बाल कहानियाँ

गोलू और उसका उड़ता घर (golu aur uska udta ghar)

गोलू (golu aur uska udta ghar), एक 12 साल का लड़का, अपने गाँव के छोटे से कोठे पर बैठा हुआ था, अपने हाथों में एक रंग-बिरंगी पतंग पकड़े हुए। उसके सपने भी उस पतंग की तरह ही रंगीन थे, जो आसमान में ऊँचे उड़ते थे। गोलू का सबसे बड़ा सपना था कि वह एक उड़ने वाला घर बनाए (udta ghar)—एक ऐसा घर जो हवा में तैर सके, जहाँ से वह पूरी दुनिया को देख सके। उसके लिए यह कोई बचकाना सपना नहीं था; यह एक मिशन था जिसे पूरा करने के लिए वह कुछ भी कर सकता था।

गोलू का गाँव, सुंदरपुर, पहाड़ियों के बीच बसा एक साधारण सा गाँव था। लेकिन गोलू अलग था। उसका दिमाग हमेशा नए आइडियाज़ से भरा रहता था। उसके दोस्त उसे “प्रोफेसर गोलू” कहकर बुलाते थे क्योंकि वह हमेशा कुछ न कुछ प्रयोग करता रहता था। उसके पिता, रमेश, गाँव के स्कूल में टीचर थे, और माँ, गीता, घर संभालती थी। गोलू उनका इकलौता बेटा था, और वे हमेशा उसके सपनों का समर्थन करते थे, चाहे वे कितने भी बड़े या अजीब क्यों न हों।

एक दिन, गोलू ने अपने पिता से कहा, “पापा, मैं एक ऐसा घर बनाना चाहता हूँ जो उड़ सके (udta ghar)। जैसे पतंग उड़ती है, वैसे ही मेरा घर भी उड़ सके।” रमेश मुस्कुराए और बोले, “बेटा, अगर तुम्हारे सपनों को उड़ना है (sapne aur mehnat), तो तुम्हारे विचारों को भी उड़ना होगा। बड़े सपने देखो, और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करो।”

गोलू ने अपने पिता की बात को दिल से लगा लिया। उसने अपने सपने को सच करने की योजना बनानी शुरू कर दी। हर दिन स्कूल के बाद, वह कोठे पर बैठकर डिज़ाइन बनाता और छोटे-छोटे मॉडल तैयार करता। वह पुराने कार्डबोर्ड, प्लास्टिक की बोतलें, और छोटे मोटर्स का इस्तेमाल करके एक प्रोटोटाइप बनाता। गाँव के लोग अक्सर उस पर हँसते थे, लेकिन गोलू को परवाह नहीं थी। उसके लिए, उसका सपना ही सब कुछ था।

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एक रात, जब गोलू अपने मॉडल पर काम कर रहा था, उसने देखा कि उसके घर के पीछे वाली पहाड़ी से एक हल्की सी रोशनी आ रही है। जिज्ञासावश, वह उस रोशनी की तरफ चल पड़ा। पहाड़ी पर पहुँचकर उसने देखा कि वहाँ एक छोटा सा ड्रोन पड़ा हुआ है। ड्रोन के साथ एक नोट भी था, जिस पर लिखा था: “यह ड्रोन तुम्हारे सपनों को उड़ान भरने में मदद करेगा (sapno ko udana)। इसे समझदारी से इस्तेमाल करना।”

गोलू को लगा कि यह कोई मज़ाक है, लेकिन वह ड्रोन को घर ले आया। उसने इसका इस्तेमाल करके अपने मॉडल को उड़ाने की कोशिश की। कुछ ही दिनों में, उसका मॉडल हवा में उड़ने लगा। गाँव के लोग हैरान रह गए। अब कोई उसका मज़ाक नहीं उड़ाता था। सबको लगने लगा कि गोलू का सपना सच हो सकता है (sapna sach hona)।

लेकिन एक दिन, जब गोलू अपने मॉडल का टेस्ट कर रहा था, ड्रोन अचानक बंद हो गया। गोलू ने इसे खोलकर देखा तो उसे एक छोटा सा चिप मिला, जिस पर कुछ कोड लिखे हुए थे। उसे लगा कि ये कोड किसी बड़े राज़ का हिस्सा हैं। उसने अपने पिता से मदद माँगी, लेकिन रमेश को भी कोड समझ नहीं आए। गोलू ने ऑनलाइन रिसर्च की और पता चला कि ये कोड एक हाई-टेक प्रोजेक्ट से जुड़े हैं (plot twist)।

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गोलू ने इस रहस्य को सुलझाने का फैसला किया। उसने अपने दोस्त, चिंटू, के साथ मिलकर एक प्लान बनाया। दोनों ने चिप के कोड को डिकोड किया और पता चला कि यह कोड एक गुप्त प्रयोगशाला से जुड़ा है, जो पहाड़ियों के पीछे छुपी हुई है। एक रात, उन्होंने प्रयोगशाला का रास्ता ढूंढा। वहाँ पहुँचकर उनकी मुलाकात डॉ. वर्मा से हुई, जो गुरुत्वाकर्षण को नियंत्रित करने वाली एक अद्भुत तकनीक पर काम कर रहे थे।

डॉ. वर्मा ने गोलू को देखकर मुस्कुराया और कहा, “तुम गोलू हो न? मैंने तुम्हारे उड़ते घर के सपने के बारे में सुना है (golu ka sapna)। तुम्हारे प्रयोगों ने मुझे प्रेरित किया है।” गोलू हैरान रह गया। डॉ. वर्मा ने समझाया कि वह एक ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जिससे घर हवा में तैर सकें (udta ghar technology)। लेकिन इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए उन्हें एक बच्चे की कल्पना की ज़रूरत थी, जो गोलू के पास थी। डॉ. वर्मा ने गोलू को अपनी टीम में शामिल होने का ऑफर दिया।

गोलू ने यह ऑफर स्वीकार कर लिया। उसने डॉ. वर्मा के साथ काम करना शुरू कर दिया, अपने आइडियाज़ और क्रिएटिविटी को प्रोजेक्ट में लगा दिया। कुछ महीनों बाद, प्रोजेक्ट सफल हो गया। अब घर हवा में तैर सकते थे, जैसा कि गोलू ने सपना देखा था (sapna sach hona)।

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लेकिन एक ट्विस्ट था (plot twist)। डॉ. वर्मा ने बताया कि यह तकनीक सिर्फ अमीर लोगों के लिए होगी। गोलू को बहुत दुख हुआ। उसने सपना देखा था कि यह तकनीक सबके लिए हो, न कि सिर्फ अमीरों के लिए। उसने डॉ. वर्मा को समझाया कि इस तकनीक को सस्ता और सबके लिए उपलब्ध कराया जाए। डॉ. वर्मा गोलू के जज़्बे से प्रभावित हुए और उन्होंने तकनीक को सबके लिए सुलभ बना दिया।

गोलू का उड़ता घर अब सिर्फ उसका सपना नहीं था—यह पूरी दुनिया का सपना बन चुका था (sapno ki udaan)। उसने साबित कर दिया कि कल्पना, मेहनत और थोड़ी सी मदद से कोई भी सपना सच हो सकता है।

कहानी का सार: बड़े सपने देखो (sapne dekhna), मेहनत करो (mehnat karna), और कभी हार मत मानो। कोई भी सपना बड़ा नहीं होता अगर तुम उस पर विश्वास करो और उसे पूरा करने के लिए मेहनत करो।

यह कहानी गोलू के सपनों और उसकी मेहनत को दर्शाती है, और सिखाती है कि अगर हम अपने सपनों पर विश्वास रखें और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करें, तो कुछ भी मुमकिन है।https://www.bhaskar.com/madhurima/news/golu-met-fairies-without-wings-but-he-did-not-like-their-company-know-why-129415118.html

Jiya lal verma

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