बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी की करारी हार के बाद राजनीति से ज्यादा चर्चा लालू परिवार की अंदरूनी कलह की होने लगी है।(तेजस्वी की चुप्पी) जैसे ही चुनावी नतीजे आए और पार्टी केवल 25 सीटों पर सिमटकर रह गई, उसी समय परिवार के भीतर अचानक तनाव की आग भड़क उठी। रोहिणी आचार्य द्वारा परिवार छोड़ने और राजनीति से दूर होने का सार्वजनिक ऐलान इस पूरे विवाद का बड़ा कारण बन गया। सबसे ज़्यादा ध्यान खींचने वाली बात यह है कि इस गंभीर मामले पर तेजस्वी यादव की चुप्पी ने लोगों में तरह-तरह की शंकाएँ पैदा कर दी हैं। कई लोगों को लगने लगा है कि इतने बड़े विवाद के बावजूद तेजस्वी यादव का एक शब्द न बोलना कहीं पार्टी की हार से ध्यान हटाने की रणनीति तो नहीं है।
रोहिणी आचार्य का पोस्ट सामने आते ही बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि संजय यादव और रमीज ने उन पर दबाव बनाया कि वे राजनीति छोड़ने और परिवार से दूरी की घोषणा करें। यह बात किसी के लिए भी आसान नहीं थी, इसलिए उनका पोस्ट देखते ही यह विवाद जंगल की आग की तरह फैल गया। रोहिणी ने सिर्फ ट्वीट ही नहीं किया, बल्कि मीडिया के कैमरों के सामने आकर कई बातें कहीं। उनके आरोपों ने साफ कर दिया कि परिवार में चल रही खटपट काफी समय से अंदर ही अंदर चल रही थी और अब वह बाहर आ गई है।
बात यहीं नहीं रुकी। रविवार देर रात खबर आई कि लालू यादव की तीन और बेटियाँ भी घर छोड़कर जा चुकी हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया कि यह विवाद किसी एक सदस्य तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे परिवार का मामला है। तेजस्वी यादव के बेहद करीबी माने जाने वाले संजय यादव को लेकर पहले से ही मीसा भारती और तेज प्रताप यादव ने नाराज़गी जताई थी। रोहिणी ने भी कई बार इशारों में अपनी परेशानी सामने रखी थी। लेकिन चुनावी हार के बाद इतनी तेजी से विवाद का फूटना हर किसी को हैरान कर रहा है।
9 नवंबर को तेजस्वी के जन्मदिन पर रोहिणी ने उनके साथ एक सुंदर तस्वीर शेयर की थी, जिसमें दोनों के बीच प्यार साफ दिख रहा था। लेकिन तीन दिन बाद ही हालात इतने बिगड़ना कई तरह के सवाल खड़े करता है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि रिश्ते अचानक टूटने लगे? क्या परिवार पहले से टूट रहा था और चुनावी हार सिर्फ एक चिंगारी बनी? या फिर भीतर की राजनीति ने रिश्तों को इस मुकाम पर ला दिया?
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर है कि हमेशा सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले तेजस्वी यादव इस बड़े विवाद पर पूरी तरह चुप हैं। चुनावी हार के तीन दिन बीतने के बाद भी उन्होंने एक भी बयान नहीं दिया। न किसी को जवाब, न परिवार की तरफ से कोई स्पष्टीकरण। इस चुप्पी ने सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर तेजस्वी किस बात से बच रहे हैं।
कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि तेजस्वी की चुप्पी का मतलब है कि वह किसी बड़े विवाद को और उभारना नहीं चाहते। वहीं कई लोगों का कहना है कि परिवार के भीतर संजय यादव को लेकर बढ़ती नाराज़गी को नियंत्रित करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। कुछ लोग यह बात भी कह रहे हैं कि यह पूरा विवाद आरजेडी की हार से ध्यान हटाने का तरीका भी हो सकता है, क्योंकि परिवार की लड़ाई मीडिया और जनता दोनों के बीच बड़ा मुद्दा बन जाती है।
परिवार के किसी सदस्य — न लालू यादव, न राबड़ी देवी, न मीसा भारती — किसी ने भी अब तक किसी तरह की सफाई नहीं दी है। इससे यह और स्पष्ट होता जा रहा है कि परिवार अभी किसी भी तरह का बयान देने के मूड में नहीं है। जब परिवार से जुड़े लोग ही चुप हैं, तब जनता और मीडिया में अटकलें और तेज होना स्वाभाविक है।
इन सब घटनाओं के बीच तेजस्वी यादव ने अपने सरकारी आवास पर विधायक दल की बैठक रखी। यह बैठक चुनावी हार की समीक्षा करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई थी। इस बैठक में पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक, पराजित उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि रोहिणी विवाद के बावजूद तेजस्वी अपने माता-पिता लालू और राबड़ी देवी के साथ बैठक में शामिल होने निकले। इसका एक ही संदेश था — कि परिवार में सब ठीक है और किसी भी तरह की दरार इतनी बड़ी नहीं है जैसा बाहर दिखाया जा रहा है।
बैठक में तेजस्वी को फिर से आरजेडी विधायक दल का नेता चुना गया और उन्हें सभी फैसले लेने का अधिकार भी दे दिया गया। इससे एक बात साफ हो गई कि पार्टी अभी भी नेतृत्व के तौर पर तेजस्वी पर ही भरोसा कर रही है। साथ ही यह कदम यह दिखाने के लिए भी उठाया गया कि विवाद चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, पार्टी का काम रुकना नहीं चाहिए।
लेकिन, चाहे जो भी संदेश देने की कोशिश की जा रही हो, जनता के मन में सवाल अभी भी वही हैं—
क्या परिवार में सब सच में ठीक है?
क्या यह विवाद हार से ध्यान हटाने का तरीका है?
क्या संजय यादव को लेकर विरोध इतना बढ़ चुका है कि परिवार टूटने की स्थिति में आ गया है?
और सबसे बड़ा सवाल—तेजस्वी यादव की चुप्पी आखिर क्यों?
इन सब सवालों का जवाब समय के साथ सामने आएगा। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि चुनावी हार के बाद पारिवारिक विवाद ने आरजेडी को और कठिन दौर में धकेल दिया है। पार्टी की छवि, जनता का भरोसा और परिवार की एकता — तीनों पर इस विवाद का सीधा असर पड़ता दिख रहा है।https://navbharattimes.indiatimes.com/india/lalu-yadav-family-dispute-tejashwi-yadav-rohini
ये भी पढ़े
BSNL Silver Jubilee Plan: सिर्फ 225 रुपये में 2.5GB रोजाना डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग का धमाका!
Best Story in Hindi: चतुर खरगोश और लोभी भेड़िये की मज़ेदार कहानी
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की चर्चा देश में NEET पेपर लीक मामले के बाद…
भारत में लगातार बदलते आर्थिक और वैश्विक माहौल के बीच अब बाजार नियामक Securities and…
भारत की बड़ी टेलीकॉम कंपनी Bharti Airtel इन दिनों अपनी नई Airtel Priority Service को…
देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच इस समय सबसे ज्यादा चर्चा 8th…
Heat and Heart Attack Risk: देशभर में इस समय भीषण गर्मी लोगों के लिए बड़ी…
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच इन दिनों 8th Pay Commission Salary Increase को लेकर…