ठंड का मौसम आते ही देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से गिर जाता है।(Heater Health Risk) ऐसे में ठंड से बचने के लिए लोग हीटर का सहारा लेने लगते हैं। घर, दफ्तर और दुकानों में सुबह से रात तक हीटर जलते रहते हैं। कई लोग तो बिना सोचे-समझे पूरी रात हीटर चलाकर सो जाते हैं। बाहर की ठंड से राहत तो मिल जाती है, लेकिन इसी आराम के पीछे एक बड़ा स्वास्थ्य खतरा छिपा हुआ है। हाल के वर्षों में डॉक्टरों ने साफ कहा है कि हीटर का गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। यही वजह है कि अब Heater Health Risk को लेकर लोगों को जागरूक होना बेहद जरूरी हो गया है।
हीटर से निकलने वाली हवा बहुत गर्म और सूखी होती है। यह हवा धीरे-धीरे हमारे शरीर की प्राकृतिक नमी को कम कर देती है। खासकर फेफड़ों और सांस की नली में जो हल्की नमी होती है, वह संक्रमण से बचाने का काम करती है। जब हीटर की सूखी हवा लगातार अंदर जाती है, तो यह नमी खत्म होने लगती है। इसका असर यह होता है कि सांस की नली सूख जाती है, गले में जलन होती है और खांसी शुरू हो जाती है। शुरुआत में यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यही परेशानी आगे चलकर Heater Health Risk का बड़ा कारण बन जाती है।
आजकल अस्पतालों में ऐसे मरीज बढ़ रहे हैं जिन्हें लगातार सूखी खांसी, सांस फूलने और सीने में भारीपन की शिकायत होती है। डॉक्टर इसे “ड्राई लंग्स” की स्थिति कहते हैं। इसका सीधा मतलब है कि फेफड़ों में जरूरी नमी कम हो जाना। लंबे समय तक हीटर के सामने बैठना या बंद कमरे में हीटर चलाना इस समस्या को बढ़ाता है। जब फेफड़ों की सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है, तो धूल, प्रदूषण और कीटाणु आसानी से अंदर चले जाते हैं। इससे संक्रमण और एलर्जी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि Heater Health Risk को केवल आराम से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
हर व्यक्ति पर हीटर का असर एक-सा नहीं होता। जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस या सांस से जुड़ी कोई पुरानी बीमारी है, उनके लिए हीटर का ज्यादा इस्तेमाल बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे लोगों के फेफड़े पहले ही कमजोर होते हैं और सूखी हवा उनकी परेशानी को और बढ़ा देती है। इसके अलावा बुजुर्ग, छोटे बच्चे और दिल के मरीज भी हीटर के गलत इस्तेमाल से जल्दी प्रभावित होते हैं। इन सभी लोगों को Heater Health Risk को समझते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
कई लोग ठंड से बचने के लिए दरवाजे-खिड़कियां पूरी तरह बंद कर लेते हैं और हीटर चला देते हैं। यह आदत सबसे ज्यादा नुकसानदायक मानी जाती है। बंद कमरे में हीटर लंबे समय तक चलने से ताजी हवा का आना-जाना बंद हो जाता है। धीरे-धीरे कमरे में ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और कार्बन डाइऑक्साइड जमा होने लगती है। इसका असर सिर दर्द, चक्कर, घबराहट और सांस घुटने जैसी समस्याओं के रूप में दिख सकता है। कई मामलों में यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसलिए Heater Health Risk से बचने के लिए बंद कमरे में हीटर चलाने से बचना चाहिए।
हीटर के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाली समस्याएं धीरे-धीरे सामने आती हैं। सबसे आम लक्षण है लगातार सूखी खांसी, जो दवा लेने के बाद भी ठीक नहीं होती। इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश, सीने में जकड़न और रात में खांसी बढ़ जाना भी इसके संकेत हैं। कुछ लोगों को सुबह उठते ही गले और मुंह में ज्यादा सूखापन महसूस होता है। अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो इसे हल्के में न लें। यह साफ इशारा हो सकता है कि आप Heater Health Risk की चपेट में आ रहे हैं।
यह कहना गलत होगा कि हीटर का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए। बहुत ज्यादा ठंड में थोड़ी देर के लिए हीटर चलाना नुकसानदायक नहीं होता। समस्या तब शुरू होती है जब हीटर का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा और गलत तरीके से किया जाता है। खासकर रात भर हीटर चलाना शरीर के लिए ठीक नहीं है। नींद के दौरान शरीर को साफ और नम हवा की ज्यादा जरूरत होती है। उस समय हीटर की सूखी हवा फेफड़ों पर गहरा असर डालती है। इसलिए Heater Health Risk से बचने के लिए हीटर का सीमित और समझदारी भरा उपयोग जरूरी है।
हीटर चलाते समय कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर आप खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। हीटर को बहुत तेज तापमान पर न चलाएं। मध्यम तापमान पर हीटर चलाने से शरीर को गर्मी भी मिलती है और हवा ज्यादा सूखी भी नहीं होती। कमरे में थोड़ी वेंटिलेशन जरूर रखें, जैसे खिड़की या दरवाजे का एक हिस्सा खुला रखें। हीटर को बहुत पास रखकर बैठने से बचें और कम से कम दो फीट की दूरी बनाए रखें। सोते समय हीटर बंद रखना सबसे अच्छा विकल्प है। ये सभी उपाय Heater Health Risk को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
हीटर के इस्तेमाल के दौरान कमरे में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप कमरे में पानी से भरा एक बर्तन रख सकते हैं या ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे हवा में नमी बनी रहती है और फेफड़ों पर सूखी हवा का असर कम होता है। साथ ही गुनगुना पानी पीना, सूप या हल्दी वाला दूध लेना शरीर को अंदर से गर्म रखता है। हल्की एक्सरसाइज और योग भी ठंड में शरीर की गर्मी बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे हीटर पर निर्भरता कम होती है और Heater Health Risk से बचाव होता है।
सर्दियों में हीटर से मिलने वाली गर्माहट थोड़े समय के लिए आराम जरूर देती है, लेकिन इसका गलत और ज्यादा इस्तेमाल सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। सूखी खांसी, सांस की तकलीफ और फेफड़ों की नमी कम होना आज के समय में आम समस्या बनती जा रही है। अगर समय रहते सही जानकारी और सावधानी अपनाई जाए, तो इन समस्याओं से बचा जा सकता है। याद रखें, सही तरीके से हीटर का इस्तेमाल और थोड़ी समझदारी आपको Heater Health Risk से सुरक्षित रख सकती है और सर्दियों का मौसम आप स्वस्थ तरीके से एन्जॉय कर सकते हैं।https://www.etvbharat.com/hi/health/why-is-using-heaters-and-blowers-in-a-closed-room-dangerous
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