समाचार

सऊदी अरब और MBS की Vision 2030: क्या सच में खत्म होगी तेल पर निर्भरता?

सऊदी अरब और MBS की Vision 2030 : सऊदी अरब (Saudi Arabia) दशकों से अपनी अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल (Crude Oil) पर निर्भर है। यहां तक कि देश की समृद्धि और बजट का सबसे बड़ा आधार यही रहा है। लेकिन लगभग दस साल पहले क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने एक बड़ा दावा किया था। उन्होंने कहा था कि साल 2020 तक सऊदी अरब तेल पर आधारित अर्थव्यवस्था से निकलकर नई दिशा में आगे बढ़ जाएगा। उस समय यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया था।

MBS ने Vision 2030 के नाम से एक महत्वाकांक्षी योजना पेश की थी। इसका मकसद था—देश की “तेल पर निर्भरता” खत्म करके पर्यटन, टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देना। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और विदेशी निवेश आकर्षित करना भी इस योजना का अहम हिस्सा था।

पिछले कुछ सालों में बदलाव तो जरूर हुए हैं—महिलाओं को रोजगार में नए मौके मिले, पर्यटन क्षेत्र में तेजी आई और इलेक्ट्रिक गाड़ियों व सेमीकंडक्टर जैसे उद्योगों ने आकार लेना शुरू किया। लेकिन सवाल यह है कि क्या सऊदी अरब वास्तव में तेल से मुक्त हो पाया है?

तेल पर निर्भरता अब भी जस की तस

2016 में सऊदी अरब की कमाई का लगभग 60% हिस्सा तेल से आता था और आज भी यह अनुपात लगभग उतना ही है। निर्यात में भी 65% से ज्यादा हिस्सा तेल का है। यानी Vision 2030 की घोषणा के कई साल बाद भी तेल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है।

क्राउन प्रिंस MBS ने खुद सऊदी अरब की “Oil Addiction” खत्म करने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में बहुत बड़ी सफलता नहीं मिली। तेल की कीमतों में गिरावट आते ही सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को झटका लगता है, जिससे यह साफ है कि निर्भरता अभी भी बरकरार है।

बढ़ते खर्च और ऊँची तेल कीमत की चुनौती

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुताबिक, सऊदी अरब को अपना बजट संतुलित रखने के लिए अब कम से कम 96 डॉलर प्रति बैरल की तेल कीमत चाहिए। अगर Public Investment Fund (PIF) के निवेश को भी इसमें जोड़ें, तो यह ज़रूरत 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच जाती है।

यह आंकड़ा दिखाता है कि 2016 की तुलना में अब देश को ज्यादा ऊँची तेल कीमतों की ज़रूरत है। इस साल की शुरुआत से ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत करीब 76.50 डॉलर प्रति बैरल रही है। यानी खर्च और आय में बड़ा अंतर है। इसी वजह से सरकार को अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजार से कर्ज लेना पड़ा और घाटा पूरा करने के लिए कुछ संपत्तियाँ बेचने पर विचार करना पड़ा।

Vision 2030 के मेगा प्रोजेक्ट्स और भारी खर्च

Vision 2030 के तहत सऊदी अरब में कई गिगा प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम है Neom City, जो भविष्य का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट है। इसके अलावा रियाद में बनने जा रही घनाकार (Cube-shaped) गगनचुंबी इमारत भी चर्चा में है, जिसका आकार इतना विशाल होगा कि उसके अंदर 20 एम्पायर स्टेट बिल्डिंग आ सकती हैं।

लेकिन इन प्रोजेक्ट्स पर भारी निवेश हो रहा है। पिछले दो सालों से देश हर तिमाही में वित्तीय घाटे का सामना कर रहा है। सरकार ने 2025 में खर्च घटाने की योजना बनाई है, लेकिन मौजूदा हालात में खर्च जरूरत से ज्यादा है।

गैर-तेल अर्थव्यवस्था की रफ्तार

यह भी सच है कि गैर-तेल सेक्टर (Non-Oil Sector) में प्रगति हुई है। 2024 की पहली तिमाही में इस क्षेत्र की ग्रोथ 4.5% से ज्यादा रही। आज गैर-तेल सेक्टर देश की 1.1 ट्रिलियन डॉलर की GDP का आधा हिस्सा बन चुका है।

2016 में गैर-तेल राजस्व करीब 50 अरब डॉलर था, जो 2024 में बढ़कर 134 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह उपलब्धि बड़ी है, लेकिन सरकार के बढ़ते खर्च ने इस बढ़त का असर कम कर दिया है।

Vision 2030: एक लंबी यात्रा

सऊदी सरकार का कहना है कि Vision 2030 कोई छोटी अवधि की योजना नहीं है। यह पीढ़ियों तक चलने वाला परिवर्तन (Generational Transformation) है। वित्त मंत्रालय का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों और क्षेत्रीय अस्थिरता के बावजूद Vision 2030 सही दिशा में आगे बढ़ रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि सऊदी अरब के पास अभी पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं, लेकिन अगर खर्च इसी तरह बढ़ता रहा और तेल की कीमतें कम रहीं तो ये भंडार ज्यादा दिन नहीं टिकेंगे।https://www.capitaleconomics.com/publications/middle-east-north-africa-economics-focus/saudi-vision-2030-where-it-going-right-and

नतीजा

कुल मिलाकर, Vision 2030 ने पर्यटन, टेक्नोलॉजी और गैर-तेल क्षेत्रों में कई सकारात्मक बदलाव लाए हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था अब भी तेल पर ही टिकी हुई है। तेल की कीमतों में गिरावट आते ही वित्तीय स्थिति बिगड़ जाती है।

इसलिए कहना गलत नहीं होगा कि Vision 2030 का सपना अभी अधूरा है। आने वाले सालों में देखना होगा कि क्या सऊदी अरब वास्तव में अपनी “Oil Dependence” को खत्म कर पाएगा या नहीं।

ये भी पढ़े

Amanta Healthcare IPO : आखिरी दिन का अवसर, GMP और सब्सक्रिप्शन जानकारी

Mahindra XUV700 नई कीमत: अब पहले से 1.43 लाख रुपये तक सस्ती, ग्राहकों के लिए सुनहरा मौका

Jiya lal verma

Recent Posts

कार का माइलेज बढ़ाने के बेहतरीन तरीके: कम ईंधन में ज्यादा दूरी कैसे तय करें

आज के दौर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम…

3 hours ago

आयुर्वेदिक पोटली से बंद नाक का इलाज: जुकाम और कंजेशन में तुरंत राहत पाने का देसी उपाय

आयुर्वेदिक पोटली से बंद नाक का इलाज:मौसम का बार-बार बदलना हमारे शरीर के लिए एक…

3 hours ago

Hyundai की नई हाइब्रिड SUVs भारत में एंट्री के लिए तैयार: Creta से Palisade तक मिलेंगे शानदार ऑप्शन

भारत में SUV सेगमेंट लगातार तेजी से बढ़ रहा है और ग्राहक अब ज्यादा स्मार्ट,…

7 hours ago

पेट्रोल-डीजल एक्साइज ड्यूटी कटौती: देशभर में सस्ती हुई पेट्रोल-डीजल की कीमतें

देश में बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो…

8 hours ago

Redmi 15A Smartphone: 6300mAh बैटरी और 5G के साथ किफायती पावरफुल फोन लॉन्च

परिचय भारत में स्मार्टफोन बाजार तेजी से बदल रहा है, खासकर बजट सेगमेंट में जहां…

9 hours ago

डॉलर के मुकाबले रुपया 94 के पार: महंगाई, EMI और आम आदमी की जेब पर गहरा असर (Rupee vs Dollar Update 2026)

भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। हाल…

10 hours ago