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भारत का इकलौता शहर, जिसका नाम उल्टा या सीधा लिखो नहीं बदलता

भारत में जितने भी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं, हर जगह आपको अलग-अलग शहर और कस्बे देखने को मिलेंगे। हर शहर की अपनी खासियत और पहचान होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में कोई ऐसा शहर भी हो सकता है,(भारत का इकलौता शहर),जिसका नाम चाहे आप उल्टा लिखें या सीधा, बिल्कुल भी न बदले? सुनने में यह अजीब लगता है, लेकिन यह बिल्कुल सच है।

भारत में कितने शहर हैं?

भारत एक विशाल देश है और यहां समय-समय पर होने वाली जनगणना के अनुसार शहरों और कस्बों की संख्या बदलती रहती है। साल 2011 की जनगणना पर नज़र डालें तो पूरे देश में लगभग 7,933 कस्बे और शहर दर्ज किए गए थे। इनमें से करीब 300 से ज्यादा शहर ऐसे हैं जिनकी आबादी 1 लाख से अधिक है। इतनी बड़ी संख्या में शहरों के बीच एक ऐसा भी शहर मौजूद है, जिसकी सबसे खास पहचान उसका नाम है।

नाम जो कभी नहीं बदलता

हर शहर का नाम उसकी संस्कृति, इतिहास या किसी खास वजह से रखा जाता है। लेकिन भारत में एक शहर ऐसा भी है, जिसका नाम अपनी अनोखी खासियत के कारण पूरे देश में अलग जगह रखता है। यह नाम चाहे आप आगे से पढ़ें या पीछे से, बिल्कुल एक जैसा ही रहेगा।

इस तरह के शब्दों को Palindrome (पैलिंड्रोम) कहा जाता है। सामान्य शब्दों में तो पैलिंड्रोम अक्सर देखने को मिलते हैं, लेकिन किसी शहर का नाम इस तरह का होना बेहद दुर्लभ है। और यही कारण है कि यह शहर भारत के नक्शे पर अनोखा दर्जा रखता है।

हजार साल से भी पुराना इतिहास

इस शहर का इतिहास बेहद पुराना है। माना जाता है कि लगभग 989 ईस्वी में इस शहर की नींव रखी गई थी। इसकी स्थापना नृप केशरी ने की थी, जो उस समय केसरी वंश के शासक थे।

इसके बाद लंबे समय तक यह शहर राज्य की राजधानी भी रहा। गंग वंश और सूर्य वंश ने यहां शासन किया और इसे सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से मजबूत बनाया।

किस-किसका रहा शासन

इतिहास के पन्ने पलटें तो पता चलता है कि इस शहर पर समय-समय पर अलग-अलग शासकों ने शासन किया।

  • 12वीं शताब्दी में यहां गंग वंश का दबदबा था।
  • 14वीं शताब्दी में यह फिरोज शाह तुगलक के अधीन आया।
  • इसके बाद यह मुगलों के अधिकार में रहा, जहां इसे उच्च स्तरीय प्रांत का दर्जा दिया गया।
  • 1750 के आसपास यह मराठों के नियंत्रण में आया।
  • 1803 में अंग्रेजों ने यहां अपनी सत्ता स्थापित कर दी।

इतिहास में कई उतार-चढ़ाव देखने के बावजूद यह शहर अपनी पहचान बनाए रहा।

क्यों है यह शहर खास?

इस शहर की पहचान सिर्फ उसके नाम तक सीमित नहीं है। यहां की ऐतिहासिक धरोहर, किले और मंदिर आज भी लोगों को अपने अतीत से जोड़ते हैं। साथ ही यह शहर कला, हस्तशिल्प और परंपराओं के लिए भी जाना जाता है।

यहां बनने वाला सिल्वर फिलिग्री वर्क यानी चांदी की बारीक नक्काशी पूरी दुनिया में मशहूर है। यही कारण है कि इसे “सिल्वर सिटी” भी कहा जाता है। इसके अलावा यहां का दुर्गा पूजा उत्सव पूरे देश में प्रसिद्ध है।

आधुनिक पहचान

आज के दौर में यह शहर आधुनिकता की ओर भी आगे बढ़ चुका है। यहां शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य सेवाएं और व्यावसायिक केंद्र मौजूद हैं। यही वजह है कि यह न सिर्फ ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

रहस्य का खुलासा – कौन है यह शहर?

अब तक आपने पढ़ लिया कि भारत में एक ऐसा शहर है, जिसका नाम उल्टा और सीधा लिखने पर भी बिल्कुल नहीं बदलता। यह शहर और कोई नहीं, बल्कि ओडिशा का कटक (Cuttack) है।

“कटक” शब्द उल्टा या सीधा लिखने पर हमेशा एक जैसा ही रहता है, और यही वजह है कि यह भारत का इकलौता शहर है जिसकी यह अनोखी पहचान है।https://www.patrika.com/education-news/iq-test-cuttack-is-the-only-city-in-india-whose-name-does-not-change-even-if-you-turn-it-upside-down-19407033

निष्कर्ष

भारत के हर शहर की अपनी एक खासियत होती है, लेकिन ओडिशा का यह शहर अपनी अनोखी विशेषता की वजह से सबसे अलग है। हजार साल से भी पुराना इतिहास, कई राजवंशों का शासन, सांस्कृतिक पहचान और आधुनिक विकास – इन सबके साथ-साथ इसका नाम इसे और भी खास बना देता है।

यह कहना गलत नहीं होगा कि यह शहर सिर्फ ओडिशा की ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की शान है।

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Jiya lal verma

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