Wednesday, February 4, 2026

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Putrada Ekadashi 2025 Date: कब है पौष पुत्रदा एकादशी? जानें व्रत का महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। पूरे वर्ष में 24 एकादशियाँ आती हैं और हर एकादशी किसी न किसी विशेष फल से जुड़ी होती है। इन्हीं में से एक है पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi 2025), जो भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित है। यह व्रत विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए शुभ माना जाता है जो संतान सुख की कामना रखते हैं। इस व्रत को करने से संतान प्राप्ति होती है, घर में सुख-शांति आती है और परिवार में समृद्धि का वास होता है।

पुत्रदा एकादशी व्रत वर्ष में दो बार आता है—पहली सावन मास में और दूसरी पौष मास में। सावन की एकादशी को “श्रावण पुत्रदा एकादशी” कहा जाता है, जबकि पौष माह में आने वाली को “पौष पुत्रदा एकादशी” के नाम से जाना जाता है। दोनों ही एकादशियों का उद्देश्य संतान प्राप्ति, वंश वृद्धि और पारिवारिक कल्याण से जुड़ा है।

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 कब है? (Putrada Ekadashi 2025 Date and Time)

हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी 2025 की तिथि 30 दिसंबर, सोमवार से प्रारंभ होकर 31 दिसंबर, बुधवार की सुबह तक रहेगी। एकादशी तिथि का आरंभ 30 दिसंबर को सुबह 07:50 बजे होगा और समाप्ति 31 दिसंबर को सुबह 05:00 बजे पर होगी।

पारंपरिक मान्यता के अनुसार, सूर्योदय के समय जो तिथि रहती है, उसी दिन व्रत मनाया जाता है। इस कारण अधिकांश लोग 30 दिसंबर 2025 को Putrada Ekadashi 2025 का व्रत रखेंगे, जबकि वैष्णव संप्रदाय से जुड़े श्रद्धालु इसे 31 दिसंबर 2025 को मनाएंगे। इस दिन का व्रत शुभ फलदायी माना गया है जो व्यक्ति के जीवन में सौभाग्य और सुख का संचार करता है।

पुत्रदा एकादशी का महत्व (Putrada Ekadashi 2025 Significance)

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार Putrada Ekadashi 2025 व्रत का पालन करने से संतान प्राप्ति होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। यह व्रत केवल संतान की इच्छा रखने वालों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए उपयोगी है जो अपने परिवार की उन्नति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना करते हैं।

पुराणों में इसका वर्णन मिलता है कि एक बार राजा सुकेतु नामक शासक को संतान प्राप्ति नहीं हो रही थी। वे अत्यंत दुखी होकर वन चले गए, जहाँ ऋषि नारद जी ने उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया। राजा ने इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा से किया और भगवान विष्णु की आराधना की। परिणामस्वरूप उन्हें योग्य पुत्र की प्राप्ति हुई। इसी कारण इस एकादशी को “पुत्र प्रदान करने वाली” एकादशी कहा जाता है।

इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन के सभी दोष और पाप नष्ट होते हैं। साथ ही भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा से घर में स्थायी सुख और समृद्धि का वास होता है।

पुत्रदा एकादशी पर बन रहे हैं शुभ योग (Putrada Ekadashi 2025 Shubh Yoga)

ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो पौष पुत्रदा एकादशी 2025 कई शुभ योगों के साथ आएगी। इस दिन सिद्ध योग, शुभ योग, रवि योग और भद्रावास योग जैसे दुर्लभ संयोग बनेंगे। इन विशेष योगों में भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से न केवल संतान प्राप्ति होती है बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का भी आशीर्वाद मिलता है।

इन योगों में व्रत करने से व्यक्ति के घर में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का वास होता है। इस दिन व्रत के साथ दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्नदान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पुत्रदा एकादशी व्रत विधि (Putrada Ekadashi 2025 Vrat Vidhi)

इस दिन व्रत रखने वालों को नियम और संयम का पालन करना चाहिए। दशमी तिथि की रात से ही सात्विक आहार शुरू कर देना चाहिए और मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना चाहिए।

एकादशी के दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें। भगवान को तुलसीदल, पीले फूल, फल, पंचामृत और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना शुभ माना जाता है।

पूरे दिन फलाहार या केवल जल ग्रहण करके व्रत करें। संध्या के समय भगवान विष्णु की आरती करें और Putrada Ekadashi 2025 व्रत कथा सुनें। व्रत के दौरान किसी प्रकार की नकारात्मक सोच या विवाद से बचना चाहिए। यह व्रत केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि आस्था और आत्मसंयम का प्रतीक है।

पुत्रदा एकादशी पारण का समय (Putrada Ekadashi 2025 Parana Time)

व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। पंचांग के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी 2025 का पारण 31 दिसंबर को दोपहर 01:29 से 03:33 बजे के बीच किया जाएगा। पारण के समय भगवान विष्णु को जल अर्पित करके व्रत पूर्ण करें और अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दान करें।

व्रत के बाद गरीबों को भोजन कराना और बच्चों को मिठाई बांटना भी शुभ माना जाता है। इससे व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है और व्यक्ति को दीर्घकालिक सुख की प्राप्ति होती है।

पुत्रदा एकादशी से मिलने वाले लाभ (Putrada Ekadashi 2025 Benefits)

  1. संतान प्राप्ति की कामना पूरी होती है।
  2. परिवार में सौहार्द, प्रेम और सुख-समृद्धि आती है।
  3. भगवान विष्णु की कृपा से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।
  4. घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण बनता है।
  5. मानसिक संतुलन और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।

Putrada Ekadashi 2025 व्रत का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है और भगवान की कृपा से सब मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह व्रत न केवल परिवार की भलाई के लिए है बल्कि व्यक्ति के आत्मिक उत्थान के लिए भी महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

पौष पुत्रदा एकादशी 2025 का व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। यह व्रत न केवल संतान प्राप्ति के लिए बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य के लिए भी रखा जाता है। जो भक्त सच्चे मन से इस दिन पूजा और व्रत करते हैं, उनके जीवन में भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है।

इस पावन अवसर पर मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं, जहां भक्त लक्ष्मी-नारायण के दर्शन करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यदि आप अपने परिवार में सुख और संतान सुख की इच्छा रखते हैं तो Putrada Ekadashi 2025 का व्रत विधि-विधान से जरूर करें। यह दिन आपके जीवन में नई खुशियाँ और मंगल का संदेश लेकर आएगा।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं, धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है। कृपया किसी भी धार्मिक निर्णय से पहले अपने विवेक और योग्य आचार्य की सलाह लें।https://www.india.com/hindi-news/faith-hindi/putrada-ekadashi-2025

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