भारत के प्रतिष्ठित टाटा समूह की वित्तीय शाखा टाटा कैपिटल ने हाल ही में अपना बड़ा Initial Public Offering (IPO) पेश किया, जिस पर निवेशकों की निगाहें टिकी थीं। इस इश्यू से बाजार में काफी उम्मीदें थीं क्योंकि टाटा कैपिटल देश की प्रमुख गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) में से एक है। लेकिन जब सोमवार को Tata Capital IPO के शेयर बाजार में उतरे, तो प्रदर्शन उम्मीद से कुछ धीमा रहा। पहले ही दिन कंपनी के शेयरों में केवल 1.37% की मामूली बढ़त देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि मौजूदा माहौल में निवेशक NBFC सेक्टर को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं हैं।
कंपनी का यह आईपीओ ₹155.1 अरब (लगभग $1.75 अरब) का था और इसका मूल्य ₹326 प्रति शेयर रखा गया था, जो प्राइस बैंड का ऊपरी स्तर था। तीन दिन चली बोली प्रक्रिया के दौरान यह इश्यू पूरी तरह भर गया, लेकिन लिस्टिंग के दिन बाजार की प्रतिक्रिया सीमित रही। इस स्थिति से स्पष्ट है कि इस समय भारतीय निवेशकों का झुकाव सुरक्षित और स्थिर विकल्पों की ओर अधिक है, जबकि NBFC सेक्टर को लेकर सतर्कता बरकरार है।
Tata Capital IPO को लेकर बाजार से मिली प्रतिक्रिया मिश्रित रही। जहां संस्थागत निवेशकों ने उत्साह दिखाया और अपने हिस्से से करीब 3.4 गुना बोली लगाई, वहीं उच्च नेटवर्थ वाले निवेशकों (HNIs) ने अपने आवंटन से लगभग 2 गुना आवेदन किया। खुदरा निवेशकों की भागीदारी थोड़ी कम रही और उन्होंने करीब 1.1 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज कराया।
इस आईपीओ में कई बड़े घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेश बैंकों ने भागीदारी निभाई। कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस कैपिटल, बीएनपी परिबास और एचडीएफसी बैंक जैसी प्रमुख संस्थाएं इस इश्यू के संयुक्त बुक रनर रहीं। इन बैंकों की भागीदारी ने यह दिखाया कि टाटा कैपिटल जैसे भरोसेमंद ब्रांड के प्रति संस्थागत निवेशकों का भरोसा अब भी कायम है, भले ही बाजार की चाल फिलहाल थोड़ी धीमी हो।
फिर भी, शुरुआती कारोबार के नतीजों से यह जाहिर होता है कि निवेशकों का ध्यान फिलहाल तेजी से बढ़ने वाले टेक्नोलॉजी, फार्मा और ऑटो सेक्टर की ओर ज्यादा केंद्रित है, जबकि NBFC सेक्टर में निवेश कुछ हद तक सीमित दिखाई देता है।
Tata Capital IPO के प्रदर्शन पर विश्लेषकों की राय काफी स्पष्ट रही है। SEBI-पंजीकृत स्वतंत्र शोध विश्लेषक हेमिंद्र हजारी ने कहा कि निवेशकों की घटती दिलचस्पी इस बात की ओर इशारा करती है कि भारत में NBFC सेक्टर की विकास गति फिलहाल सुस्त है। उनके अनुसार, देश की अर्थव्यवस्था अभी धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रही है और गुणवत्तापूर्ण रोजगार की कमी बनी हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए व्यापारिक शुल्क (टैरिफ) से निर्यात और औद्योगिक विकास पर असर पड़ा है, जिससे वित्तीय क्षेत्र के लिए चुनौतियाँ और बढ़ी हैं। ऐसे हालात में, वित्तीय मध्यस्थ कंपनियों की वृद्धि सीमित हो रही है, क्योंकि आम जनता की आय और खर्च करने की क्षमता दोनों पर असर पड़ रहा है।
टाटा कैपिटल भारत की तीसरी सबसे बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है। कंपनी अपनी विश्वसनीयता और ग्राहक सेवा के लिए जानी जाती है। इसके उत्पादों में पर्सनल लोन, होम लोन, बिजनेस फाइनेंस, SME लोन, कॉर्पोरेट लेंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग जैसी सेवाएँ शामिल हैं।
कंपनी ने बीते कुछ वर्षों में खुद को एक मजबूत और विविध वित्तीय संस्थान के रूप में स्थापित किया है। टाटा ग्रुप का नाम अपने आप में भरोसे का प्रतीक है, जिससे कंपनी को बाजार में स्थिरता मिलती है। हालांकि, हालिया आर्थिक परिस्थितियाँ और ब्याज दरों में लगातार उतार-चढ़ाव ने NBFC क्षेत्र के मुनाफे पर असर डाला है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा, फिनटेक कंपनियों का उभार और ग्राहकों की डिजिटल वित्त की ओर बढ़ती रुचि भी इस सेक्टर में नई चुनौतियाँ लेकर आई हैं। फिर भी, टाटा कैपिटल का विशाल नेटवर्क और मजबूत वित्तीय स्थिति इसे लंबी अवधि में स्थायित्व प्रदान करती है।
भले ही Tata Capital IPO का प्रदर्शन सीमित रहा हो, लेकिन भारत का IPO बाजार इस साल दुनिया में सबसे ज्यादा सक्रिय रहा है। EY की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 की तीसरी तिमाही में भारत में 146 आईपीओ हुए, जिनसे कुल $7.2 अरब की पूंजी जुटाई गई।
साल के पहले नौ महीनों में कुल 254 आईपीओ के माध्यम से $11.8 अरब की राशि बाजार में आई, जो यह साबित करती है कि भारत के कैपिटल मार्केट्स की गहराई लगातार बढ़ रही है। निवेशकों में घरेलू कंपनियों के प्रति भरोसा और लंबी अवधि के निवेश का रुझान तेजी से मजबूत हो रहा है।
हालांकि, NBFC और वित्तीय सेक्टर फिलहाल धीमी चाल में हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेशकों का जोश देखने लायक है।
शेयर बाजार में Tata Capital IPO की कमजोर शुरुआत के बावजूद, कंपनी का भविष्य उज्जवल नजर आता है। टाटा समूह का अनुभव, साख और स्थिर प्रबंधन इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं। भारत जैसे विशाल देश में रिटेल लोन, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और एमएसएमई फाइनेंसिंग की मांग लगातार बढ़ रही है।
यदि भारतीय अर्थव्यवस्था आने वाले महीनों में रफ्तार पकड़ती है, तो टाटा कैपिटल जैसी कंपनियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा, सरकार की “मेक इन इंडिया” और MSME को प्रोत्साहन देने वाली नीतियाँ भी NBFC सेक्टर के लिए नई संभावनाएँ खोल सकती हैं।
डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल लोन ऐप्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के विस्तार से कंपनी अपने उत्पादों को और अधिक ग्राहकों तक पहुंचाने में सक्षम हो सकती है।
टाटा कैपिटल के बाद अब बाजार की नजरें एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के आने वाले आईपीओ पर टिकी हैं, जो मंगलवार को शेयर बाजार में लिस्ट होने जा रहा है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि इससे निवेशकों का भरोसा फिर बढ़ेगा और बाजार में नई ऊर्जा देखने को मिलेगी।
कुल मिलाकर, Tata Capital IPO की लिस्टिंग से यह संदेश मिलता है कि भारतीय शेयर बाजार अभी सुधार और संतुलन के दौर में है। निवेशक अब अधिक सावधानी से कंपनियों का मूल्यांकन कर रहे हैं और केवल उन्हीं क्षेत्रों में पैसा लगा रहे हैं जहां दीर्घकालिक स्थिरता दिख रही है।
टाटा कैपिटल जैसी बड़ी कंपनी के लिए यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में यदि कंपनी अपनी सेवाओं को अधिक डिजिटल और ग्राहक-केन्द्रित बनाती है, तो वह फिर से निवेशकों का भरोसा जीत सकती है।
भारत का IPO बाजार अभी भी मजबूत है और आने वाले महीनों में कई और बड़ी कंपनियाँ अपने इश्यू लॉन्च करने की तैयारी में हैं। लेकिन फिलहाल, टाटा कैपिटल का यह अनुभव इस बात का सबूत है कि हर बड़ी कंपनी को भी बाजार की हकीकत और निवेशकों की बदलती सोच को ध्यान में रखना पड़ता है।https://navbharattimes.indiatimes.com/business/share-market/share-news/tata-capital-ipo
ये भी पढ़े
TVS Raider 125 का नया मॉडल लॉन्च – अब बूस्ट मोड, एबीएस और शानदार परफॉर्मेंस के साथ
TVS Raider 125 का नया मॉडल लॉन्च – अब बूस्ट मोड, एबीएस और शानदार परफॉर्मेंस के साथ
आज के समय में मोबाइल और इंटरनेट के बिना जिंदगी की कल्पना करना मुश्किल हो…
बजट 2026 से ऑटो सेक्टर को क्या चाहिए? Budget 2026 Auto Sector Expectations को लेकर…
फरवरी का महीना भले ही साल का सबसे छोटा महीना माना जाता हो, लेकिन बैंक…
आज के दौर में नौकरी बदलना करियर का सामान्य हिस्सा बन चुका है।(Job Change Tax…
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हाल ही में घोषित हुई बड़ी व्यापारिक समझौता डील…
बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है (Cow…