भारत में सोना और चांदी (Gold and silver futures prices) को हमेशा से सुरक्षित निवेश और बचत का अहम साधन माना जाता है। यही वजह है कि इनके दामों में हलचल आने पर आम निवेशक से लेकर बड़े व्यापारी तक सभी सतर्क हो जाते हैं। इस समय वायदा बाजार में सोना-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। गुरुवार को घरेलू बाजार (MCX) में सोने के दाम गिरे, जबकि चांदी की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने पर दबाव की असली वजह अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और वहां की केंद्रीय बैंकिंग नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता है। वहीं चांदी को औद्योगिक मांग और निवेशकों की दिलचस्पी का फायदा मिल रहा है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा ₹125 गिरकर ₹1,12,430 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। कारोबार का वॉल्यूम 6,300 से ज्यादा लॉट का रहा। वहीं दिसंबर अनुबंध भी ₹147 टूटकर ₹1,13,500 प्रति 10 ग्राम पर पहुंचा।
यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का रुख सपाट रहा। निवेशक अमेरिकी महंगाई आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के फैसलों को लेकर इंतजार की स्थिति में हैं। बाजार को उम्मीद है कि अगर अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती होती है तो सोने की मांग बढ़ सकती है, लेकिन फिलहाल कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
सोने के मुकाबले चांदी में हल्की तेजी दर्ज हुई। MCX पर दिसंबर डिलीवरी की चांदी ₹124 बढ़कर ₹1,34,126 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। वहीं मार्च 2026 का अनुबंध ₹147 बढ़कर ₹1,35,563 प्रति किलोग्राम पर पहुंचा।
चांदी की मजबूती इस बात की ओर इशारा करती है कि औद्योगिक उपयोग और निवेशक रुचि लगातार बनी हुई है। साथ ही डॉलर की रफ्तार कमजोर पड़ने से भी चांदी को सहारा मिला है।
दुनिया भर के बाजारों की बात करें तो गुरुवार को सोना और चांदी दोनों ही स्थिर भाव से कारोबार कर रहे थे। सोने का दाम $3,768.50 प्रति औंस और चांदी $44.19 प्रति औंस पर बना रहा।
विश्लेषकों का कहना है कि सोना इस समय $3,750 के स्तर के आसपास टिके रहने की कोशिश कर रहा है। इसका बड़ा कारण यह है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना बनी हुई है। इस उम्मीद ने डॉलर की मजबूती को सीमित किया और बुलियन को सहारा मिला।
कमोडिटी बाजार के जानकार मानते हैं कि फिलहाल बाजार की सारी निगाहें अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी हैं। इनमें दूसरी तिमाही का सकल घरेलू उत्पाद (GDP), साप्ताहिक बेरोजगारी दावे (Jobless Claims) और टिकाऊ वस्तुओं के ऑर्डर (Durable Goods Orders) जैसे डेटा शामिल हैं।
सबसे अहम शुक्रवार को जारी होने वाला पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स होगा, जिसे फेड महंगाई का सबसे भरोसेमंद पैमाना मानता है। अगर यह आंकड़ा उम्मीद से कम आता है तो सोना और चांदी दोनों को मजबूती मिलेगी। लेकिन अगर आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत रहे तो सोने पर दबाव और बढ़ सकता है।
फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने हाल ही में कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रही है क्योंकि महंगाई लगातार बनी हुई है और रोजगार बाजार भी दबाव में है। यही वजह है कि ब्याज दरों को लेकर नीति निर्माताओं के बीच मतभेद हैं।
यही असमंजस सोने की कीमतों पर असर डाल रहा है। हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व में जारी तनाव जैसी भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ सोने को “सेफ-हेवन” यानी सुरक्षित निवेश बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों की राय है कि अभी निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। आने वाले समय में सोना और चांदी की चाल पूरी तरह अमेरिकी आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर निर्भर करेगी।
कुल मिलाकर, सोना-चांदी वायदा बाजार फिलहाल अनिश्चितताओं से गुजर रहा है। सोना ₹1,12,430 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹1,34,126 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में अमेरिकी महंगाई डेटा और फेडरल रिजर्व की नीतियाँ तय करेंगी कि सोना-चांदी किस दिशा में जाएंगे। इसलिए निवेशकों को सतर्क रहना और समझदारी से फैसले लेना जरूरी है।
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