दुनिया इस समय ऐसे दौर से गुजर रही है (Indian Rupee Forecast) जहाँ हर राजनीतिक या सैन्य घटना का असर सीधा आर्थिक बाजारों पर पड़ रहा है। इसी उथल-पुथल का असर भारतीय रुपये पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कई दिनों से रुपया लगातार दबाव में है और मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाला सप्ताह भारतीय मुद्रा के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और अमेरिका की सक्रिय सैन्य भूमिका जैसे कारकों ने बाज़ार की भावना को कमजोर कर दिया है। इन परिस्थितियों में Indian Rupee Forecast फिलहाल यह संकेत दे रहा है कि रुपया डॉलर के मुकाबले और नीचे जा सकता है और 91 का स्तर दोबारा छू सकता है।
जब वैश्विक माहौल अस्थिर होता है, तो निवेशक सबसे पहले जोखिम से बचने की कोशिश करते हैं। वे सुरक्षित विकल्पों की ओर भागते हैं और अमेरिकी डॉलर की मांग अचानक बढ़ जाती है। यही कारण है कि डॉलर मजबूत होता जाता है और उभरते बाजारों की मुद्राएं, जैसे भारतीय रुपया, दबाव में आ जाती हैं। मौजूदा समय में यही तस्वीर सामने आ रही है। रुपये की कमजोरी अब केवल घरेलू कारणों से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से भी गहराई से जुड़ गई है, और यही वजह है कि Indian Rupee Forecast इस समय निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतें किसी भी देश की मुद्रा की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं, खासकर भारत जैसे देश के लिए जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है। वेनेजुएला में अमेरिका की बढ़ती सैन्य सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएँ पैदा कर दी हैं। इस अनिश्चितता का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है और जब तेल महंगा होता है, तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे व्यापार घाटा बढ़ता है और रुपये पर दबाव और तेज हो जाता है।
भले ही भारत वेनेजुएला से सीधे बहुत कम तेल खरीदता हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर भारत पर पूरी ताकत से पड़ता है। इसीलिए मौजूदा स्थिति में Indian Rupee Forecast यह दर्शाता है कि यदि तेल की कीमतों में और तेजी आई तो रुपये की कमजोरी और गहराएगी।
पिछले दो हफ्तों से रुपये में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। सोमवार को भी शुरुआती कारोबार में रुपया कमजोर ही नजर आया। विदेशी निवेशक इस समय भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, क्योंकि उन्हें वैश्विक अनिश्चितता के बीच जोखिम उठाना ठीक नहीं लग रहा। जब विदेशी पूंजी बाहर जाती है, तो रुपये की मांग घट जाती है और डॉलर की मांग बढ़ जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि रुपया और कमजोर हो जाता है।
बैंकिंग सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार कमजोर रुपये की दिशा में बढ़ रहा है और यह कहना मुश्किल है कि यह गिरावट कहाँ जाकर रुकेगी। आरबीएल बैंक के वरिष्ठ अधिकारी अंशुल चंदक के अनुसार, मौजूदा माहौल में करेंसी बाजार सबसे अधिक संवेदनशील हो गया है और रुपया वैश्विक घटनाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। यही कारण है कि Indian Rupee Forecast फिलहाल स्थिरता नहीं बल्कि अस्थिरता की ओर इशारा कर रहा है।
पिछले सप्ताह रुपया डॉलर के मुकाबले 90 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। यह स्तर बाजार के लिए बेहद अहम माना जाता है। जब कोई मुद्रा इस स्तर से नीचे जाती है तो बाजार में डर का माहौल बन जाता है और बिकवाली तेज हो जाती है। अब निवेशकों की नजरें सीधे 91 पर टिक गई हैं।
सीएसबी बैंक के ट्रेजरी हेड आलोक सिंह का कहना है कि पिछले कुछ सत्रों से रुपये में कमजोरी का रुझान बना हुआ है। उनके अनुसार, जब तक आरबीआई का अगला बड़ा कदम बाजार में असर नहीं दिखाता, तब तक रुपया 90.50 से 91 के दायरे में और नीचे जा सकता है। इस पूरे परिदृश्य को देखते हुए Indian Rupee Forecast फिलहाल नकारात्मक झुकाव दिखा रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक 13 जनवरी को 10 अरब डॉलर का तीन साल का डॉलर-रुपया स्वैप ऑपरेशन करने जा रहा है। इस प्रक्रिया में बैंक आरबीआई को डॉलर देंगे और बदले में रुपये प्राप्त करेंगे। इसका मकसद बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाना और रुपये पर से दबाव कम करना है। हालांकि इस कदम का असर धीरे-धीरे दिखाई देगा। तब तक रुपये में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
यदि आरबीआई आगे भी मजबूती से हस्तक्षेप करता है, तो संभव है कि रुपये को कुछ राहत मिले। लेकिन जब तक वैश्विक हालात सुधरते नहीं हैं, तब तक Indian Rupee Forecast किसी मजबूत रिकवरी की गारंटी नहीं देता।
पिछले महीने रुपया डॉलर के मुकाबले 91.14 के अपने अब तक के सबसे निचले स्तर तक पहुँच चुका है। यह भारतीय मुद्रा के इतिहास में एक बड़ा झटका माना गया था। उसके बाद थोड़ी रिकवरी जरूर आई, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार को डर है कि यह रिकॉर्ड फिर से टूट सकता है।
2025 में रुपया पहले ही लगभग 5% कमजोर हो चुका है, जो कई वर्षों का सबसे खराब प्रदर्शन है। कमजोर निर्यात, बढ़ता व्यापार घाटा, विदेशी निवेशकों की निकासी और अमेरिका की सख्त व्यापार नीतियाँ — ये सभी मिलकर रुपये को दबाव में डाल रहे हैं। इन सभी कारणों को देखते हुए Indian Rupee Forecast फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्कता का संकेत दे रहा है।
इस समय मुद्रा बाजार बेहद संवेदनशील हो चुका है। छोटे-छोटे घटनाक्रम भी बड़े उतार-चढ़ाव पैदा कर सकते हैं। आम निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और जोखिम प्रबंधन पर खास ध्यान देना चाहिए। जो लोग आयात-निर्यात या विदेशी लेन-देन से जुड़े हैं, उनके लिए यह दौर विशेष सतर्कता का है।
कुल मिलाकर, वैश्विक राजनीति, कच्चे तेल की चाल, अमेरिकी रणनीति और आरबीआई की नीतियाँ — ये सभी मिलकर आने वाले दिनों में रुपये की दिशा तय करेंगी। फिलहाल बाजार का झुकाव कमजोर रुपये की ओर है और यही कारण है कि Indian Rupee Forecast 91 के स्तर को लेकर गंभीर चेतावनी दे रहा है। यदि वैश्विक हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाला सप्ताह भारतीय मुद्रा के लिए और भी कठिन साबित हो सकता है।https://www.prabhatkhabar.com/business/donald-trump-india-tariff-russian-oil-trade-threat-concerns
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