस पॉइंट की कमी हो चुकी है। खास बात यह है कि यह फैसला मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी के सभी सदस्यों ने मिलकर लिया है। जब रेपो रेट कम होती है, तो बैंकों को RBI से सस्ता पैसा मिलता है, और इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। होम लोन से लेकर बिज़नेस लोन तक सबकी EMI कम हो सकती है। यह Liquidity Booster इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ब्याज दर कम होने का फायदा तभी मिलता है जब सिस्टम में पर्याप्त रकम मौजूद हो।

बाजार में नकदी बढ़ाने की दो बड़ी चालें

इस पॉलिसी में RBI ने दो बड़े कदम उठाए हैं—1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदने का फैसला और 4,50,000 करोड़ रुपये के विशाल फॉरेक्स स्वैप का ऐलान। यह दोनों कदम मिलकर बैंकिंग सिस्टम में बहुत बड़ी मात्रा में पैसा डालेंगे। RBI का स्पष्ट उद्देश्य यह है कि बैंकों के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध रहे। जब बैंक ज्यादा धनराशि के साथ काम करते हैं, तो वे बिना किसी दबाव के लोन दे पाते हैं और ब्याज दरों में कटौती का फायदा जल्दी आम लोगों तक पहुंचता है। इस पूरे पैकेज को Liquidity Booster इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह धीरे-धीरे हर क्षेत्र पर प्रभाव डालने वाला कदम है।

बाजार में नकदी की मौजूदगी बढ़ने से नए उद्योगों को फंडिंग आसान होती है, कंपनियों को विस्तार में मदद मिलती है और छोटे-मोटे व्यापार शुरू करने वालों को भी राहत मिलती है। यही वजह है कि RBI इस बार सिर्फ ब्याज दरों पर नहीं रुका, बल्कि लिक्विडिटी बढ़ाने पर भी बड़ा ध्यान दिया।

फॉरेक्स स्वैप: रुपये को स्थिर रखने की रणनीति

फॉरेक्स स्वैप एक ऐसा तरीका है जिसमें RBI पहले डॉलर बेचकर बाजार में रुपये डालता है और बाद में तय समय पर डॉलर वापस खरीद लेता है। इससे बैंकिंग सिस्टम में अस्थाई रूप से बड़ी मात्रा में रुपये की उपलब्धता बढ़ती है। इस प्रकार का Liquidity Booster तब बहुत उपयोगी होता है जब रुपये पर दबाव ज्यादा हो। हाल ही में रुपया कमजोर होकर 90.42 के स्तर तक गिर गया था, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई थी। ऐसे समय में यह कदम रुपये को सहारा देने का काम करता है और अचानक आई गिरावट को रोकने में मदद करता है।

कई बार डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है और रुपया फिसलने लगता है। RBI का यह हस्तक्षेप बाजार में विश्वास बनाए रखता है और विदेशी निवेशकों को भी स्थिर माहौल का संकेत देता है। लंबी अवधि में इसका बड़ा जोखिम नहीं होता, क्योंकि स्वैप पूरा होने पर RBI रुपये की आपूर्ति को दोबारा सामान्य कर देता है।

GDP डेटा ने बढ़ाई बाजार की सतर्कता

RBI की पॉलिसी बैठक से ठीक पहले जारी हुए GDP आंकड़े उम्मीद से काफी मजबूत रहे। इससे बाजार में यह अनुमान पहले ही बन गया था कि RBI दरों में कटौती करने वाला है। रुपये की कमजोरी ने भी इस अनुमान को और मजबूत कर दिया था। फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर-रुपया प्रीमियम तेजी से बढ़ रहा था, जो बताता है कि ट्रेडर्स आगे लिक्विडिटी में कमी की स्थिति की आशंका लगा रहे थे। ऐसे समय में Liquidity Booster की घोषणा ने इन चिंताओं को काफी हद तक शांत किया।

कई बार बाजार ऐसी खबरों पर पहले ही प्रतिक्रिया दे देता है, इसलिए वास्तविक घोषणा का असर थोड़ा कम दिखता है। फिर भी इस बार RBI के कदम इतने बड़े हैं कि आने वाले महीनों में इसका व्यापक असर दिख सकता है।

बॉन्ड और इक्विटी मार्केट में अलग-अलग प्रतिक्रिया

फैसले के तुरंत बाद बॉन्ड बाजार में मजबूत प्रतिक्रिया देखने को मिली। 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड घटकर 6.51% पर आ गई, जो निवेशकों की सकारात्मक सोच को दर्शाती है। निवेशक अब उम्मीद कर रहे हैं कि ब्याज दरें स्थिर रहेंगी या और कम हो सकती हैं। हालांकि शेयर बाजार शांत दिखाई दिया और निफ्टी 50 में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा। फिलहाल निवेशकों का ध्यान रुपये की चाल और बाजार में लिक्विडिटी की स्थिति पर ज्यादा है। वे यह देखना चाहते हैं कि Liquidity Booster अगले कुछ हफ्तों में वास्तविक रूप से बैंकिंग और व्यवसायों को कितनी राहत देता है।

शेयर बाजार अक्सर थोड़ी देर से प्रतिक्रिया देता है। निवेशक पहले यह समझना चाहते हैं कि बैंक लोन की दरों में कितनी कटौती करते हैं, कंपनियों की मांग बढ़ती है या नहीं और अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह किस गति से बढ़ता है। बॉन्ड बाजार का तुरंत प्रतिक्रिया देना दिखाता है कि RBI के कदमों को भरोसेमंद और ठोस माना जा रहा है।

निष्कर्ष: RBI का Liquidity Booster देगा अर्थव्यवस्था को नई दिशा

पूरी तरह देखा जाए तो RBI का यह Liquidity Booster पैकेज आने वाले कुछ महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती देने वाला है। रेपो रेट में कटौती, बड़ी मात्रा में बॉन्ड खरीद और भारी फॉरेक्स स्वैप न केवल बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करेंगे, बल्कि ग्राहकों को भी राहत देंगे। लोन सस्ते होंगे, रुपये को स्थिरता मिलेगी और बैंकिंग सिस्टम में नकदी कहीं कम नहीं पड़ेगी।

अर्थव्यवस्था पहले से ही बेहतर प्रदर्शन कर रही है, और RBI के ये कदम इस रफ्तार को और तेज कर सकते https://www.zeebiz.com/hindi/economy/rbi-to-inject-60000-crore-rs-liquidity-in-banking-system

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हैं। आने वाले दिनों में EMI से लेकर निवेश माहौल तक, कई क्षेत्रों पर इसका सकारात्मक असर दिखेगा। यह पैकेज वित्तीय बाजारों और आम लोगों, दोनों के लिए एक मजबूत सहारा साबित हो सकता है।

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