जब परिवार में किसी सदस्य की संपत्ति अगली पीढ़ी को मिलती है, तो यह केवल भावनात्मक क्षण नहीं होता, बल्कि इसके साथ कई वित्तीय और कानूनी जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं। अक्सर लोगों को विरासत में सोना, गहने, जमीन, मकान, शेयर, म्यूचुअल फंड, कीमती पेंटिंग या डिजिटल एसेट जैसे क्रिप्टोकरेंसी मिलते हैं। ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल यही होता है – विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स नियम क्या कहते हैं?
कई लोग यह मान लेते हैं कि जैसे ही संपत्ति हाथ में आई, वैसे ही टैक्स देना होगा। जबकि सच्चाई इससे थोड़ी अलग है। आइए विस्तार से समझते हैं कि भारत में विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स का क्या प्रावधान है।
क्या विरासत में संपत्ति मिलने पर तुरंत टैक्स देना पड़ता है?
भारतीय आयकर कानून के अनुसार, अगर आपको माता-पिता, जीवनसाथी या अन्य कानूनी वारिस के रूप में संपत्ति मिलती है, तो उस समय आप पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगता।
सीधे शब्दों में कहें तो विरासत में सोना, जमीन, मकान या शेयर मिलने पर तुरंत टैक्स नहीं देना पड़ता।
लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि टैक्स की जिम्मेदारी भविष्य में उत्पन्न हो सकती है, खासकर तब जब आप उस संपत्ति को बेचने का निर्णय लेते हैं।
संपत्ति बेचने पर लागू होते हैं टैक्स नियम
जब आप विरासत में मिली संपत्ति को बेचते हैं, तब उस पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है। यह टैक्स बिक्री से हुए लाभ पर लगाया जाता है।
यहां एक महत्वपूर्ण नियम समझना जरूरी है। संपत्ति की मूल खरीद कीमत और उसे कितने समय तक रखा गया, इसकी गणना उस व्यक्ति के आधार पर होती है जिसने संपत्ति पहले खरीदी थी।
उदाहरण के तौर पर, यदि आपके दादा ने 25 वर्ष पहले कोई जमीन खरीदी थी और वह अब आपको मिली है, तो बेचते समय होल्डिंग पीरियड 25 वर्ष ही माना जाएगा। इसी आधार पर तय होगा कि लाभ लॉन्ग टर्म है या शॉर्ट टर्म।
लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स
अगर संपत्ति लंबे समय तक रखी गई थी और बिक्री पर हुआ लाभ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन की श्रेणी में आता है, तो उस पर लगभग 12.5% टैक्स लगाया जाता है।
वहीं, अगर लाभ शॉर्ट टर्म की श्रेणी में आता है, तो टैक्स आपकी आयकर स्लैब के अनुसार देना होता है।
कुछ मामलों में राहत के प्रावधान भी मौजूद हैं। यदि लॉन्ग टर्म गेन से प्राप्त राशि को नया घर खरीदने या सरकार द्वारा जारी कुछ विशेष बॉन्ड में निवेश किया जाए, तो निर्धारित शर्तों के तहत टैक्स में छूट मिल सकती है।
हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट पर नियम सख्त हैं। इनकी बिक्री पर सीधे 30% टैक्स लगता है और किसी भी प्रकार की छूट उपलब्ध नहीं होती।
आयकर रिटर्न में जानकारी देना क्यों जरूरी है?
यदि आपकी कुल संपत्ति 50 लाख रुपये से अधिक है, तो आयकर रिटर्न में उसकी जानकारी देना आवश्यक हो सकता है।
विदेश में स्थित संपत्ति के मामले में नियम और भी सख्त होते हैं। विदेशी संपत्ति का खुलासा अलग से करना पड़ता है। यदि जानकारी छिपाई जाती है, तो जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की संभावना रहती है।
इसलिए सभी दस्तावेज व्यवस्थित रखना और सही समय पर सही जानकारी देना बेहद जरूरी है।
अलग-अलग संपत्तियों के लिए अलग सावधानियां
सोना और गहने:
विरासत में मिले आभूषणों का सही मूल्यांकन जरूरी है। बिक्री के समय कैपिटल गेन की गणना इसी आधार पर होगी।
शेयर और म्यूचुअल फंड:
अगर निवेश में नॉमिनी दर्ज है, तो ट्रांसफर प्रक्रिया सरल रहती है। नॉमिनी न होने पर कानूनी प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
कीमती आर्टवर्क या एंटीक वस्तुएं:
कुछ प्राचीन वस्तुओं को विदेश ले जाने पर नियम लागू होते हैं। इसलिए संबंधित कानूनों की जानकारी पहले लेना बेहतर है।
क्रिप्टोकरेंसी:
विरासत में डिजिटल एसेट मिल सकते हैं, लेकिन अगर पासवर्ड या प्राइवेट की उपलब्ध नहीं है, तो उस संपत्ति तक पहुंचना असंभव हो सकता है।
विदेश में संपत्ति मिलने पर किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आपको विदेश में संपत्ति विरासत में मिली है, तो उस देश के टैक्स कानून भी लागू हो सकते हैं। कुछ देशों में इनहेरिटेंस टैक्स की व्यवस्था है।
भारत से विदेश में धन भेजने या संपत्ति ट्रांसफर करने पर FEMA नियम लागू होते हैं, जिनके तहत सालाना सीमा तय की गई है।
ऐसी स्थिति में अनुभवी टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम होता है।
भविष्य की योजना बनाना क्यों जरूरी है?
विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स नियम समझने के साथ-साथ भविष्य की सही वित्तीय योजना बनाना भी जरूरी है।
सभी संपत्तियों की सूची तैयार करें, जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखें और यदि अलग-अलग देशों में संपत्ति है तो वहां के अनुसार कानूनी दस्तावेज बनवाएं।
डिजिटल एसेट की जानकारी सुरक्षित स्थान पर रखें और विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दें।
निष्कर्ष
भारत में विरासत में संपत्ति मिलने पर तुरंत टैक्स नहीं लगता। लेकिन जब आप उस संपत्ति को बेचते हैं, तब कैपिटल गेन टैक्स देना होता है।
इसलिए जरूरी है कि आप विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स नियम को सही तरीके से समझें और बिना जानकारी के कोई कदम न उठाएं। सही योजना और विशेषज्ञ सलाह से आप भविष्य में वित्तीय परेशानियों से बच सकते हैं।
यदि आपको हाल ही में सोना, शेयर या जमीन विरासत में मिली है, तो टैक्स संबंधी नियमों को समझकर ही आगे की योजना बनाएं। यही समझदारी आपको सुरक्षित और कानूनी रूप से मजबूत बनाएगी।
ये भी पढ़े
Pixel 10a vs Vivo V70: 50 हजार रुपये के बजट में कौन सा स्मार्टफोन है ज्यादा समझदारी भरा चुनाव?
WhatsApp Schedule Message Feature: अब समय पर अपने आप भेजे जाएंगे मैसेज, यूजर्स को मिलेगी बड़ी सुविधा

