रेलवे सेक्टर की जानी-पहचानी सरकारी कंपनी इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) के शेयर में हाल के दिनों में तेज कमजोरी देखने को मिली है। 25 फरवरी को जैसे ही शेयर बाजार खुला, IRFC के स्टॉक पर बिकवाली हावी हो गई। कुछ ही समय में शेयर करीब 4 प्रतिशत तक गिरकर बीएसई पर लगभग 104.75 रुपये तक पहुंच गया। यह स्तर पिछले 52 हफ्तों में सबसे निचला माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह रही कि उस दिन बाजार के ज्यादातर शेयरों में तेजी थी, लेकिन IRFC का भाव नीचे की ओर फिसलता रहा। इससे साफ संकेत मिला कि इस गिरावट के पीछे किसी खास वजह का असर है, न कि पूरे बाजार की कमजोरी।
IRFC शेयर में गिरावट की सबसे बड़ी वजह केंद्र सरकार का ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए हिस्सेदारी बेचने का निर्णय माना जा रहा है। सरकार ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बाजार में उतारने की योजना बनाई है। इस प्रक्रिया के तहत कुल मिलाकर 4 प्रतिशत तक शेयर बेचे जा सकते हैं। पहले चरण में 25 फरवरी को यह ऑफर संस्थागत निवेशकों के लिए खोला गया, जबकि 26 फरवरी को खुदरा निवेशकों को इसमें भाग लेने का मौका दिया गया। शुरुआती दौर में लगभग 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए रखी गई। जैसे ही यह खबर बाजार में फैली, निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ गई कि शेयरों की सप्लाई बढ़ने से कीमत पर दबाव पड़ सकता है।
फिलहाल IRFC में सरकार की हिस्सेदारी करीब 86.36 प्रतिशत है। शेयर बाजार के नियमों के मुताबिक किसी भी सूचीबद्ध कंपनी में सार्वजनिक हिस्सेदारी एक तय न्यूनतम स्तर पर होनी चाहिए। इसी नियम का पालन करने के लिए सरकार धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी कम कर रही है। निवेशकों का मानना है कि भविष्य में भी सरकार इस तरह के कदम उठा सकती है। यही आशंका कई निवेशकों को सतर्क बना रही है और अल्पकाल में शेयर पर दबाव बनाए हुए है।
दिसंबर 2025 तिमाही के अंत तक IRFC में 51 लाख से अधिक खुदरा निवेशक जुड़े हुए थे। इन निवेशकों के पास कंपनी की करीब 9.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसका मतलब यह है कि बड़ी संख्या में आम लोग इस रेलवे पीएसयू स्टॉक में निवेश कर चुके हैं। कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 1.37 लाख करोड़ रुपये के आसपास है, जिससे यह रेलवे सेक्टर की प्रमुख कंपनियों में शामिल होती है। ऐसे में शेयर के भाव में आई गिरावट का असर बड़ी संख्या में निवेशकों की पूंजी पर पड़ता है।
IRFC के ताजा वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि कंपनी का कारोबार स्थिर और लाभ में चल रहा है। अक्टूबर से दिसंबर 2025 की तिमाही में कंपनी ने 6,661 करोड़ रुपये से अधिक का रेवेन्यू दर्ज किया। इसी अवधि में शुद्ध मुनाफा करीब 1,802 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष 2025 के दौरान कंपनी का कुल राजस्व 27,000 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया, जबकि सालाना मुनाफा लगभग 6,500 करोड़ रुपये के करीब रहा। इन आंकड़ों से यह साफ है कि कंपनी की कमाई और मुनाफे में लगातार मजबूती बनी हुई है।
शेयर बाजार में केवल कंपनी के नतीजे ही कीमत तय नहीं करते। जब किसी बड़ी हिस्सेदारी को बाजार में उतारने की खबर आती है, तो निवेशकों को यह डर रहता है कि ज्यादा शेयर आने से भाव और गिर सकता है। इसी आशंका के चलते कई निवेशकों ने मुनाफावसूली की या जोखिम से बचने के लिए अपनी होल्डिंग घटाई। यही कारण है कि मजबूत कारोबारी स्थिति के बावजूद IRFC शेयर में कमजोरी दिखी।
बीते एक साल में IRFC शेयर ने काफी उतार-चढ़ाव देखा है। इसका 52 हफ्तों का उच्च स्तर करीब 148.90 रुपये रहा है, जबकि मौजूदा स्तर इससे काफी नीचे है। पिछले छह महीनों में शेयर करीब 15 प्रतिशत तक टूट चुका है। इससे उन निवेशकों को नुकसान हुआ है, जिन्होंने ऊंचे दाम पर खरीदारी की थी। हालांकि, कुछ निवेशक इसे लंबी अवधि के लिए खरीदारी का अवसर भी मान रहे हैं।
रेलवे सेक्टर में सरकार का फोकस लगातार बढ़ रहा है और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर खर्च भी तेज हुआ है। IRFC का मुख्य काम रेलवे को फाइनेंस उपलब्ध कराना है, इसलिए लंबी अवधि में कंपनी के कारोबार में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। हालांकि, अल्पकाल में सरकारी हिस्सेदारी बिक्री से शेयर पर दबाव रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्यों को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी चाहिए। सही जानकारी और धैर्य के साथ लिया गया फैसला ही लंबे समय में बेहतर नतीजे दे सकता है।
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