देश में महंगाई हर परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती रही है।(Inflation in India 2026) खाने-पीने का सामान, रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल, दवाइयाँ और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें जब महंगी होती हैं, तो सबसे ज्यादा असर आम आदमी के बजट पर पड़ता है। बीते कुछ समय में लोगों ने महंगाई का दबाव साफ महसूस किया है। लेकिन अब एक सरकारी बैंक की रिसर्च रिपोर्ट ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले साल 2026 में देश में महंगाई का स्तर धीरे-धीरे नीचे आ सकता है। इसमें सरकार द्वारा किए गए जीएसटी सुधारों और आर्थिक नीतियों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। यही कारण है कि Inflation in India 2026 को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जीएसटी दरों में किए गए हालिया बदलावों का असर अब आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। सितंबर से नवंबर के बीच खुदरा महंगाई में लगभग 25 बेसिस पॉइंट की कमी दर्ज की गई है। यह भले ही सुनने में छोटा आंकड़ा लगे, लेकिन इसका सीधा मतलब है कि उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे राहत मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो वित्त वर्ष 2025-26 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई में कुल मिलाकर लगभग 35 बेसिस पॉइंट तक की गिरावट आ सकती है। यही वजह है कि Inflation in India 2026 को लेकर अनुमान पहले से ज्यादा मजबूत हो गए हैं।
महंगाई में कमी का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलेगा। रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों पर खर्च कम होगा और लोगों की बचत बढ़ सकती है। इसके अलावा व्यापार और बाजार में भी सकारात्मक माहौल बनेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।
हालांकि नवंबर महीने में महंगाई के आंकड़ों ने कुछ हद तक लोगों को परेशान जरूर किया था। कुछ राज्यों में महंगाई दर अपेक्षा से ज्यादा दर्ज की गई। उदाहरण के तौर पर केरल में नवंबर के दौरान महंगाई दर 8 प्रतिशत से अधिक रही। ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा और ज्यादा था, जबकि शहरी इलाकों में महंगाई अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार इसका मुख्य कारण सोना, चांदी और तेल एवं वसा जैसी वस्तुओं की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। इन चीजों का वहां ज्यादा उपयोग होता है, इसलिए महंगाई का असर भी अधिक दिखाई दिया।
इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी अस्थायी है। पूरे देश के स्तर पर देखा जाए तो महंगाई की दिशा आने वाले समय में नीचे की ओर जाने की उम्मीद है। इसलिए Inflation in India 2026 को लेकर घबराने की जरूरत नहीं मानी जा रही है।
रिपोर्ट के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि भारत में सीपीआई महंगाई की चाल में हाल के महीनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अक्टूबर 2025 में महंगाई की मासिक बढ़त करीब 0.25 प्रतिशत थी, जो नवंबर 2025 में बढ़कर 0.71 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बढ़ोतरी लंबे समय तक नहीं टिकेगी। मार्च 2025 तक महंगाई करीब 2.7 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन इसके बाद इसमें स्थिरता आ सकती है।
रुपये की कीमत में गिरावट का असर जरूर महंगाई पर पड़ सकता है, क्योंकि आयात महंगा होता है। लेकिन सरकार और रिजर्व बैंक की नीतियों के चलते इस असर को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है। यही कारण है कि Inflation in India 2026 को लेकर दीर्घकालीन तस्वीर ज्यादा चिंताजनक नहीं लगती।
सरकारी बैंक की रिपोर्ट में आने वाले वर्षों के लिए भी अनुमान दिए गए हैं। इसके अनुसार वित्त वर्ष 2026 में महंगाई करीब 1.8 प्रतिशत रह सकती है। वहीं वित्त वर्ष 2027 में इसके बढ़कर लगभग 3.4 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसका साफ मतलब है कि महंगाई पूरी तरह खत्म नहीं होगी, लेकिन यह नियंत्रण में रह सकती है। यही वजह है कि Inflation in India 2026 को एक संतुलित और संभली हुई स्थिति के रूप में देखा जा रहा है।
इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फरवरी में होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक स्थिर नीति अपनाए रख सकता है।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड ग्लोबल रिसर्च की एक रिपोर्ट में भी जीएसटी कटौती को लेकर सकारात्मक अनुमान लगाए गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार अगर जीएसटी दरों में समय पर और सही तरीके से कटौती की जाती है, तो इससे भारत की जीडीपी में 0.1 से 0.16 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही सालाना महंगाई 40 से 60 बेसिस पॉइंट तक कम हो सकती है। यह अनुमान भी Inflation in India 2026 के कम रहने की संभावना को मजबूत करता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जीएसटी में कटौती से सरकार के राजस्व को बहुत बड़ा नुकसान नहीं होगा। इससे सरकारी खर्च और आय को लेकर बनी चिंताएं भी कम हो सकती हैं। हालांकि संयुक्त राजकोषीय घाटे पर थोड़ा दबाव बना रह सकता है, लेकिन कुल मिलाकर आर्थिक स्थिति संतुलित रहने की उम्मीद जताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी में किए गए बदलाव सही समय पर उठाया गया कदम हैं। वैश्विक स्तर पर व्यापार और टैरिफ से जुड़ी चुनौतियों के बीच ये सुधार भारत की आर्थिक वृद्धि को सहारा दे सकते हैं। इसके अलावा जीएसटी प्रक्रिया में सुधार, जैसे तेज पंजीकरण और रिफंड सिस्टम, कारोबारियों के लिए काम करना आसान बनाएंगे। इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बनेंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मजबूत अर्थव्यवस्था का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है और कीमतों में स्थिरता आती है। इस तरह Inflation in India 2026 को लेकर उम्मीदें और पुख्ता होती हैं।
कुल मिलाकर मौजूदा संकेत बताते हैं कि आने वाला साल महंगाई के मोर्चे पर राहत भरा हो सकता है। जीएसटी सुधार, सरकारी नीतियां और आर्थिक स्थिरता मिलकर महंगाई को काबू में रखने में मदद कर सकती हैं। हालांकि वैश्विक हालात और कच्चे तेल की कीमतें जैसे कारक जोखिम बने रहेंगे, लेकिन फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में महंगाई का दबाव पहले की तुलना में कम हो सकता है। Inflation in India 2026 को लेकर यह सकारात्मक तस्वीर न सिर्फ आम जनता के लिए सुकून देने वाली है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी शुभ संकेत मानी जा रही है।https://www.agravocals.com/news/business/india/inflation-will-decrease-in-2026-predicts-this-government-owned-bank/59731
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