आज के दौर में नौकरी बदलना करियर का सामान्य हिस्सा बन चुका है।(Job Change Tax Planning) बेहतर अवसर, ज्यादा सैलरी और प्रोफेशनल ग्रोथ के लिए लोग कंपनी बदलते रहते हैं। लेकिन इसी बदलाव के दौरान कई बार ऐसी वित्तीय चूक हो जाती है, जो सालों की मेहनत से जोड़ी गई पूंजी पर भारी टैक्स का कारण बन सकती है। सुपरएन्यूएशन, ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट फंड से जुड़े नियम अगर सही समय पर न समझे जाएं, तो नुकसान तय है। इसलिए Job Change Tax Planning को नजरअंदाज करना किसी भी कर्मचारी के लिए ठीक नहीं है।
जब कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, तो उसके मन में सबसे पहला सवाल यही होता है कि जमा हुआ पैसा निकाल लिया जाए या नहीं। कई लोग तुरंत सुपरएन्यूएशन या अन्य रिटायरमेंट फंड निकाल लेते हैं, क्योंकि उन्हें भविष्य की सही जानकारी नहीं होती। यही फैसला आगे चलकर टैक्स का बोझ बढ़ा देता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर फंड को निकालने की बजाय सही जगह ट्रांसफर कर दिया जाए, तो टैक्स से आसानी से बचा जा सकता है। यही समझदारी भरा कदम Job Change Tax Planning की बुनियाद है।
सुपरएन्यूएशन फंड मूल रूप से रिटायरमेंट के लिए बनाया गया एक लाभ है। आयकर कानून के अनुसार, यदि यह रकम रिटायरमेंट के समय मिलती है, तो इस पर टैक्स नहीं लगता। लेकिन अगर कोई कर्मचारी रिटायरमेंट से पहले ही यह राशि निकाल लेता है, तो यह उसकी सालाना आय में जोड़ दी जाती है और उस पर टैक्स स्लैब के हिसाब से कर देना पड़ता है। राहत की बात यह है कि यदि नौकरी बदलते समय इस फंड को नई कंपनी के अप्रूव्ड सुपरएन्यूएशन फंड या फिर NPS में ट्रांसफर कर दिया जाए, तो इसे टैक्स योग्य नहीं माना जाता। यही कारण है कि Job Change Tax Planning में ट्रांसफर को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
ग्रेच्युटी उन कर्मचारियों को मिलती है, जिन्होंने किसी कंपनी में कम से कम पांच साल तक सेवा दी हो। टैक्स नियमों के मुताबिक, अधिकतम 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी टैक्स-फ्री होती है। इसके अलावा हर साल की सेवा के बदले 15 दिन की सैलरी के आधार पर भी छूट मिलती है। जो रकम इन सीमाओं से ऊपर होती है, उस पर टैक्स देना पड़ता है। इसलिए नौकरी बदलते समय ग्रेच्युटी की राशि को लेकर पहले से योजना बनाना बेहद जरूरी है। सही Job Change Tax Planning से यहां भी टैक्स का असर कम किया जा सकता है।
कई कर्मचारी यह सोचते हैं कि NPS को जारी रखना सही है या नहीं। निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स बचत के लिहाज से NPS एक मजबूत विकल्प है। पुराने टैक्स सिस्टम में NPS के जरिए 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त छूट ली जा सकती है। हालांकि, अगर रिटर्न और पैसे निकालने की आजादी की बात करें, तो इक्विटी म्यूचुअल फंड ज्यादा बेहतर माने जाते हैं। इसके बावजूद, Job Change Tax Planning में NPS का इस्तेमाल टैक्स कम करने के लिए समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय में ULIP न तो शुद्ध निवेश के लिए आदर्श है और न ही बीमा के लिए। बीमा और निवेश को अलग-अलग रखना ज्यादा सुरक्षित रणनीति मानी जाती है। लंबी अवधि के रिटायरमेंट लक्ष्य को देखते हुए इक्विटी म्यूचुअल फंड में संतुलित निवेश बेहतर रिटर्न दे सकता है। नौकरी बदलते समय पुराने निवेशों की समीक्षा करना और गैर-जरूरी योजनाओं से बाहर निकलना भी Job Change Tax Planning का अहम हिस्सा है।
निवेश विशेषज्ञों का साफ कहना है कि नौकरी बदलते समय जल्दबाजी में कोई भी रिटायरमेंट फंड कैश न करें। सुपरएन्यूएशन और अन्य फंड को ट्रांसफर करना टैक्स के लिहाज से ज्यादा फायदेमंद होता है। टैक्स बचाने के लिए NPS का सहारा लिया जा सकता है, जबकि लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड पर ध्यान देना चाहिए। सही जानकारी, धैर्य और समझदारी के साथ की गई Job Change Tax Planning न सिर्फ टैक्स से बचाती है, बल्कि आपके भविष्य को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है।
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