हरी-भरी पहाड़ियों और रंग-बिरंगे फूलों से घिरे एक सुंदर जंगल के बीच एक प्यारी सी परी रहती थी, (Short Love Story in Hindi)जिसका नाम था रूही। रूही बहुत ही छोटी, चमकदार और दिल से मासूम थी। उसके पंख सूरज की रोशनी में ऐसे चमकते थे जैसे किसी ने आसमान में चांदी की पट्टी टांग दी हो। जंगल के सारे पंछी, तितलियाँ और जानवर उससे बहुत प्यार करते थे, क्योंकि रूही हमेशा मुस्कुराती रहती थी और सभी की मदद करती थी।
एक दिन सुबह-सुबह रूही अपनी टोकरी लेकर फूल इकठ्ठा करने निकली। वह पेड़ों पर खिले नीले, गुलाबी और पीले फूल देखकर बहुत खुश हो रही थी। वह एक-एक फूल को प्यार से छूकर अपनी टोकरी में रखती जाती। लेकिन फूलों को देखते-देखते वह जंगल के बहुत भीतर चली गई। उसे पता ही नहीं चला कि वह अपने घर से कितनी दूर आ चुकी थी। तभी अचानक तेज हवा चली और उसके छोटे पंख थक गए। हवा के कारण वह दिशा पहचान न पाई और जंगल के एक अंजान हिस्से में जाकर रुक गई।
रूही ने इधर-उधर देखा तो वहां सब कुछ अलग था — पेड़ ज्यादा ऊँचे, पत्ते ज्यादा घने और माहौल थोड़ा गहरा। वह थोड़ी डर गई। उसने हवा से कहा, “अरे हवा दीदी, क्या आप मुझे मेरे घर तक छोड़ सकती हैं?” लेकिन हवा आगे चल चुकी थी। उसने आसमान से भी कहा, “अरे सूरज दादा, क्या आप मेरी राह दिखा सकते हैं?” सूरज भी बादलों में छुप गया था।
अब रूही बिलकुल अकेली थी। उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। वह रोने ही वाली थी कि तभी एक मधुर सी आवाज आई— “कौन हो तुम? इतनी देर में जंगल के इस हिस्से में क्या कर रही हो?”
रूही ने आवाज की तरफ देखा तो वहाँ एक छोटा, सुंदर और भोला सा वन-परी लड़का खड़ा था, जिसके पंख नीले पानी जैसे चमक रहे थे। उसका नाम था आरव। आरव जंगल का रक्षक था। वह हमेशा इस बात का ध्यान रखता था कि कोई भी जानवर या जीव जंगल में भूला-भटका न रह जाए।
रूही ने धीरे से कहा, “मेरा नाम रूही है… मैं फूल लेने आई थी और रास्ता भटक गई। अब मुझे घर जाने का रास्ता नहीं मिल रहा।”
आरव ने मुस्कुराते हुए कहा, “डरो मत, तुम अब अकेली नहीं हो। मैं तुम्हें घर पहुँचाने में मदद करूँगा।”
रूही की आँखों में उम्मीद की चमक आ गई। उसने धीरे से कहा, “सच में? तुम मेरी मदद करोगे?”
आरव ने सिर हिलाया और बोला, “हाँ, क्योंकि जंगल का हर जीव एक-दूसरे की मदद करता है। और तुम तो खुद एक छोटी सी परी हो। तुम्हें डरना नहीं चाहिए।”
इस तरह रूही और आरव की दोस्ती की शुरुआत हुई। दोनों धीरे-धीरे पेड़ों और झाड़ियों के बीच से रास्ता ढूँढ़ते हुए आगे चलने लगे। चलते-चलते रूही ने देखा कि आरव हर थोड़ी देर में रुककर पेड़ों को छूता, पत्तों की हरकतें देखता और हवा की दिशा को महसूस करता। जैसे वह किसी अदृश्य शक्ति से बात कर रहा हो। रूही ने पूछा, “तुम पेड़ों से क्या बात करते हो?”
आरव ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “पेड़ हमारी भाषा समझते हैं। अगर हम दिल से पूछें, तो वे हमें रास्ता दिखा देते हैं। पेड़ हमेशा बताते हैं कि कौन सा रास्ता सुरक्षित है और किस तरफ खतरा है।”
रूही यह सुनकर हैरान रह गई। उसने भी एक पेड़ को छूकर पूछा, “क्या आप मुझे घर का रास्ता बताएँगे?”
पेड़ की पत्तियाँ धीरे-धीरे हिलने लगीं जैसे वह ‘हाँ’ कह रहा हो। रूही खुशी से खिल उठी।
दोनों आगे बढ़ते रहे। रास्ते में एक छोटी सी नदी आई। पानी बिलकुल साफ और ठंडा था। नदी के किनारे बहुत सारी चमकीली तितलियाँ उड़ रही थीं। उनमें से एक तितली रूही की उंगली पर बैठ गई। तितली ने ऐसे पंख फड़फड़ाए जैसे वह उसका हाथ थाम रही हो। रूही बोली, “देखो आरव! यह तितली मुझे पहचानती है।”
आरव बोला, “तुम्हारा दिल इतना अच्छा है कि हर जीव तुम्हें पहचान लेगा।”
धीरे-धीरे सूरज ढलने लगा। आसमान सुनहरी और गुलाबी रोशनी से भर गया। पर रूही अभी भी अपने घर से दूर थी। अब उसे डर लगने लगा। उसने धीमे स्वर में कहा, “आरव, अगर रात हो गई तो?”
आरव ने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और बोला, “जब तक मैं हूँ, तुम्हें डरने की जरूरत नहीं।”
रूही ने पहली बार अपने दिल में एक अजीब सी गर्माहट महसूस की—जैसे कोई उसकी देखभाल कर रहा हो, जैसे कोई उसे सुरक्षित रख रहा हो। छोटी परी रूही को यह एहसास बहुत प्यारा लगा।
रास्ते में अचानक झाड़ियों के पीछे से एक बड़ा सा काला साया निकला। रूही डर गई और पीछे हट गई। लेकिन आरव तुरंत उसके सामने खड़ा हो गया। वह बोला, “डरो मत, यह हमारा जंगल का पुराना बाघ है। यह हमें नुकसान नहीं पहुँचाएगा।”
बाघ पास आया, उसने रूही को देखा और आरव से बोला, “यह छोटी परी कौन है?”
आरव ने बताया कि वह रास्ता भटक गई है और उसे घर जाना है। बाघ ने अपने भारी कदमों के साथ सिर हिलाया, “जंगल में खो जाना सामान्य बात है, लेकिन डरना नहीं चाहिए। मैं तुम्हें पास वाले खुले मैदान तक पहुँचा दूँगा।”
रूही थोड़ा घबराई, लेकिन जब आरव उसके साथ था, तो उसका डर कम हो गया। दोनों बाघ के पीछे-पीछे चलने लगे। मैदान में पहुँचते ही रूही की आँखें चमक उठीं, क्योंकि वहाँ से उसके घर की रोशनी दिखाई दे रही थी। छोटे-छोटे जुगनू घर की ओर जाने वाला रास्ता रोशन कर रहे थे।
रूही की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह बोली, “आरव! मुझे मेरा घर दिख रहा है!”
आरव मुस्कुराया, “हाँ, अब तुम बिल्कुल सुरक्षित हो। तुम्हारे परिवार के लोग भी तुम्हें ढूँढ़ रहे होंगे।”
रूही ने अचानक महसूस किया कि अब इस यात्रा का अंत आ रहा है… लेकिन वह आरव से अलग होने के बारे में सोचकर उदास होने लगी। उसने धीरे से पूछा, “क्या तुम… दोबारा मुझसे मिलने आओगे?”
आरव ने उसकी आँखों में देखकर कहा, “अगर तुम चाहो, तो मैं रोज मिल सकता हूँ। तुम मेरी दोस्त हो।”
रूही का छोटा सा दिल खुशी से धड़क उठा। वह बोली, “तुम सिर्फ मेरे दोस्त ही नहीं… तुम मेरे सबसे प्यारे दोस्त हो।”
दोनों ने जुगनुओं की रोशनी के बीच एक-दूसरे को देखकर मासूम मुस्कान साझा की। यह एक short love story in hindi थी—दो मासूम दिलों के बीच की एक प्यारी सी प्रेम भावना, जो किसी बड़े इज़हार की नहीं बल्कि प्यारे से भरोसे, देखभाल और साथ की थी।
जब रूही अपने घर पहुँची, तो उसकी माँ उसे देखकर गले लगा लिया। रूही ने पीछे मुड़कर देखा—आरव अब भी वहाँ खड़ा था। वह बोली, “मैं फिर मिलूँगी!”
आरव ने सिर हिलाया, “मैं इंतज़ार करूँगा।”
उस दिन के बाद से रूही रोज शाम को जंगल के उस हिस्से में जाती जहाँ आरव रहता था। दोनों साथ बैठकर बातें करते, फूल चुनते, तितलियों का पीछा करते और हँसते रहते। रूही को अब जंगल से डर नहीं लगता था, क्योंकि उसके पास आरव जैसा सच्चा दोस्त था।
धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि वे एक-दूसरे बिना नहीं रह सकते थे। रूही हर दिन आरव का रास्ता देखते-देखते बेचैन हो जाती। आरव भी रूही की एक झलक के लिए हर सुबह जल्दी उठकर तैयार हो जाता था। दोनों की यह मासूम सी मोहब्बत पूरे जंगल में फैल गई। पंछी एक साथ गाते, हवाएँ धीमी हो जातीं और फूल दोनों के लिए अपनी खुशबू बिखेरते।
एक दिन बारिश बहुत तेज होने लगी। हवा तेज चल रही थी। रूही अपने घर में थी, लेकिन उसका दिल बेचैन था। उसे लगा कि आरव कहीं बारिश में अकेला तो नहीं… कहीं उसे चोट तो नहीं लग गई?
वह अपने छोटे-छोटे पंख फैलाकर बारिश में उड़ पड़ी। पानी की बूंदों ने उसे बार-बार नीचे गिराने की कोशिश की, लेकिन वह रुकी नहीं। वह तभी रुकी जब उसे एक पेड़ के नीचे भीगा हुआ आरव मिला।
रूही ने उसे गले लगा लिया और रोते हुए कहा, “तुम ठीक हो ना? मैं बहुत डर गई थी!”
आरव ने उसकी पीठ पर हाथ फेरा और मुस्कुराकर कहा, “जब तुम मेरे साथ हो, मैं हमेशा ठीक हूँ।”
यह बात सुनकर रूही पूरी तरह शांत हो गई। उसने कभी किसी के लिए इतनी चिंता महसूस नहीं की थी। उसे समझ आ गया कि आरव उसके लिए कितना खास है। और आरव भी यह जान चुका था कि रूही उसके दिल के बहुत करीब है।
उनकी यह मासूम और सच्ची भावना ही जंगल की सबसे खूबसूरत बात बन गई। कई सालों तक उनकी दोस्ती बढ़ती गई और जंगल में हर जीव उनके प्यार की मिठास को महसूस करता रहा।
रूही और आरव ने साथ मिलकर कई जीवों की मदद की, कई पेड़ों को बचाया, कई जानवरों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। वे सिर्फ दो दोस्त नहीं रहे—वे जंगल की जान बन गए।
उनकी इस कहानी में न कोई डर था, न कोई झगड़ा, न कोई बिछड़ना… सिर्फ प्यारी, भावुक, दिल को छूने वाली short love story in hindi थी, जिसमें दो छोटे दिलों की मासूम भावना ने पूरे जंगल को रोशन कर दिया था।
और यही सच है—प्यार हमेशा बड़ा नहीं होता, वह दिलों की सच्चाई में बसता है।
सच्चा प्यार और सच्ची दोस्ती डर को मिटा देते हैं। अगर दिल साफ और नीयत अच्छी हो, तो दुनिया की हर मुश्किल आसान लगने लगती है।https://storyworld.in/fairy-tales-in-hindi/
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