आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग आयरन, कैल्शियम, विटामिन डी या बी12 के बारे में तो बात करते हैं, लेकिन एक बहुत अहम मिनरल ऐसा भी है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है—मैग्नीशियम। यह मिनरल शरीर के ढेरों कामों को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। अगर किसी व्यक्ति में Magnesium Deficiency Symptoms दिखाई देने लगें, जैसे मांसपेशियों में खिंचाव, थकान या ऊर्जा की कमी, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। शरीर में मैग्नीशियम कम होने पर न सिर्फ मसल्स कमजोर महसूस होती हैं, बल्कि मानसिक सेहत पर भी इसका असर पड़ता है। इसलिए ज़रूरी है कि लोग इसकी कमी के संकेतों को पहचानें और सही डाइट अपनाएं।
बहुत से लोग अपनी रोजमर्रा की डाइट में ऐसे फूड्स शामिल नहीं करते जिनसे पर्याप्त मैग्नीशियम मिल सके। खासकर जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्या रहती है, डायबिटीज होती है या जो शराब का सेवन ज्यादा करते हैं, उनमें मैग्नीशियम की कमी होने का खतरा और अधिक रहता है। कई बार Magnesium Deficiency Symptoms शुरुआत में दिखाई नहीं देते, लेकिन जब शरीर में यह मिनरल बहुत कम हो जाता है, तब जाकर समस्याएं बाहर आती हैं। इसलिए ज़रूरी है कि समय रहते इसकी पूर्ति की जाए और ऐसे फूड्स अपनाए जाएं जिनसे शरीर को प्राकृतिक रूप से मैग्नीशियम मिल सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मैग्नीशियम की कमी होने पर शरीर कई तरह के संकेत देना शुरू कर देता है। मांसपेशियों में अकड़न होना, पैरों या हाथों में बार-बार ऐंठन आना, शरीर का कांपना, हमेशा थकान महसूस होना—ये सभी सामान्य Magnesium Deficiency Symptoms हैं। इसके अलावा कई लोगों को नींद पूरी नहीं आती, ध्यान लगाने में दिक्कत होती है और दिमाग कभी-कभी खाली सा लगता है। मन में उदासी का भाव बढ़ जाना या इमोशंस पर कंट्रोल न रहना भी इसी कमी का हिस्सा हो सकता है। लंबे समय तक यह कमी रहने पर हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं, क्योंकि हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम के साथ-साथ मैग्नीशियम भी जरूरी होता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, हर उम्र में मैग्नीशियम की ज़रूरत अलग होती है। छोटे बच्चों को जन्म के बाद पहले 6 महीनों में करीब 30 मिलीग्राम मैग्नीशियम चाहिए होता है, जबकि 7 से 12 महीनों में यह 75 मिलीग्राम हो जाता है। 1 से 3 साल के बच्चों के लिए 80 मिलीग्राम, 4 से 8 साल के बच्चों के लिए 130 मिलीग्राम और 9 से 13 साल की उम्र में लगभग 130 मिलीग्राम मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है। किशोरावस्था के बाद लड़के और लड़कियों की जरूरतें अलग-अलग हो जाती हैं। उम्र, स्वास्थ्य और दिनचर्या के हिसाब से यह मात्रा बढ़ या घट सकती है। अगर किसी व्यक्ति में Magnesium Deficiency Symptoms दिखाई दे रहे हों, तो उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर डाइट और मात्रा की जानकारी लेनी चाहिए।
डाइट में पंपकिन सीड्स शामिल करना मैग्नीशियम बढ़ाने का आसान तरीका है। सिर्फ 1 औंस रोस्टेड पंपकिन सीड्स में करीब 156 मिलीग्राम मैग्नीशियम होता है, जो आपकी रोज की जरूरत का लगभग 37% पूरा कर देता है। ये सीधे स्नैक की तरह भी खाए जा सकते हैं या सलाद, दही या स्मूदी में मिला कर भी उपयोग किए जा सकते हैं। अगर शरीर में Magnesium Deficiency Symptoms दिख रहे हों तो पंपकिन सीड्स एक बढ़िया विकल्प हैं जो बिना किसी मेहनत के इस कमी को पूरा करते हैं।
चिया सीड्स में भी मैग्नीशियम अच्छी मात्रा में मिलता है। 1 औंस चिया सीड्स से लगभग 111 मिलीग्राम मैग्नीशियम मिलता है, जो दिनभर की जरूरत का लगभग 26% है। इन्हें पानी में भिगोकर, स्मूदी में डालकर या दही के साथ खाया जा सकता है। चिया सीड्स फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड का भी अच्छा स्रोत हैं, इसलिए ये पूरे शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होते हैं।
ड्राई फ्रूट्स में बादाम और काजू दोनों ही मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत हैं। 1 औंस बादाम में करीब 80 मिलीग्राम मैग्नीशियम मिलता है, जबकि काजू में लगभग 74 मिलीग्राम। अगर आपकी डाइट में ये दोनों चीजें नियमित रूप से शामिल हों, तो शरीर में Magnesium Deficiency Symptoms होने की संभावना काफी कम हो जाती है। बादाम दिमाग को तेज करने के साथ शरीर को ऊर्जा भी देता है, इसलिए इसे रोजाना थोड़ा-थोड़ा खाना फायदेमंद होता है।
पालक मैग्नीशियम का एक बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत है। इसके अलावा मूंगफली, सोया मिल्क, केला, ब्राउन राइस, ब्लैक बीन्स, योगर्ट, राजमा, ओट्स, ब्रोकोली, सेब और गाजर जैसी चीजों में भी मैग्नीशियम पाया जाता है। अगर ये चीजें आपकी डाइट में शामिल हों, तो शरीर को रोजाना अच्छी मात्रा में मैग्नीशियम मिलता रहता है, जिससे Magnesium Deficiency Symptoms होने की संभावना कम होती है।
नॉन-वेज खाने वालों के लिए भी विकल्प काफी अच्छे हैं। चिकन, सैल्मन और कई समुद्री फूड्स में मैग्नीशियम के साथ-साथ प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड भी पाया जाता है, जो मांसपेशियों और दिल की सेहत को मजबूत बनाता है।
अगर आप बार-बार थकान महसूस करते हैं, मांसपेशियों में खिंचाव होता है, नींद सही नहीं आती या मन अचानक उदास होने लगता है, तो ये Magnesium Deficiency Symptoms हो सकते हैं। इस स्थिति में सबसे पहले अपनी डाइट में मैग्नीशियम रिच फूड्स जोड़ना शुरू करें। इसके साथ ही ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से बचें, पानी अधिक पिएं और शराब का सेवन कम करें।
अगर लक्षण ज्यादा बढ़ते नज़र आएं तो डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी होता है। कई बार शरीर कुछ पोषक तत्वों को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता, ऐसे में डॉक्टर डाइट के साथ सप्लीमेंट्स भी सुझा सकते हैं।
अंत में, मैग्नीशियम ऐसा मिनरल है जो शरीर की छोटी-बड़ी हर प्रक्रिया में शामिल होता है। इसलिए इसे अपनी रोज की डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा जरूर बनाएं। सही समय पर सही भोजन अपनाने से Magnesium Deficiency Symptoms दूर हो सकते हैं और शरीर दोबारा से एनर्जी, स्ट्रेंथ और बैलेंस महसूस करने लगता है।https://www.msn.com/hi-in/news/other/winter-health-tips
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