देहरादून में तबाही: देहरादून में सोमवार की आधी रात को अचानक हुई तेज बारिश और बादल फटने की घटना ने पूरे शहर में हाहाकार मचा दिया। रात के सन्नाटे में जब लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे, तभी आसमान से बरसी मूसलाधार बारिश ने हर तरफ अफरा-तफरी मचा दी। पानी इतनी तेजी से नदियों और नालों में भरा कि देखते ही देखते सड़कों पर बाढ़ जैसे हालात हो गए। कई घरों में पानी घुस गया, बिजली के पोल बह गए और वाहनों का आना-जाना रुक गया। इस प्राकृतिक आपदा में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, जबकि कई लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
इस हादसे की खबर जब उत्तर प्रदेश तक पहुंची तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में टोंस नदी के किनारे जो त्रासदी हुई है, वह बेहद पीड़ादायक है। योगी ने कहा, “मेरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दें और घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें।”
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस आपदा में जिन उत्तर प्रदेश के नागरिकों की मृत्यु हुई है, उनके परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही, अधिकारियों को यह भी आदेश दिए गए कि मृतकों के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ उनके घर तक पहुंचाया जाए।
देहरादून की इस आपदा में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद मंडल के मजदूर भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जानकारी के अनुसार, अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के रहरा गांव और आस-पास के इलाकों से गए 11 मजदूर अचानक आए पानी के तेज बहाव में फंस गए। इनमें से एक युवक का शव बरामद हो गया है जबकि बाकी की तलाश अभी जारी है।
बताया जा रहा है कि रक्षाबंधन के बाद ये मजदूर काम की तलाश में देहरादून पहुंचे थे। सहस्रधारा इलाके में जब बादल फटा तो वहां मौजूद मजदूर नाले के तेज बहाव में बह गए। रहरा गांव के तीन युवक – पुष्पेंद्र (20), पीतम (22) और पंकज (27) – भी इसमें बह गए। इनमें से पंकज का शव बरामद हुआ है, लेकिन पुष्पेंद्र और पीतम अब भी लापता हैं।
इसी तरह मुरादाबाद जिले के बिलारी तहसील के मुड़िया जैन गांव के 9 मजदूरों का भी अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। अचानक आई इस त्रासदी से दोनों जिलों में मातम छा गया है। परिजन रोते-बिलखते देहरादून पहुंच गए हैं ताकि अपने प्रियजनों का कुछ पता लगा सकें।
देहरादून में भारी बारिश और बादल फटने की घटना के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) को रेस्क्यू अभियान में लगाना पड़ा। एनडीआरएफ की टीम ने प्रेमनगर इलाके में दो महत्वपूर्ण बचाव अभियान चलाए। इनमें एक छोटे बच्चे और करीब 497 छात्रों को सुरक्षित निकाला गया।
सोमवार देर रात की इस बारिश ने न केवल शहर की सड़कें डुबो दीं बल्कि कई इलाकों को पूरी तरह से ठप कर दिया। सोशल मीडिया पर एनडीआरएफ ने जानकारी दी कि राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है। फिलहाल तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन प्रशासन को आशंका है कि मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती है।
तेज बारिश के बाद देहरादून की कई प्रमुख सड़कें नदी जैसी बन गईं। नकरौंदा, डालनवाला और आर्यनगर जैसे इलाकों में पानी घरों तक घुस गया। बिजली के पोल तेज धारा में बह गए, जिससे कई जगह अंधेरा छा गया।
मसूरी-दून रोड पर पानी बैंड के पास भूस्खलन हो गया। इससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और घंटों तक यातायात ठप रहा। स्थानीय लोग बताते हैं कि रातों-रात हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें समझ नहीं आया कि किस तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंचा जाए। बच्चों और बुजुर्गों को निकालने में पुलिस और राहतकर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
इस आपदा का सबसे ज्यादा असर उन गांवों पर दिखा जहां से मजदूर काम की तलाश में देहरादून गए थे। अमरोहा और मुरादाबाद के रहरा और मुड़िया जैन गांवों में हर घर से रोने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। जिन परिवारों ने अपने किसी सदस्य को खो दिया है, वे गहरे सदमे में हैं और जिनके प्रियजन लापता हैं, उनके घरों में चिंता और बेचैनी का माहौल है।
रहरा गांव के एक परिवार ने बताया कि उनका बेटा बहन से राखी बंधवाने के बाद देहरादून मजदूरी करने गया था। लेकिन अब तक उसका कोई पता नहीं चला। इसी तरह बिलारी इलाके के कई परिवार प्रशासन और पुलिस से लगातार जानकारी लेने की कोशिश कर रहे हैं।
देहरादून प्रशासन और राहत एजेंसियों के लिए यह आपदा किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। भारी बारिश और उफनती नदियों के कारण बचाव कार्य बेहद कठिन हो गया है। कई जगहों पर सड़कें टूट गई हैं और भूस्खलन के कारण रेस्क्यू टीमों को घटनास्थल तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है।
फिर भी एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की टीम लगातार काम कर रही है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया जा रहा है और खाने-पीने का सामान पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और अफवाहों से बचें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि इस दुख की घड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि मृतकों और लापता लोगों के परिवारों की हर संभव मदद की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक सहायता के अलावा राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि परिजनों को किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े। योगी का यह बयान पीड़ित परिवारों के लिए राहत की किरण की तरह है।
देहरादून की यह त्रासदी हमें यह याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना असहाय है। मानसून के मौसम में पहाड़ी इलाकों में अक्सर बादल फटने और तेज बारिश की घटनाएं होती रहती हैं। टोंस नदी और सहस्रधारा जैसे इलाकों में अचानक पानी का स्तर बढ़ जाना जानलेवा साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन पूरी तरह सतर्क है ताकि किसी और नुकसान को रोका जा सके।https://www.livehindustan.com/uttarakhand/dehradun
देहरादून में आधी रात को हुई बारिश और बादल फटने की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं। जनहानि और तबाही के इस मंजर ने साफ कर दिया है कि पहाड़ी राज्यों में आपदा प्रबंधन और मजबूत करने की आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा घोषित मुआवजा और मदद प्रभावित परिवारों के लिए राहत जरूर है, लेकिन सच्ची राहत तभी होगी जब लापता लोग सुरक्षित मिल जाएं। इस वक्त हर आंख यही दुआ कर रही है कि उनके अपने लोग किसी तरह घर लौट आएं।
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