आज के दौर में बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं कि उनके शरीर में कैल्शियम की मात्रा सामान्य बताई जाती है, इसके बावजूद उन्हें हड्डियों में दर्द लगातार बना रहता है। पहले यह परेशानी ज़्यादातर उम्रदराज़ लोगों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब युवा वर्ग भी कमर दर्द, घुटनों के दर्द, जोड़ों की जकड़न और शरीर में कमजोरी की शिकायत करने लगा है। कई बार लोग जांच करवाते हैं और रिपोर्ट में कैल्शियम की कमी नहीं निकलती, फिर भी दर्द कम नहीं होता। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कैल्शियम पर्याप्त है तो हड्डियों में दर्द क्यों हो रहा है?
दरअसल, हड्डियों की सेहत केवल कैल्शियम पर निर्भर नहीं होती। शरीर में कैल्शियम को सही तरह से काम करने के लिए कुछ जरूरी विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है। इनमें सबसे अहम भूमिका विटामिन डी निभाता है। अगर शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाए, तो कैल्शियम मौजूद होने के बावजूद हड्डियों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाता। इसका नतीजा यह होता है कि हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और व्यक्ति को हड्डियों में दर्द महसूस होने लगता है।
विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। जब इस विटामिन की कमी हो जाती है, तो हड्डियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। ऐसे में व्यक्ति को कमर में दर्द, पैरों में भारीपन, घुटनों में अकड़न और शरीर में कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। कई लोगों को सुबह उठते समय शरीर में जकड़न महसूस होती है और थोड़ी दूर चलने पर ही थकान होने लगती है।
आजकल की जीवनशैली भी इस समस्या को बढ़ा रही है। लोग ज़्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर बिताते हैं। सुबह की धूप से दूरी बना ली गई है, जबकि विटामिन डी का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत सूर्य की रोशनी ही है। धूप में कम निकलने की आदत भी युवाओं में हड्डियों में दर्द के मामलों को बढ़ा रही है।
हड्डियों और जोड़ों में दर्द का कारण सिर्फ विटामिन डी की कमी ही नहीं होती। कई बार विटामिन बी12 की कमी से नसों में कमजोरी, हाथ-पैरों में झनझनाहट और शरीर में थकान बनी रहती है। इसी तरह मैग्नीशियम की कमी से मांसपेशियों में खिंचाव, ऐंठन और जोड़ों में दर्द की शिकायत हो सकती है। ये सभी पोषक तत्व मिलकर हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं।
अगर लंबे समय से आपको नीचे दिए गए लक्षण परेशान कर रहे हैं, तो यह शरीर में पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है:
इन संकेतों को नजरअंदाज करना सही नहीं है। समय पर जांच कराने से समस्या की सही वजह पता चल सकती है।
कुछ लोगों में विटामिन डी की कमी होने की संभावना ज्यादा रहती है। जैसे:
अगर आप इनमें से किसी श्रेणी में आते हैं और आपको बार-बार हड्डियों में दर्द होता है, तो विटामिन डी की जांच करवाना फायदेमंद हो सकता है।
हड्डियों को स्वस्थ रखने और दर्द से राहत पाने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ बदलाव बेहद जरूरी हैं:
रोज सुबह धूप लें:
प्रतिदिन 20 से 30 मिनट सुबह की हल्की धूप में बैठना या टहलना शरीर में विटामिन डी बढ़ाने का आसान तरीका है।
संतुलित और पौष्टिक आहार लें:
डाइट में दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली, मशरूम और सोया जैसे खाद्य पदार्थ शामिल करें। इससे हड्डियों को जरूरी पोषण मिलता है।
डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें:
अगर जांच में विटामिन डी या बी12 की कमी पाई जाती है, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर सप्लीमेंट लिया जा सकता है।
नियमित व्यायाम करें:
रोजाना हल्की एक्सरसाइज, वॉक और योग करने से हड्डियां मजबूत होती हैं और दर्द में कमी आती है।
लाइफस्टाइल में सुधार करें:
लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम न करें, बीच-बीच में शरीर को आराम दें और पर्याप्त नींद लें।
अगर हड्डियों में दर्द लंबे समय तक बना रहे, सूजन हो जाए, चलने में दिक्कत आने लगे या दर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाए, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। समय रहते जांच और इलाज कराने से भविष्य में होने वाली गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
अगर कैल्शियम की मात्रा सामान्य होने के बावजूद हड्डियों में दर्द बना रहता है, तो इसके पीछे विटामिन डी, विटामिन बी12 या मैग्नीशियम की कमी बड़ी वजह हो सकती है। बदलती जीवनशैली, धूप से दूरी और असंतुलित खानपान के कारण यह समस्या आज युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। सही आहार, नियमित धूप, हल्का व्यायाम और समय-समय पर जांच करवाकर हड्डियों को मजबूत रखा जा सकता है और दर्द से राहत पाई जा सकती है।
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