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यूपी के 75 जिलों में दीपावली से पहले ‘यूपी स्वदेशी मेला 2025’, CM योगी की मंजूरी

यूपी स्वदेशी मेला 2025:उत्तर प्रदेश सरकार इस बार दीपावली से पहले राज्य के सभी 75 जिलों में ‘स्वदेशी मेला’ आयोजित करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंजूरी के बाद यह योजना लागू होगी। प्रत्येक मेला लगभग 9-10 दिनों तक चलेगा और इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय उत्पादों और कारीगरों को बढ़ावा देना है। इस पहल के माध्यम से छोटे व्यवसायियों और हस्तशिल्पियों को अपने उत्पादों के लिए बड़ा मंच मिलेगा और आम जनता तक देशी उत्पादों की पहुंच आसान होगी।

योजना के तहत ये मेले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के बैनर तले आयोजित होंगे। मेले में सिर्फ उत्तर प्रदेश के ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के ODOP (One District One Product) उत्पाद भी उपलब्ध होंगे। इसका उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को मजबूती देना और कारीगरों को नया बाजार उपलब्ध कराना है। लोगों को इन मेले में पारंपरिक और हस्तशिल्प उत्पाद आसानी से खरीदने का मौका मिलेगा।

एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि राज्य के सभी 75 जिलों में ये मेले दीपावली से पहले आयोजित होंगे और प्रत्येक मेला लगभग 9 से 10 दिनों तक चलेगा। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि लोगों में देशी उत्पादों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें खरीदने के लिए प्रेरित करना भी है। इस पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कारीगरों को अपने हुनर के अनुसार आय का अच्छा स्रोत मिलेगा।

योजना के अंतर्गत हर मेले में यूनिटी मॉल लगाए जाएंगे। इन मॉल में कारीगरों और उद्यमियों के उत्पादों को प्रमुखता से रखा जाएगा। इसका मतलब यह है कि हर जिले का खास उत्पाद वहां उपलब्ध होगा और लोग आसानी से खरीद सकेंगे। यूनिटी मॉल में कपड़े, हस्तशिल्प, घरेलू सजावट की वस्तुएं, ज्वेलरी, हर्बल और ब्यूटी उत्पाद समेत कई तरह के देशी और पारंपरिक उत्पाद बिक्री के लिए रखे जाएंगे।

स्वदेशी मेले का महत्व केवल आर्थिक नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बहुत बड़ा है। ये मेले लोगों को हस्तशिल्प और पारंपरिक कला से परिचित कराएंगे। छोटे कारीगर और स्थानीय उद्यमी अपने उत्पादों को बड़े स्तर पर प्रदर्शित कर सकेंगे। इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना की अनुमति देते हुए कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देना आज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि हम स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देंगे तो कारीगरों और छोटे व्यवसायियों को नई आर्थिक संभावनाएं मिलेंगी। यही कारण है कि इस साल दीपावली से पहले प्रदेश के सभी जिलों में स्वदेशी मेले आयोजित किए जा रहे हैं।

इन मेले के दौरान कारीगरों और उद्यमियों को व्यावसायिक मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग भी मिलेगा। उन्हें छोटे स्टॉल से लेकर बड़े प्रदर्शनी स्थल तक जगह उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, मेले में आने वाले ग्राहकों को सुरक्षित और सुविधाजनक खरीदारी का अनुभव भी मिलेगा। इस पहल से स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी और कारीगरों की आय में सुधार होगा।

यूपी सरकार की यह योजना न केवल कारीगरों और उद्यमियों के लिए फायदेमंद है, बल्कि आम जनता के लिए भी गुणवत्तापूर्ण और देशी उत्पाद खरीदने का मौका देगी। इस पहल से दीपावली का त्योहार और भी खास बन जाएगा। अब लोग सिर्फ मॉल या बाजार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपने जिले के खास ODOP उत्पाद और हस्तशिल्प सीधे मेले से खरीद सकेंगे।

विशेष रूप से यह पहल छोटे कारीगरों के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाने का भी अवसर है। इससे उनकी आय बढ़ेगी और उनका हुनर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सकेगा। स्थानीय व्यवसायों और कारीगरों को बड़ा मंच मिलना राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा।

इस योजना के तहत कारीगरों और उद्यमियों को मार्केटिंग और प्रदर्शन तकनीक पर मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। जिससे वे अपने उत्पाद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकें और ज्यादा ग्राहकों को आकर्षित कर सकें। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के बैनर तले आयोजित ये मेले भविष्य में स्थायी व्यावसायिक प्लेटफॉर्म के रूप में भी काम कर सकते हैं।

निष्कर्ष: दीपावली से पहले प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित किए जाने वाले ‘स्वदेशी मेले’ कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए अवसर हैं। यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को पूरे राज्य में फैलाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह पहल निश्चित रूप से प्रदेश के विकास और स्थानीय उत्पादों की पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।https://network10.in/Politics/Swadeshi-Mela-will-be-organised-in-all-75-districts-before-Diwali-providing

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Jiya lal verma

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