तकनीक के दौर में शिक्षा भी तेजी से नया रूप ले रही है। चीन में स्कूलों की पढ़ाई अब सिर्फ किताब और कॉपी तक सीमित नहीं रही। वहां कई स्कूलों में बच्चों के होमवर्क और क्लासवर्क की जांच अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए की जा रही है। पहले जो काम शिक्षक घंटों में करते थे, वही काम अब कुछ ही मिनटों में पूरा हो रहा है। इस नई व्यवस्था को AI ग्रेडिंग सिस्टम कहा जा रहा है, जो चीन की शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है।
चीन में लंबे समय से डिजिटल तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऑनलाइन क्लास, स्मार्ट बोर्ड और डिजिटल पढ़ाई के बाद अब होमवर्क जांच के लिए भी एआई का सहारा लिया जा रहा है। इस सिस्टम की मदद से छात्रों की हाथ से लिखी कॉपियों को स्कैन किया जाता है। इसके बाद कंप्यूटर आधारित सॉफ्टवेयर उत्तरों का मूल्यांकन करता है और अंक तय करता है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ यह है कि स्कूलों में मूल्यांकन प्रक्रिया तेज हो गई है। शिक्षकों को अब हर दिन ढेर सारी कॉपियां जांचने में समय नहीं लगाना पड़ता। वे उस समय का उपयोग बच्चों को बेहतर तरीके से समझाने, उनकी समस्याएं सुनने और पढ़ाई को रोचक बनाने में कर पा रहे हैं।
AI ग्रेडिंग सिस्टम आधुनिक तकनीकों पर आधारित होता है। इसमें मशीन लर्निंग और इमेज पहचान जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। प्रक्रिया की शुरुआत छात्रों की कॉपियों को स्कैन करने से होती है। स्कैन की गई इमेज को सिस्टम पढ़ता है और लिखावट को डिजिटल टेक्स्ट में बदल देता है।
इसके बाद हर सवाल के उत्तर की तुलना पहले से तय किए गए सही उत्तरों से की जाती है। जहां उत्तर सही होता है, वहां अंक दिए जाते हैं और जहां गलती होती है, वहां सिस्टम उसे चिन्हित कर देता है। कुछ स्कूलों में यह तकनीक छात्रों को यह भी बताती है कि गलती कहां हुई और सुधार कैसे किया जा सकता है। इससे छात्रों को तुरंत फीडबैक मिल जाता है और वे अपनी कमजोरियों पर जल्दी काम कर पाते हैं।
चीन के बड़े शहरों में इस तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। शंघाई, बीजिंग और ग्वांगझोउ जैसे शहरों के कई स्कूलों में एआई आधारित होमवर्क जांच प्रणाली शुरू की जा चुकी है। सैकड़ों स्कूल इस तकनीक का नियमित रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं।
कुछ आधुनिक मशीनें बहुत कम समय में बड़ी संख्या में पन्नों की जांच कर सकती हैं। इससे परीक्षा और टेस्ट के परिणाम जल्दी तैयार हो जाते हैं और छात्रों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता।
AI ग्रेडिंग सिस्टम से शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। पहले उन्हें पढ़ाने के साथ-साथ कॉपियां जांचने का दबाव रहता था। अब उनका बोझ काफी कम हो गया है। वे बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे पा रहे हैं और उनके साथ व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर पा रहे हैं।
छात्रों के लिए भी यह प्रणाली उपयोगी साबित हो रही है। जब उन्हें तुरंत पता चलता है कि किस सवाल में गलती हुई है, तो वे उसे जल्दी सुधार सकते हैं। इससे पढ़ाई का स्तर बेहतर होता है और बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बनी रहती है।
हालांकि एआई तकनीक काफी उन्नत है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। गणित और विज्ञान जैसे विषयों में जहां उत्तर साफ और निश्चित होते हैं, वहां एआई अच्छी तरह से काम करता है। लेकिन निबंध, विचारात्मक प्रश्न और रचनात्मक लेखन में भावनाओं और सोच की गहराई को समझना मशीन के लिए अभी भी आसान नहीं है।
इसी कारण कई स्कूलों में रचनात्मक विषयों की जांच शिक्षक खुद करते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि छात्रों की कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति का सही मूल्यांकन हो सके।
AI आधारित शिक्षा प्रणाली के सामने कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। बड़े शहरों में जहां संसाधन और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां इसे आसानी से लागू किया जा रहा है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट, उपकरण और प्रशिक्षण की कमी के कारण यह तकनीक सभी स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रही है।
इसके अलावा, छात्रों के डेटा की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। अगर सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी हो जाए, तो गलत मूल्यांकन की संभावना रहती है। इसलिए कई स्कूलों में एआई द्वारा किए गए मूल्यांकन की समय-समय पर जांच भी की जाती है।
चीन में शिक्षा के क्षेत्र में एआई का उपयोग आने वाले समय में और बढ़ सकता है। भविष्य में ऐसे सिस्टम विकसित हो सकते हैं जो हर छात्र की सीखने की गति और क्षमता को समझकर उसके अनुसार मार्गदर्शन दें। इससे पढ़ाई ज्यादा व्यक्तिगत और प्रभावी बन सकती है।
हालांकि तकनीक चाहे जितनी भी उन्नत हो जाए, शिक्षक की भूमिका कभी खत्म नहीं होगी। बच्चों को सही दिशा देना, उन्हें प्रेरित करना और उनकी भावनाओं को समझना इंसान ही बेहतर तरीके से कर सकता है।
AI ग्रेडिंग सिस्टम ने चीन की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। इससे होमवर्क जांचने की प्रक्रिया तेज और सरल हुई है। शिक्षकों को पढ़ाने के लिए अधिक समय मिल रहा है और छात्रों को तुरंत फीडबैक मिल रहा है। कुछ सीमाओं के बावजूद यह तकनीक शिक्षा को आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आने वाले समय में एआई और शिक्षकों के संयुक्त प्रयास से पढ़ाई का स्तर और बेहतर होने की उम्मीद है।
प्रश्न 1: AI ग्रेडिंग सिस्टम क्या है?
उत्तर: यह एक तकनीक है जो छात्रों की लिखी कॉपियों को स्कैन करके स्वचालित रूप से जांच करती है और अंक देती है।
प्रश्न 2: क्या एआई शिक्षकों की जगह ले लेगा?
उत्तर: नहीं, एआई केवल शिक्षकों का सहायक है। पढ़ाना और बच्चों का मार्गदर्शन करना आज भी शिक्षक ही करते हैं।
प्रश्न 3: क्या यह सिस्टम सभी विषयों में काम करता है?
उत्तर: यह सिस्टम गणित और विज्ञान जैसे विषयों में अधिक प्रभावी है, जबकि रचनात्मक लेखन में अभी भी शिक्षक की भूमिका जरूरी है।
प्रश्न 4: क्या इस तकनीक में गलतियां हो सकती हैं?
उत्तर: हां, तकनीकी कारणों से कभी-कभी गलत मूल्यांकन हो सकता है, इसलिए मानव निगरानी जरूरी है।
प्रश्न 5: क्या भविष्य में यह तकनीक अन्य देशों में भी अपनाई जाएगी?
उत्तर: संभावना है कि आने वाले समय में कई देश शिक्षा में एआई का उपयोग शुरू करेंगे।
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