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Tenali Rama Story in Hindi: अकबर-बीरबल से भी ज़्यादा चालाक तेनालीराम की बुद्धिमानी

कभी बहुत समय पहले, दक्षिण भारत में विजयनगर नाम का एक विशाल साम्राज्य था।(Tenali Rama Story in Hindi) उस राज्य के राजा कृष्णदेव राय बहुत ही बुद्धिमान, न्यायप्रिय और कला-प्रेमी थे। उनके दरबार में देश-विदेश से विद्वान, कवि और ज्ञानी लोग आते थे। लेकिन उनमें से सबसे अलग और सबसे बुद्धिमान था — तेनालीराम

तेनालीराम का असली नाम था गोपाल, लेकिन जब उसने भगवान महाकाल के आशीर्वाद से ज्ञान प्राप्त किया, तब लोग उसे तेनालीराम कहने लगे। उसकी बुद्धि ऐसी थी कि कोई भी उसे मात नहीं दे सकता था। लोग कहते थे कि अगर अकबर के पास बीरबल था, तो कृष्णदेव राय के पास तेनालीराम था — और दोनों में मुकाबला हो तो तेनालीराम ज़्यादा चालाक साबित हो!

तेनालीराम की पहली परीक्षा

एक दिन राजा कृष्णदेव राय के दरबार में कुछ मंत्री आए और बोले,
“महाराज, तेनालीराम तो बस मज़ाक करता रहता है। असली बुद्धि तो हमारे जैसे दरबारियों में है।”

राजा मुस्कुराए और बोले, “ठीक है, मैं कल तुम सबकी बुद्धि की परीक्षा लूंगा।”

अगले दिन राजा ने सब दरबारियों के सामने एक सोने की अंगूठी रखी और कहा,
“जो इस अंगूठी को बिना छुए मेरे पास पहुँचा देगा, वही असली बुद्धिमान कहलाएगा।”Tenali Rama Story in Hindi

सब दरबारी सोच में पड़ गए। कोई बोला, “महाराज, हम तो बिना छुए कैसे देंगे?”
कोई बोला, “यह तो असंभव है!”

तेनालीराम मुस्कुराया। उसने पास में रखी हुई लकड़ी की लंबी छड़ी उठाई, अंगूठी में फँसाई और राजा को दे दी।
राजा हँस पड़े, “वाह तेनालीराम! तुमने बिना छुए अंगूठी मुझे दे दी।”
तेनालीराम बोला, “महाराज, बुद्धि वही है जो रास्ता ढूंढ ले जब सब हार मान लें।”

सारे दरबारी शर्म से सिर झुका लिए।

तेनालीराम और चोरों का सबक

एक रात राजा ने सुना कि राज्य में चोरों की संख्या बढ़ गई है। उन्होंने तेनालीराम से कहा,
“तेनाली, अगर तुमने चोर पकड़े तो तुम्हें इनाम मिलेगा।”

तेनालीराम घर गया और एक योजना बनाई। उसने अपने घर के बाहर जोर-जोर से कहा,
“अरे पत्नी! मैंने आज सारा सोना मिट्टी के घड़े में डालकर कुएँ में छिपा दिया है। कोई भी उसे ढूंढ नहीं पाएगा।”

चोरों ने यह बात सुन ली। रात को वे चुपके से आए और कुएँ में घुस गए। लेकिन कुएँ में पानी नहीं था—बल्कि मिट्टी भरी हुई थी। जैसे ही वे खुदाई करने लगे, तेनालीराम ने पहले से तैयार किया हुआ ढक्कन खोला और सब चोरों को पकड़ लिया।

अगले दिन राजा ने तेनालीराम को दरबार में बुलाया और कहा,
“तेनाली, तुमने तो पूरी फौज का काम अकेले कर दिया! सच में तुम अकबर-बीरबल से भी ज़्यादा चालाक हो।”

राजा का सवाल और तेनालीराम का जवाब

एक बार राजा के दरबार में एक विद्वान ब्राह्मण आया। उसने राजा से कहा,
“महाराज, मैं बहुत बड़ा ज्ञानी हूँ। आपके राज्य में कोई मुझे हरा नहीं सकता।”

राजा मुस्कुराए और बोले, “हमारे पास तेनालीराम है, ज़रा उससे मिलो।”

ब्राह्मण ने तेनालीराम से सवाल किया,
“अगर एक नारियल के अंदर दूध है और उसे तोड़े बिना मैं दूध कैसे निकाल सकता हूँ?”

सारे दरबारी सोच में पड़ गए। तेनालीराम शांत रहा, फिर बोला,
“बहुत आसान है! पहले पेड़ से नारियल तोड़ो, फिर उसकी जगह दूसरा नारियल बाँध दो और कहो—‘मैंने इसे नहीं तोड़ा!’”Tenali Rama Story in Hindi

सारे दरबार में हँसी फूट पड़ी। ब्राह्मण समझ गया कि तेनालीराम के सामने उसकी चालाकी नहीं चलेगी।

तेनालीराम और लालची व्यापारी

विजयनगर में एक व्यापारी था जो बहुत लालची था। वह गरीब लोगों से ज्यादा दाम वसूलता और झूठे तराज़ू से धोखा देता था। एक दिन वह राजा के पास आया और बोला,
“महाराज, मैं चाहता हूँ कि आप मुझे दरबार का मुख्य व्यापारी बना दें।”

तेनालीराम बोला, “महाराज, पहले इसकी ईमानदारी की परीक्षा होनी चाहिए।”

राजा ने अनुमति दी। तेनालीराम उस व्यापारी के पास गया और बोला,
“मुझे अपने सबसे अच्छे हीरे दिखाओ, मैं राजा को गिफ्ट देना चाहता हूँ।”

व्यापारी ने नकली हीरे दिखाए। तेनालीराम ने कहा,
“वाह! ये तो बहुत खूबसूरत हैं। मैं इन्हें कल राजा के सामने पेश करूंगा।”

अगले दिन तेनालीराम ने दरबार में उन्हीं हीरों को सबके सामने दिखाया और बोला,
“महाराज, ये हीरे इस व्यापारी ने मुझे असली बताकर बेचे हैं।”

राजा गुस्से से बोले, “ऐसे धोखेबाज़ को जेल भेज दो!”
तेनालीराम बोला, “महाराज, लालच हमेशा इंसान को अंधा बना देता है।”

तेनालीराम और जादुई बाग़

एक दिन राजा कृष्णदेव राय ने घोषणा की —
“जो कोई मेरे लिए ऐसा फूल लाए जो कभी न मुरझाए, उसे मैं बहुत बड़ा इनाम दूंगा।”

कई लोग जंगलों और पहाड़ों में फूल ढूंढने निकले। पर कोई भी नहीं लाया।
तेनालीराम ने कुछ नहीं कहा। वह सीधे बाज़ार गया और एक पत्थर की मूर्ति पर लगे कृत्रिम फूल खरीद लाया।

अगले दिन उसने वो फूल राजा को दिए और कहा,
“महाराज, यह फूल कभी नहीं मुरझाएगा क्योंकि यह झूठ का नहीं, बुद्धि का प्रतीक है।”

राजा हँस पड़े और बोले, “तेनाली, तुम्हारी सोच वाकई अद्भुत है। तुमने साबित किया कि सच्ची सुंदरता बुद्धि में होती है, न कि फूलों में।”Tenali Rama Story in Hindi

तेनालीराम और पड़ोसी राजा

एक बार पड़ोसी राज्य का राजा विजयनगर पर कब्ज़ा करना चाहता था। उसने जासूस भेजे जो खबरें चुराने लगे।
तेनालीराम को इसकी भनक लग गई। उसने राजा से कहा,
“महाराज, मुझे एक योजना बनाने दीजिए।”

तेनालीराम ने पूरे राज्य में खबर फैलाई कि राजा एक जादुई तोप बना रहे हैं जो हवा में से ही आग बरसाएगी।

यह बात जासूसों ने अपने राजा को बता दी। उसने डरकर युद्ध की योजना छोड़ दी।
राजा कृष्णदेव राय ने हँसते हुए कहा,
“तेनाली, तुम्हारी चालाकी ने बिना तलवार उठाए युद्ध जीत लिया!”

तेनालीराम और गरीब किसान

एक दिन एक गरीब किसान दरबार में आया और बोला,
“महाराज, मेरे खेत की फसल बर्बाद हो गई है। मैंने राजा के नाम का टैक्स कैसे दूँ?”

राजा सोच में पड़ गए। तब तेनालीराम बोला,
“महाराज, अगर किसान फसल नहीं देगा, तो राज्य को भोजन कैसे मिलेगा? क्यों न इस साल टैक्स माफ़ कर दिया जाए?”

राजा ने सहमति दी और किसान को मदद दी।
किसान रो पड़ा और बोला, “तेनाली बाबू, आपने तो भगवान का काम किया है।”

तेनालीराम बोला, “सच्चा न्याय वही है जो जनता के दिल तक पहुँचे।”

तेनालीराम और राजा का अहंकार

एक बार राजा कृष्णदेव राय को लगा कि वे सबसे बुद्धिमान हैं। उन्होंने दरबार में कहा,
“क्या कोई है जो मुझसे ज्यादा चालाक हो?”

तेनालीराम मुस्कुराया और बोला,
“महाराज, अगर मैं आपको बिना छुए गिरा दूँ तो क्या आप मानेंगे कि मैं चालाक हूँ?”

राजा बोले, “जरूर!”

तेनालीराम ने धीरे से कहा, “महाराज, ज़रा अपनी आंखें बंद कीजिए और सोचिए कि आप भगवान के सामने झुक रहे हैं।”
राजा ने आंखें बंद कीं, झुके, और तेनालीराम बोला, “देखिए, आप गिर गए बिना छुए!”

सारा दरबार हँसी से गूंज उठा। राजा ने हँसते हुए कहा,
“तेनाली, तुम्हारे जैसी बुद्धि अकबर-बीरबल की कहानियों में भी नहीं मिलती!”

नैतिक शिक्षा (Moral of the Story)

तेनालीराम की कहानियाँ हमें सिखाती हैं कि बुद्धि, समझदारी और ईमानदारी से हर मुश्किल का हल निकल सकता है।(Tenali Rama Story in Hindi)
सच्ची चालाकी दूसरों को धोखा देने में नहीं, बल्कि सच और अच्छाई से जीतने में है।
तेनालीराम ने हमेशा अपनी बुद्धि का इस्तेमाल न्याय और भलाई के लिए किया — यही कारण है कि आज भी बच्चे और बड़े सब उनकी कहानियों से प्रेरणा लेते हैं।https://tinytaleshub.com/hindi-stories/tenaliram-kuch-nahi-kahani/

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