साल 2025 केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव जैसा है, क्योंकि इसी साल 7वें वेतन आयोग को लागू हुए पूरे दस साल पूरे हो जाते हैं। 1 जनवरी 2016 को शुरू हुई यह वेतन व्यवस्था अब अपने पूरे वेतन चक्र के आखिरी मोड़ पर खड़ी है। इन दस वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई, खर्चों की आदतें और कर्मचारियों की जरूरतें – सब कुछ बदल चुका है। इसलिए आज यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि 7th Pay Commission Salary Increase ने वास्तव में कर्मचारियों की जेब और जीवन पर कितना असर डाला।
आज जब 8वें वेतन आयोग की चर्चाएं तेज हो रही हैं, तो बीते दस वर्षों का पूरा गणित समझना हर कर्मचारी के लिए जरूरी है।
2015 के अंत में जब 6वां वेतन आयोग समाप्त हुआ, तब देश में महंगाई अपने उच्च स्तर पर थी। इसका सीधा असर कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते पर दिखाई देता था। उस समय लेवल-1 कर्मचारी की बेसिक सैलरी 7,000 रुपये और ग्रेड पे 1,800 रुपये था। इस तरह कुल बेसिक 8,800 रुपये होती थी। उस पर 119 प्रतिशत तक DA मिल रहा था, जो लगभग 10,400 रुपये के आसपास बैठता था।
महानगरों में रहने वाले कर्मचारियों को लगभग 2,600 रुपये HRA के रूप में मिल जाता था। अगर इन सबको जोड़ा जाए, तो ट्रांसपोर्ट और दूसरे छोटे भत्तों को हटाकर भी कर्मचारी की कुल सैलरी लगभग 21,800 से 22,000 रुपये के करीब पहुंच जाती थी। यानी 6वें वेतन आयोग के आखिरी वर्षों में DA ने महंगाई की मार को काफी हद तक संभाल रखा था।
1 जनवरी 2016 से लागू हुए 7वें वेतन आयोग ने पूरी वेतन प्रणाली को नए रूप में पेश किया। सबसे चर्चित बदलाव था फिटमेंट फैक्टर 2.57। इसका मतलब यह हुआ कि 6वें वेतन आयोग की बेसिक सैलरी को 2.57 से गुणा करके नई बेसिक तय की गई।
साथ ही, वर्षों से चल रहा ग्रेड पे सिस्टम पूरी तरह खत्म कर दिया गया और उसकी जगह पे मैट्रिक्स लागू की गई, जिससे वेतन वृद्धि की पूरी संरचना ज्यादा साफ और पारदर्शी हो गई। लेवल-1 कर्मचारी की नई बेसिक सैलरी सीधे 18,000 रुपये तय की गई।
हालांकि शुरुआत में DA को फिर से शून्य कर दिया गया, इसलिए कई कर्मचारियों को शुरुआती दौर में ऐसा लगा कि 7th Pay Commission Salary Increase उतना प्रभावी नहीं है जितनी उम्मीद की जा रही थी।
2025 में पहुंचते-पहुंचते तस्वीर बिल्कुल साफ हो चुकी है। अब DA लगभग 58 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। 18,000 रुपये की बेसिक पर यह DA करीब 10,400 रुपये बनता है, यानी वही रकम जो 6वें वेतन आयोग के आखिरी समय पर मिल रही थी।
सबसे बड़ा बदलाव HRA में दिखाई देता है। X श्रेणी के शहरों में HRA बढ़कर लगभग 5,400 रुपये तक पहुंच चुका है। इस तरह केवल बेसिक, DA और HRA को जोड़ दें तो आज लेवल-1 कर्मचारी की कुल सैलरी लगभग 33,500 से 34,000 रुपये के आसपास पहुंच गई है।
अगर इसमें ट्रांसपोर्ट और अन्य भत्ते जोड़ दिए जाएं, तो कुल वेतन इससे भी ऊपर चला जाता है।
अगर पूरे आंकड़ों को सीधे-सीधे रखा जाए, तो स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है:
यानी लगभग 12,000 रुपये की वृद्धि, जो करीब 55 प्रतिशत की कुल बढ़ोतरी है। यह बढ़ोतरी सुनने में अच्छी लगती है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा DA और HRA से आया है। 2016 से लेकर आज तक बेसिक सैलरी 18,000 रुपये पर ही स्थिर बनी हुई है।
यही कारण है कि 7th Pay Commission Salary Increase ने राहत तो दी, लेकिन लंबे समय में कर्मचारियों की असली समस्या का समाधान पूरी तरह नहीं हो पाया।
इन दस वर्षों में महंगाई, घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजमर्रा की जरूरतों का खर्च लगातार बढ़ता गया है। जबकि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी वहीं की वहीं रुकी रही। चूंकि हर भत्ता बेसिक से ही जुड़ा होता है, इसलिए बेसिक का न बढ़ना कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
DA से अस्थायी राहत मिलती है, लेकिन स्थायी समाधान केवल बेसिक सैलरी बढ़ाने से ही आता है। इसी वजह से अब कर्मचारी केवल DA बढ़ोतरी से संतुष्ट नहीं हैं।
अब पूरा देश 8वें वेतन आयोग की ओर देख रहा है। कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांगें साफ हैं:
कर्मचारियों का मानना है कि अगला वेतन आयोग अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक जरूरत बन चुका है।
पिछले दस वर्षों में 7th Pay Commission Salary Increase ने कर्मचारियों को स्थिरता और भरोसा जरूर दिया, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि महंगाई की तेज रफ्तार के सामने वेतन संरचना अब कमजोर पड़ने लगी है। कुल सैलरी में लगभग 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, पर उसका मुख्य सहारा DA और HRA रहे हैं।
अब कर्मचारियों को उम्मीद है कि 8वां वेतन आयोग उनके लिए केवल राहत नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से एक नई मजबूत शुरुआत लेकर आएगा।https://www.livehindustan.com/business/7th-pay-commission-ends-on-december-31st-what-can-be-salary-hike-for-central-govt-employees-in-8th-pay-commission-201766489602087.html
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