Wednesday, February 4, 2026

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धर्मेंद्र को ‘भगवान’ की तरह मानते हैं पवन सिंह, आज भी याद है ‘ही-मैन’ की दी हुई अनमोल सीख

धर्मेंद्र की शख्सियत और स्टारडम का असर

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनकी लोकप्रियता समय के साथ कम नहीं होती, बल्कि और भी गहराती जाती है। धर्मेंद्र का नाम उसी सूची में सबसे ऊपर आता है। हिंदी सिनेमा के इतिहास में उन्होंने जो पहचान बनाई है, वह सिर्फ फिल्मों के कारण नहीं, बल्कि उनके व्यवहार, सादगी और लोगों के प्रति सम्मान के कारण भी है। 300 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके धर्मेंद्र को दर्शक “ही-मैन” के नाम से जानते हैं। उनका एक्शन, उनकी गंभीरता और उनका दिल, आज भी नए कलाकारों के लिए प्रेरणा है। धर्मेंद्र की इसी महानता का असर भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह के दिल पर भी गहराई से पड़ा है। पवन सिंह इस हद तक धर्मेंद्र का सम्मान करते हैं कि वह उन्हें अपने जीवन में ‘भगवान’ जैसा स्थान देते हैं। उनके अनुसार, धर्मेंद्र की एक सीख उन्हें आज भी जीवन की हर कठिनाई में रास्ता दिखाती है।

पवन सिंह और धर्मेंद्र की मुलाकात की अनकही कहानी

कुछ समय पहले एक रियलिटी शो में पवन सिंह ने पहली बार खुलकर बताया कि शूटिंग के दौरान धर्मेंद्र ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया था। उन्होंने कहा कि एक दिन वह धर्मेंद्र की वैनिटी वैन में उनसे मिलने गए थे। उस समय धर्मेंद्र ने बड़े प्यार से उन्हें बैठाया और बातचीत के दौरान एक बेहद गहरी बात कही। धर्मेंद्र ने कहा था—
“पवन बेटा, जीवन में आगे बढ़ना है तो पैर हमेशा जमीन पर रखना। सीना खुले रखो लेकिन सिर थोड़ा झुकाकर चलना। इससे इंसान बड़ा भी बनता है और अच्छा भी।”

पवन सिंह ने बताया कि धर्मेंद्र जैसे बड़े कलाकार से ऐसे शब्द सुनना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं था। उन्होंने कहा कि वे इस सीख को आज भी अपने दिल में संजोकर रखते हैं और जीवन के हर मोड़ पर इसे याद करते हैं। पवन के अनुसार, इस एक वाक्य ने उन्हें समझाया कि सफलता का असली अर्थ क्या होता है—और वह है विनम्रता।

भोजपुरी फिल्म में साथ किया था काम

बहुत कम लोग जानते हैं कि धर्मेंद्र ने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई है। साल 2013 में रिलीज़ हुई भोजपुरी फिल्म “देश परदेस” में उन्होंने पवन सिंह के साथ स्क्रीन शेयर की थी। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने पवन सिंह के पिता का किरदार निभाया था, और पिता-पुत्र के इस रिश्ते को दर्शकों ने खूब सराहा था। पवन सिंह बताते हैं कि धर्मेंद्र के साथ काम करना एक अनुभव नहीं, बल्कि सीखने का अंतहीन मौका था। सेट पर धर्मेंद्र हर किसी से सम्मान से बात करते, माहौल को सहज रखते और अपने अनुभव से कलाकारों को सही मार्गदर्शन देते थे। उनके इस स्वभाव ने पवन सिंह को बहुत प्रभावित किया और उनके भीतर सम्मान और भी बढ़ गया।

भोजपुरी दर्शकों ने भी धर्मेंद्र का उतना ही स्वागत किया जितना बॉलीवुड में होता आया है। उनकी मौजूदगी से फिल्म में एक अलग आकर्षण आ गया था। पवन सिंह कहते हैं कि यह फिल्म उनके करियर में एक अहम मोड़ थी, क्योंकि इसमें उन्हें सिर्फ अभिनय नहीं मिला, बल्कि उन्होंने इंसानियत और सरलता का महत्व भी सीखा।

पवन सिंह का करियर और धर्मेंद्र से मिलने वाली प्रेरणा

पवन सिंह आज भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े नामों में शामिल हैं। वह एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ-साथ लोकप्रिय गायक भी हैं। उनके गाने YouTube पर रिलीज़ होते ही करोड़ों व्यूज़ हासिल कर लेते हैं। अभिनय और संगीत के अलावा वह राजनीति में भी सक्रिय हैं और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं।
लेकिन इतनी व्यस्तता और सफलता के बावजूद पवन सिंह अक्सर कहते हैं कि धर्मेंद्र से मिली वह एक सीख उन्हें हर दिन सही दिशा दिखाती है। जब कभी उन्हें लगता है कि शोहरत बढ़ गई है या मन में अहंकार आने लगा है, तो उन्हें धर्मेंद्र की वह बात याद आ जाती है—और वे खुद को तुरंत संभाल लेते हैं। इसी वजह से वह धर्मेंद्र को सिर्फ एक आदर्श कलाकार नहीं, बल्कि जीवन-गुरु मानते हैं।

धर्मेंद्र की सरलता और पवन सिंह के जीवन पर प्रभाव

धर्मेंद्र ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष देखा है। छोटे शहर से शुरू होकर उन्होंने मेहनत और ईमानदारी से अपना मुकाम बनाया। वे सबसे बड़े स्टार बनने के बाद भी जमीन से जुड़े रहे, और यही गुण उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। सेट पर उनकी मुस्कान, लोगों के लिए सम्मान और बिना घमंड वाला स्वभाव, हर कलाकार के दिल पर प्रभाव छोड़ता है। पवन सिंह के अनुसार, धर्मेंद्र की यही व्यक्तिगत अच्छाई उन्हें भगवान जैसा बना देती है।
पवन बताते हैं कि किसी भी कलाकार के करियर में ऐसे लोग बहुत कम मिलते हैं, जो सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका भी सिखा दें। धर्मेंद्र से मिली सीख की वजह से उन्होंने हमेशा अपनी जड़ों को याद रखा, मेहनत पर भरोसा किया और नाम कमाने के बाद भी व्यवहार में सादगी रखी।

अंत में, यह रिश्ता सिर्फ दो कलाकारों का नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों का मेल है—जहाँ एक महान कलाकार दूसरे युवा स्टार को जीवन की सही दिशा दिखाता है। पवन सिंह और धर्मेंद्र की यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि शोहरत चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, इंसान को जमीन से जुड़ा रहना ही सबसे बड़ी सफलता है। धर्मेंद्र की यह सीख न सिर्फ पवन सिंह, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपनों के साथ मेहनत कर रहे हैं।https://hindi.oneindia.com/news/entertainment/dharmendra-bhojpuri-film-actor-created-such-ruckus-he-did-this-work-with-pawan-singh-1428477.html

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