एक सर्द शाम थी। पुरानी दिल्ली की संकरी गलियों में 45 साल का इक़बाल शेख़ अपनी पुरानी घड़ी मरम्मत की दुकान बंद कर रहा था। (Imandari Ki Taaqat) ।दुकान का नाम था “शेख़ टाइम सर्विसेज”, जो उसके पिता के ज़माने से चलती आ रही थी। व्यापार आजकल ढलान पर था, लेकिन इक़बाल ने कभी किसी ग्राहक से धोखा नहीं किया। चाहे कोई सस्ती घड़ी हो या किसी अमीर की महंगी (Rolex), वह उसे पूरी निष्ठा से ठीक करता था। यही थी उसकी असली (Imandari Ki Taaqat)।

उस रात, जब वह शटर बंद ही कर रहा था, तभी एक लंबा सा आदमी आया — लंबा कोट, तेज़ आंखें, और हाथ में एक मखमली डिब्बा। उसने वह डिब्बा इक़बाल को थमाया और कहा, “इसे संभालकर रखना, कल सुबह 10 बजे वापस आऊँगा। किसी से कुछ मत कहना।” और बिना किसी उत्तर की प्रतीक्षा किए, वह चला गया।(Imandari Ki Taaqat)

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इक़बाल ने डिब्बा देखा — भारी था। उसने वापस शटर उठाया और डिब्बा दुकान के अंदर रख दिया।

उस रात वह सो नहीं सका। उसका मन उसी डिब्बे में उलझा रहा। 20 साल के अपने (Moral Story in Hindi) जैसे जीवन में उसने बहुत कुछ देखा, पर ये कुछ अलग था। क्या था उसमें? सोना? हीरे? या कोई रहस्य?(Imandari Ki Taaqat)

पर माँ की बात याद आई — “बेटा, ईमानदारी सबसे बड़ा धन होती है।” यही थी उसकी (Imandari ki Kahani)।

लेकिन जिज्ञासा ने उस पर हावी हो गई। रात के दो बजे, उसने डिब्बा खोला…

अंदर थी — एक पुरानी, मगर असली सोने की पॉकेट वॉच। लेकिन खास बात ये थी कि उस पर खुदा था:

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“जो इस घड़ी का सच समझेगा, वही अपनी किस्मत का राजा बनेगा।”

इक़बाल चौंक गया। इसका क्या अर्थ था?

सुबह 10 बजे तक उसने डिब्बा दोबारा बंद कर दिया और इंतज़ार करने लगा। 10 बजे… 11 बजे… दोपहर हो गई, कोई नहीं आया। उसने सोचा शायद कोई मज़ाक था या फिर कोई भूल।

शाम होते-होते गलियों में हलचल बढ़ गई। पुलिस, मीडियावाले, और कुछ सूट-बूट वाले लोग उसकी दुकान के बाहर आ पहुँचे। एक अधिकारी ने पूछा, “आप इक़बाल शेख़ हैं?”

“जी हाँ,” उसने जवाब दिया।

“एक कीमती राजसी पॉकेट वॉच चोरी हो गई है, और उसका ट्रेस आपकी दुकान तक आया है। हमें तलाशी लेनी होगी।”

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इक़बाल ने बिना किसी झिझक के वह मखमली डिब्बा दे दिया।

हर कोई दंग रह गया।

पुलिस अधिकारी ने घड़ी देखी और कहा, “यही है! इसकी कीमत 12 करोड़ रुपये है।”

इक़बाल के होश उड़ गए।(Imandari Ki Taaqat)

एक और अधिकारी ने कहा, “आप इसे छुपा सकते थे, बेच सकते थे। पर आपने लौटाया। क्या आपको इसका महत्व पता था?”

इक़बाल ने शांति से कहा — “नहीं साहब, बस किसी ने दिया तो संभालकर रख दिया।”

तभी वही लंबा कोट पहने व्यक्ति लौट आया — इस बार पुलिस के साथ।

हर कोई चकित रह गया।

वह मुस्कराते हुए बोला, “मैं राजवीर सिंह हूँ। एक उद्योगपति और समाज सेवा के तहत एक ‘ईमानदारी परीक्षण’ चला रहा था।”

उसने बताया — “मैं हर बार एक अलग दुकानदार चुनता हूँ, और उसे एक बहुमूल्य वस्तु देकर देखता हूँ कि वह क्या करता है। अब तक 17 लोग फेल हो चुके हैं। लेकिन इक़बाल शेख़… आप पहले हैं जिन्होंने जीत हासिल की है।”

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इक़बाल की आँखें नम हो गईं — “मैंने तो बस अपना कर्तव्य निभाया।”

राजवीर ने उसी वक्त इक़बाल को 50 लाख रुपये का इनाम दिया और एक नई घड़ी की दुकान खोलने का प्रस्ताव भी।https://hindikahani.in/the-enchanting-princess-of-the-grand-palace/

मीडिया ने उसे “ईमानदारी का देवता” कहकर सराहा। और वही (Suspenseful Hindi Story) बन गई लाखों दिलों की प्रेरणा।

आज भी इक़बाल नई दुकान में घड़ियाँ ठीक करता है, लेकिन बाहर लगे बोर्ड पर लिखा होता है:(Imandari Ki Taaqat)

“यहाँ सिर्फ घड़ियाँ नहीं, ईमानदारी भी ठीक होती है।”
इक़बाल शेख़

Jiya lal verma

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