आज के समय में बच्चों की परवरिश आसान नहीं रह गई है।(How To Raise Your Kid) माता-पिता को हर दिन किसी न किसी नई चुनौती का सामना करना पड़ता है। मोबाइल, इंटरनेट और हर कदम पर मौजूद जानकारी की वजह से बच्चे पहले से ज्यादा जागरूक और उत्सुक हो गए हैं। ऐसे में जब बच्चा किसी बात पर बहस करता है, सवाल पूछता है या अपनी अलग राय रखता है, तो कई माता-पिता उसे गलत समझ बैठते हैं। लेकिन क्या बच्चों का बहस करना वाकई गलत है? एक्सपर्ट्स और साइंस इस बारे में क्या कहते हैं? और आधुनिक पेरेंटिंग यानी How To Raise Your Kid आज के समय में कैसे की जानी चाहिए? चलिए बहुत सरल भाषा में समझते हैं।
पुराने समय में बच्चों को ज्यादा बोलने या तर्क करने की अनुमति नहीं दी जाती थी, लेकिन आज का समय अलग है। बच्चे अधिक समझदार, जागरूक और संवेदनशील हैं। जब बच्चा माता-पिता से बहस करता है, तो इसका मतलब यह नहीं होता कि वह बदतमीज़ है। बल्कि कई बार यह उसकी बढ़ती सोच, आत्मविश्वास और स्वतंत्र विचारों का संकेत होता है।
मनोविज्ञान के अनुसार, जब बच्चा अपनी बात स्पष्ट रूप से कहता है या आपकी राय से असहमत होता है, तो यह उसके दिमाग के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह प्रक्रिया उसे आगे चलकर सही-गलत का निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। इसलिए आधुनिक पेरेंटिंग How To Raise Your Kid बच्चों की राय सुनने और समझने पर आधारित मानी जाती है।
आज का बच्चा चीज़ों को समझना चाहता है। वह हर बात पर “क्यों” पूछता है। यह उसका स्वभाव है और उसकी सीखने की प्रक्रिया भी। यदि बच्चा सवाल नहीं पूछेगा, बहस नहीं करेगा या अपनी बात नहीं कहेगा, तो वह अंदर ही अंदर डर और दबाव महसूस कर सकता है।
जब बच्चा तर्क करता है:
इन सभी चीज़ों का असर उसकी पूरी जिंदगी पर पड़ता है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि How To Raise Your Kid का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा संवाद है, ना कि सिर्फ आदेश देना।
हर बहस गलत नहीं होती। फर्क सिर्फ तरीके का है। यदि बच्चा गुस्से में, चिल्लाकर या अपमानजनक भाषा में बात कर रहा है, तो यह ठीक नहीं। लेकिन अगर बच्चा शांत मन से, तर्क के साथ और सम्मान के साथ अपनी बात कह रहा है, तो यह पूरी तरह सही है।
हेल्दी बहस से बच्चे को ये फायदे मिलते हैं:
इसलिए जब बच्चा आपसे बात करता है, बहस करता है या सवाल पूछता है, तो उसे तुरंत गलत न समझें। यह उसकी ग्रोथ का हिस्सा है और How To Raise Your Kid की मूल भावना भी यही है।
बहस के समय माता-पिता का व्यवहार ही बच्चे को यह सिखाता है कि दुनिया में कैसे बातचीत करनी चाहिए। यदि आप प्यार और शांति से जवाब देंगे, तो बच्चा भी वही सीखता है। लेकिन यदि आप गुस्से में चिल्लाएंगे, अपमान करेंगे या डराएंगे, तो बच्चा भावनात्मक रूप से कमजोर हो सकता है।
कुछ सही तरीके:
यही वे छोटे-छोटे कदम हैं जो माता-पिता को बताते हैं कि How To Raise Your Kid को सही ढंग से कैसे अपनाया जाए।
जब बच्चा जानता है कि उसकी बात घर में सुनी जाती है, तो वह खुद पर विश्वास करना सीखता है। उसे लगता है कि उसकी राय की कीमत है, और यह भावनात्मक मजबूती का सबसे बड़ा आधार है। ऐसे बच्चे निर्णय लेने में भी बेहतर होते हैं और आगे जाकर नेतृत्व कौशल भी विकसित कर लेते हैं।
अगर माता-पिता हर बहस को झगड़ा समझकर रोक देंगे, तो बच्चा धीरे-धीरे डरपोक, दबावग्रस्त और इंसेक्योर महसूस कर सकता है। इसलिए उसे बोलने देना, तर्क करने देना और सोचने देना जरूरी है। यह How To Raise Your Kid का सबसे स्वस्थ तरीका माना जाता है।
बहस तभी गलत होती है जब वह चिल्लाहट, अपमान या गुस्से में बदल जाए। इसलिए कोशिश करें कि बातचीत हमेशा शांत और सम्मानजनक रहे। बच्चा गलत भी हो तो उसे प्यार से समझाएं, न कि उसकी गलती निकालकर उसे छोटा महसूस कराएं।
रिश्ता तभी मजबूत होता है जब दोनों तरफ से सम्मान हो। बच्चा भी एक इंसान है, उसके भी भाव हैं, उसकी भी सोच है। उसे सिर्फ आदेश से नहीं, बल्कि समझ और धैर्य से संभालना चाहिए। यही आज की असली पेरेंटिंग है और यही सही तरीका है How To Raise Your Kid।
हाँ, बच्चे का बहस करना बिल्कुल सामान्य और कई बार उपयोगी भी होता है—बस यह बहस सम्मान, शांति और समझदारी के साथ होनी चाहिए। इससे बच्चे की सोच, आत्मविश्वास और भाषा कौशल मजबूत होते हैं। माता-पिता का काम केवल अनुशासन करवाना नहीं होता, बल्कि बच्चे को समझना, उसे दिशा देना और सुरक्षित वातावरण देना भी उतना ही जरूरी है।
इसलिए अगली बार जब बच्चा किसी बात पर तर्क करे, तो उसे रोकने की बजाय उसकी बात सुनें। हो सकता है वही छोटा-सा पल उसके भविष्य के लिए सबसे मजबूत नींव बन जाए। और यही है आधुनिक पेरेंटिंग—यानी How To Raise Your Kid का असली तरीका।https://timesofindia.indiatimes.com/life-style/parenting/moments/5-reasons-why-parents-should-never-fight-
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